Old Testament
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यहोशू 7:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब सब इस्राएलियों समेत यहोशू जेरहवंशी आकान को, और उस चाँदी और ओढ़ने और सोने की ईंट को, और उसके बेटे-बेटियों को, और उसके बैलों, गदहों और भेड़-बकरियों को, और उसके डेरे को, अर्थात् जो कुछ उसका था उन सब को आकोर नामक तराई में ले गया।
यहोशू 7:24 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 7:24 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 15:7 (HINIRV) »
और वही सीमा आकोर नामक तराई से दबीर की ओर चढ़ गया, और उत्तर होते हुए गिलगाल की ओर झुकी जो तराई के दक्षिणी ओर की अदुम्मीम की चढ़ाई के सामने है; वहाँ से वह एनशेमेश नामक सोते के पास पहुँचकर एनरोगेल पर निकला;

1 तीमुथियुस 6:9 (HINIRV) »
पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुत सी व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फँसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डुबा देती हैं। (नीति. 23:4, नीति. 15:27)

निर्गमन 20:5 (HINIRV) »
तू उनको दण्डवत् न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला परमेश्वर हूँ, और जो मुझसे बैर रखते हैं, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूँ,
मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
यहोशू 7:24 में आकान और उसके परिजनों तथा उनकी समस्त संपत्ति को दण्डित करके इस्राएल यह स्पष्ट करता है कि व्यक्तिगत पाप का प्रभाव सामूहिक सम्मान और सफलता को भी प्रभावित कर सकता है। न्यायात्मक क्रिया पवित्रता की आवश्यकता और समुदाय में पाप के गंभीर परिणामों को दर्शाती है।
साहित्यिक प्रसंग
यह श्लोक यरिखा के पतन के बाद तथा ऐइर में इस्राएल की पराजय के संदर्भ में आता है। पूरा अध्याय आकान के पाप की खोज, उसका स्वीकार और दण्डन की प्रक्रिया बताता है। यह कथा न्यायिक जांच, सार्वजनिक सुस्पष्टता और धार्मिक विशुद्धि की परंपरा का हिस्सा है जो आगे के विजय तथा संस्थापन की तैयारी में आवश्यक समझी गई।
धार्मिक और नैतिक महत्व
1) पाप का सामूहिक प्रभाव: एक व्यक्ति का उल्लंघन पूरे समुदाय को प्रभावित कर सकता है; इसलिए सामुदायिक पवित्रता की जिम्मेवारी पर बल दिया जाता है।
2) ईश्वर की प्रतिबद्धता और न्याय: ईश्वर का वचन और आदेश सम्मानित करना आवश्यक है; उल्लंघन के परिणाम अनुपालन और पवित्रता की आवश्यकता को स्पष्ट करते हैं।
3) दण्ड और शुद्धि का संतुलन: दण्डार्थ क्रिया केवल सजा नहीं, बल्कि समुदाय को नए सिरे से शुद्ध करने का माध्यम भी है ताकि भविष्य में ईश्वर के साथ संबंध ठीक रह सके।
पवित्रशास्त्र के साथ संबंध
प्रतिबिंब के लिए प्रश्न
1) हमारी सामूहिक जिम्मेदारियाँ क्या हैं — व्यक्तिगत विश्वास और समुदाय के बीच संतुलन आप कैसे समझते हैं?
2) जब किसी के अन्तरंग पाप का प्रभाव समूह पर पड़ता है, तब प्रेम और अनुशासन को कैसे संतुलित किया जा सकता है?
3) क्या आज के संदर्भ में "शुद्धि" और "न्याय" की आज्ञाएँ समान रूप से लागू होती हैं, और हमें उन्हें कैसे व्यावहारिक रूप से अपनाना चाहिए?
मिथ्यापूर्ण उद्धरण और पुराने टिप्पणीकारों से दृष्टि
मैथ्यू हेनरी का सारांश अक्सर यही बताता है कि पाप को छिपा नहीं रखा जा सकता और वह अंततः बाहर आकर न्याय का कारण बनता है। अल्बर्ट बार्न्स ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार का दण्ड उस समय की कानूनी तथा नैतिक आवश्यकताओं के अनुरूप था। एडम क्लार्क ने सामाजिक तथा धार्मिक अनुशासन की औचित्य पर टिप्पणी की है। (इन टिप्पणियों का अनुवाद और मुक्त सारांश उपर्युक्त मूल व्याख्याओं में एकीकृत किया गया है।)
निष्कर्ष
यहोशू 7:24 सामुदायिक पवित्रता, न्याय और व्यक्तिगत उत्तरदायित्व के बीच गहरा सम्बन्ध दिखाता है। आकान का दण्ड न केवल प्रतिकूल परिणाम था, बल्कि यह इस्राएल को यह सीखने का माध्यम बना कि विजय केवल बाहरी संघर्ष से नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि और ईश्वर के आदेश के पालन से सुनिश्चित होती है। इस पाठ से यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर के साथ सच्चा संबंध व्यक्तिगत समर्पण और पूरे समुदाय की पवित्रता दोनों पर निर्भर करता है।