Old Testament
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यहोशू 12:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एक, दोर नामक ऊँचे देश के दोर का राजा; एक, गिलगाल के गोयीम का राजा;
यहोशू 12:23 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 12:23 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 11:2 (HINIRV) »
और जो-जो राजा उत्तर की ओर पहाड़ी देश में, और किन्नेरेत के दक्षिण के अराबा में, और नीचे के देश में, और पश्चिम की ओर दोर के ऊँचे देश में रहते थे, उनको,

उत्पत्ति 14:1 (HINIRV) »
शिनार के राजा अम्रापेल, और एल्लासार के राजा अर्योक, और एलाम के राजा कदोर्लाओमेर, और गोयीम के राजा तिदाल के दिनों में ऐसा हुआ,

यहोशू 4:19 (HINIRV) »
पहले महीने के दसवें दिन को प्रजा के लोगों ने यरदन में से निकलकर यरीहो की पूर्वी सीमा पर गिलगाल में अपने डेरे डालें।
पद का तात्पर्य और तात्कालिक सेटिंग
यहोशू 12:23 के हिस्से में उन सभी राजा-रत्नों की सूची निर्धारित है जिन्हें इजराइल ने अपने विरुद्ध युद्धों में हराकर प्राप्त किया। यहाँ "डोर" नामक ऊँचे देश के दोर राजा और "गिलगाल के गोयीम" के राजा का उल्लेख है। यह पाठ Joshua के अभियान के परिणामस्वरूप चारों ओर से जीते गए राज्य-राजाओं की एक.Sequential सूची है—उन्हीं ठिकानों के राजा जिन पर पूर्ववर्ती मिस्र-यूनानी स्मृतियों के समान विजय का संकेत है।
इस टेक्स्ट से परमेश्वर या विश्वास के बारे में क्या उजागर होता है
इस सूचीय पंक्ति के भीतर यह दिखता है कि परमेश्वर ने इजराएल के लिए हर विस्तृत क्षेत्र में विजय की व्यवस्था की, ताकि भूमि उसे देवत्व-उत्पन्न आशीष के रूप में मिल सके। राजा-राजाओं की सूची के साथ यह प्रमाणित होता है कि परमेश्वर का सामर्थ्य और वादों की पूर्ति अतीत के युद्धों में भी प्रकट होती है। यह भी संकेत देता है कि भगवान अपने लोगों के साथ संस्थित की गई सीमाओं के भीतर जीवन देता है—हारी के बाद भी विजय, भय के स्थान पर विश्वास।
मुख्य शब्दों/छवियों की स्पष्टता
अन्य संदर्भ जिन्हें समझने में मदद मिलती है
यह सूची उन युद्धों की पुष्टि करती है जिन्हें पहले अध्यायों में वर्णित किया गया है, जहाँ यरूशलेम शहर के बाहर की विजयें लगातार दिखाई देती हैं।
क्या सीख मिलती है—आज के जीवन के लिए धन्यवाद और निर्देश
- विश्वास का प्रेरक महत्व: जब आप कौनसे भी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कदम उठाते हैं, तब भी परमेश्वर की योजनाओं पर भरोसा रखना सिखाता है कि वह हर बाधा के पार विजय देता है।
- स्मरण और कृतज्ञता: अपने संघर्ष-स्थलों को याद रखना और परमेश्वर की सहायता के प्रति आभारी ठहरना एक अनुस्मारक है कि हमारी जीत उसकी कृपा से है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संबंध
1) यूहन्ना के समान विजयी जीवन के संकेत: प्रभु के साथ चलना और उन्हें अपने मार्गदर्शक मानना।
2) स्मरण-वचन: पिछले अभियानों की स्मृति से आशाओं को पुष्ट करना।
3) आस्था बनाम भय: परमेश्वर की सहायता से भय का सामना करना सीखना।
नोट: उपरोक्त क्रॉस-रेफरेंसेस सीधे उद्धृत नहीं हैं, पर इनसे टेक्स्ट के साथ निहितार्थ स्पष्ट होते हैं।
एक संक्षिप्त समरी
युद्ध-विजयों की यह सूची दर्शाती है कि परमेश्वर ने इजराइल के लिए जगह-जगह विजय को संभव किया—यह उनके विश्वास, दायित्व और पृथ्वी पर परमेश्वर की सत्ता की पुष्टि है। आज के पाठक के लिए यह प्रेरणा है कि प्रभु पर निर्भर रहते हुए कठिनाइयों में भी विश्वास रखें और उसकी कृपा से आगे बढ़ें।
नोट: नीचे उद्धरण केवल Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से हो तो ही लिखे जाएंगे; यहाँ विशेष उद्धरण नहीं दिए गए हैं क्योंकि मूल पाठ का संक्षेप-व्यास स्पष्ट है।