Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 19:1 यहोशू 19:2 यहोशू 19:3 यहोशू 19:4 यहोशू 19:5 यहोशू 19:6 यहोशू 19:7 यहोशू 19:8 यहोशू 19:9 यहोशू 19:10 यहोशू 19:11 यहोशू 19:12 यहोशू 19:13 यहोशू 19:14 यहोशू 19:15 यहोशू 19:16 यहोशू 19:17 यहोशू 19:18 यहोशू 19:19 यहोशू 19:20 यहोशू 19:21 यहोशू 19:22 यहोशू 19:23 यहोशू 19:24 यहोशू 19:25 यहोशू 19:26 यहोशू 19:27 यहोशू 19:28 यहोशू 19:29 यहोशू 19:30 यहोशू 19:31 यहोशू 19:32 यहोशू 19:33 यहोशू 19:34 यहोशू 19:35 यहोशू 19:36 यहोशू 19:37 यहोशू 19:38 यहोशू 19:39 यहोशू 19:40 यहोशू 19:41 यहोशू 19:42 यहोशू 19:43 यहोशू 19:44 यहोशू 19:45 यहोशू 19:46 यहोशू 19:47 यहोशू 19:48 यहोशू 19:49 यहोशू 19:50 यहोशू 19:51



सीधा अर्थ
यहोशू 19:36 में सूचीबद्ध स्थान—अदामा, रामाह, हासोर—यहोशू के समय में इज़राइल की भूमि के विभाजन के अंतर्गत मनसे की वंशावली को दी गई सीमाओं और नगरों की नमूना सूची के हिस्से हैं। यह शाब्दिक रूप से उन गाँवों और नगरों के नाम पेश कर रहा है जो उस विभाजन में शामिल थे।
पार्श्वभूमि
पुरोवकः यह श्लोक यहोशू अध्याय 13–21 की व्यापक सूचीबद्ध भूमि-विभाजन घटनाओं के अंतर्गत आता है। अध्याय 19 में विभिन्न परिवारों को उनकी प्राप्ति बताने के लिए नगरों और कस्बों की सूचियाँ दी गई हैं। मनसे की भूमि यह उन वंशों में से एक थी जिन्हें जम्मू और गालिल के आस-पास दी गई थी। सूची का उद्देश्य ऐतिहासिक और कानूनी दोनों तौर पर स्पष्ट सीमा निर्धारित करना था ताकि वंशानुगत अधिकारों की पुष्टि हो सके।
विवेचनात्मक टिप्पणियाँ
1) नामों का अर्थ और चिन्ह: अदामा (अर्थ: मृदा/भूमि), रामाह (अर्थ: ऊँचा स्थान या टार), हासोर (अर्थ: आग या उज्ज्वल स्थान)—ये नाम स्थानीय स्थल-विशेषताओं या प्राचीन स्मरणों से संबंधित हो सकते हैं।
2) सूची का साहित्यिक प्रयोजन: बार-बार नामों को गिनाना याददाश्त और दावे का प्रमाण है। यह धार्मिक-नैतिक संदेश भी देता है कि देवता ने अपने वादे को पूरा किया और उनकी व्यवस्था के अनुसार भूमि बांटी गई।
3) ऐतिहासिक-स्थानीय संदर्भ: इन नगरों के नाम कनान के पारंपरिक शहरों के साथ मेल खाते हैं; हालांकि आधुनिक पुरातत्व और नाम-मैपिंग में कुछ पहलुओं पर बहस चलती है, पाठ का मुख्य उद्देश्य आधिकारिक वितरण का अभिलेख प्रस्तुत करना है, न कि भू-वैज्ञानिक विवरण देना।
महोत्त्वपूर्ण बिंदु
संबंधित पृष्ठांश और व्याख्या
यहोशू 13–21: पूरा भू-विभाजन और वंशों के नामों का विस्तृत विवरण; यह श्लोक इसी श्रृंखला का हिस्सा है और विभाजन के कानूनी अभिलेख को पूरा करता है।
निर्गमन 23:30–33: यह मार्गदर्शन बताता है कि कैसे आवश्यक शहर और भूमि लिया जाए—यह अपेक्षा और परिपक्वता का आधार था जिससे यहोशू का कार्य संभव हुआ।
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क से संक्षिप्त संदर्भ
मैथ्यू हेनरी ने इस तरह की सूचियों के बारे में लिखा कि वे "ईश्वर के वादों की पूर्ति और व्यवस्था का प्रमाण" हैं (संक्षिप्त उद्धरण की अनुमति अनुसार संदर्भ)। अल्बर्ट बार्न्स ने माना कि सूची का उद्देश्य "विधिक और ऐतिहासिक अभिलेख" बनाना था। एडम क्लार्क ने इन स्थानों को स्थानीय पहचान और वंशानुगत अधिकारों के प्रतीक के रूप में देखा।
व्यावहारिक उपयोग
यह श्लोक आज के पाठक को यह सिखाता है कि ईश्वर की व्यवस्था और वचन की पूर्ति अक्सर साधारण, रोजमर्रा के विवरणों में दिखती है—नाम, सीमाएँ, और भूमि का विभाजन। छोटे-छोटे विवरण इतिहास और पहचान को बनाते हैं; इसी तरह आध्यात्मिक जीवन में नियमितता और अनुशासन विश्वास की स्थिरता को बनाते हैं।