Old Testament
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यहोशू 12:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एक, मादोन का राजा; एक, हासोर का राजा;
यहोशू 12:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 12:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 11:1 (HINIRV) »
यह सुनकर हासोर के राजा याबीन* ने मादोन के राजा योबाब, और शिम्रोन और अक्षाप के राजाओं को,

यहोशू 11:10 (HINIRV) »
उस समय यहोशू ने घूमकर हासोर को जो पहले उन सब राज्यों में मुख्य नगर था ले लिया, और उसके राजा को तलवार से मार डाला।

न्यायियों 4:2 (HINIRV) »
इसलिए यहोवा ने उनको हासोर में विराजनेवाले कनान के राजा याबीन के अधीन कर दिया, जिसका सेनापति सीसरा था, जो अन्यजातियों के हरोशेत का निवासी था।
यहोशू 12:19 का संधारण एवं संदर्भ
यह पद कुल राज्य–युद्धों के संकलन का भाग है जो यहीं तक सीमित नहीं रहता, वरन यहोशू के समय के विविध राजा-राज्यों की सूची देता है। इस अध्याय में इज़राइल के प्रवेश के पश्चात्, भूमि के अधिकांश भागों के दायरे के भीतर के सभी वीरता-युद्धों और राजाओं की सूची दी जाती है ताकि यह स्पष्ट हो कि किसने किस क्षेत्र पर शासन किया और किस ने कौन-से क्षेत्र को conquered किया। यहोशू 12 अध्याय, विशेषकर वंशानुक्रमिक सूची के रूप में, परमेश्वर की कृपा से पूरी भूमि के विभाजन और सत्ता-खंडण की संरचना को उद्घाटित करता है।"
मुख्य संदेश
पक्का नियंत्रण और सीमा-चिन्ह के साथ यहोशू 12:19 यह बताता है कि इज़राइल के विरुद्ध शासन करने वाले सभी राजा एक-एक करके हर क्षेत्र के अधिपति रहे। यह शासकीय सफलता की गिनती नहीं, बल्कि परमेश्वर के वादे के साथ भूमि के दायरे-निर्देशन की पूर्ति का संकेत है। हर नायक, चाहे वह मादोन का राजा हो या हासोर का राजा, यह दर्शाता है कि परमेश्वर की योजना में शासन-व्यवस्था के सभी पहलुओं का समावेश है—राजाओं की सत्ता सीमाओं के भीतर और योजना-निर्देशन की पूर्ति में।
दो–तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पासेज़ (Cross-references) और उनके अर्थ
1) यूहन्ना-याजक जीवन में भूमि के दायरे की चर्चा: यह संदर्भ दिखाता है कि परमेश्वर ने हर क्षेत्र की सीमाओं को निर्धारित किया ताकि समाज एक orderly क्रम में चल सके।
2) यहोशू 11 के कालखंड के बाद की विजय गाथा: बड़े विजय-युद्धों की सूची से यह पुनः स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के वादे कैसे भूमि के हर भाग तक पहुँचते हैं।
3) अन्य आनुषांगिक सूची जो क्षेत्रीय अधिकार दर्शाती है: यह अध्याय दर्शाता है कि विविध राजा-जातियाँ किस प्रकार भूमि के हिस्से-हक के लिए लड़ती रहीं—जो अब स्थिर राजनीतिक-परिस्थिति का भाग बनती है।
व्यावहारिक विचार
हर क्षेत्र की सीमा स्वयं में एक संकेत है—परमेश्वर ने देश को एक संरचित, केंद्रित मार्ग पर रखा ताकि लोग एक दूसरे के साथ शांति से रहें और उनकी पहचान एक राष्ट्र के रूप में बनी रहे। आज भी हमारी आस्था से जुड़े निर्णयों में स्पष्ट नैतिक सीमाओं का महत्त्व है: जैसे परिवार, कार्य, विवाद-नियमन आदि—जहां स्पष्टता और जिम्मेदारी वही पवित्र व्यवस्था बनाती है।
संक्षिप्त समापन
यहोशू 12:19 एक संपूर्ण भू-यात्रा और राजसी व्यवस्था का हिस्सा है, जो दिखाता है कि कैसे परमेश्वर ने भूमि को क्रमबद्ध किया और विभिन्न राजा-क्षेत्रों के साथ एक व्यवस्था कायम की। यह शास्त्रीय सूची स्मरण कराती है कि सत्ता, सीमा और विश्वास–इन तीनों का संतुलन परमेश्वर की योजना में अनुकूल है।
संदर्भ ग्रंथों के उद्धरण (संक्षेप)
मथ्यू Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के शास्त्रीय टिप्पणीकारों के छोटे उद्धरण अगर उपलब्ध हों तो केवल वही सत्यापित रूप में दिए गए हैं—यह पूरा पाठ्य उन उद्धरणों के साथ संगत रहता है।