Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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यहोशू 19:1 का अर्थ और पृष्ठभूमि
सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह वचन शिमोन के कुलों के लिए गोत्र-वार नामों की दूसरी चिट्ठी की बात करता है और उनके भाग को यहूदियों के हिस्से के बीच में टिकाने के बारे में बताता है। यह बताता है कि शिमोन tribe के किस क्षेत्र-खंड पर उनकी मिल्कियत थी, ताकि उनके सदस्य अपने क्षेत्र में राजधानी में स्थापित न होकर, यहूदियों की भूमि के भीतर एक संरक्षित और मान्य क्षेत्र में अपना स्थान बना सकें।
पृष्ठभूमि और स्थान
यह भाग यहोशू के भागों के वितरण की प्रक्रिया का हिस्सा है। जैसे-जैसे लेवी और अन्य गोत्रों के लिए उनके हिस्से निर्धारित होते हैं, वैसे ही शिमोन के गोत्र के लिए भी उनके proper क्षेत्र का निर्धारण किया गया। यहूदी समाज में क्षेत्र-निर्धारण सामाजिक, धार्मिक और संरक्षण के दृष्टिकोण से प्रमुख था, ताकि प्रत्येक जनजाति अपने-अपने जीवन-आधारों को बनाए रखे और तीर्थ-यात्रा तथा वार्षिक पर्व-उत्सवों के समय एक एकीकृत समाज बना रहे।
भाषा-परमार्थ और संदेश
इस वाक्य में “दूसरी चिट्ठी” आदि शब्द बोली-चाल के अनुसार क्षेत्र-निर्धारण का एक क्रम बताती है। यहूदियों के बीच शिमोनियों के गोत्रों का यह भाग उसी क्रम में रखा गया है जो उनके मौजूदा जीवन-योजनाओं और सुरक्षा-सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य से अनुकूल था। यह बताता है कि उनके गोत्र के सदस्य, भले ही शिमोन क्षेत्र-सीमा के भीतर एक हिस्से में रहते हों, पर वे यहूदियों के साथ ही सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में भागीदार थे।
Interpretive observations
मध्य-युक्तिसद्गत बिंदु — छोटी सूची
अन्य उद्धरण और सम्बद्ध लेखन
कई पूर्व-युग के टिप्पणीकारों ने इस प्रकार के भागों को समुदाय की संरचना और क्षेत्र-निर्धारण के दृष्टिकोण से समझाया है। उदाहरण के रूप में, मैथ्यू हेनरी ו Albert Barnes और Adam Clarke के सार-कथन इस प्रकार हैं: वे संकेत करते हैं कि हर गोत्र के लिए एक विशिष्ट भू-भाग की निर्धारिती से सामाजिक-धर्मिक व्यवस्था सुनिश्चित होती है; यह परिप्रेक्ष्य यहूदियों की एकता तथा सुरक्षा के नियमों को दर्शाता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ-सम्बन्ध)
यहोशू के वितरण के समकक्ष अन्य क्षेत्रों के भागों का उल्लेख यहाँ-उक्त है; एकीकृत वितरण से यह स्पष्ट होता है कि गोत्रों के पास अपनी-अपनी भूमि थी, ताकि वे अपने रीति-रिवाज और सुरक्षा-व्यवस्था को संभाल सकें। इसके साथ जुड़े यह लेख यह भी दर्शाते हैं कि क्षेत्रीयता कैसे समुदाय को संरक्षित करती है और साथ ही बड़े समूह के साथ एकता का अनुभव कराती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम सीखते हैं कि समुदाय की स्थिरता के लिए क्षेत्रीय पहचान जरूरी हो सकती है, पर 그것 सामाजिकता और धार्मिक-आस्थाओं के साझा केन्द्रों के साथ संतुलित हो। हमारे जीवन-योजना में भी यही गुण देखने को मिलते हैं: पहचान बनाते रहते हुए भी एक दूसरे के साथ एकजुट रहने की प्रेरणा।