Old Testament
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यहोशू 12:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और हेर्मोन पर्वत सल्का, और गशूरियों, और माकियों की सीमा तक कुल बाशान में, और हेशबोन के राजा सीहोन की सीमा तक आधे गिलाद में भी प्रभुता करता था।
यहोशू 12:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 12:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 3:14 (HINIRV) »
और मनश्शेई याईर ने गशूरियों और माकावासियों की सीमा तक अर्गोब का सारा देश ले लिया, और बाशान के नगरों का नाम अपने नाम पर हब्बोत्याईर रखा, और वही नाम आज तक बना है।)

1 शमूएल 27:8 (HINIRV) »
और दाऊद ने अपने जनों समेत जाकर गशूरियों, गिर्जियों, और अमालेकियों पर चढ़ाई की; ये जातियाँ तो प्राचीनकाल से उस देश में रहती थीं जो शूर के मार्ग में मिस्र देश तक है।

यहोशू 13:11 (HINIRV) »
और गिलाद देश, और गशूरियों और माकावासियों की सीमा, और सारा हेर्मोन पर्वत, और सल्का तक सारा बाशान,
यहोशू 12:5 का हिन्दी टीका (HINIRV)
यह पद पुरानी नई व्यवस्था के समय के विजय-यात्रा के आधिकारिक सार को सामने रखता है — यदि हम यह देखना चाहें कि प्रभु ने किस प्रकार वर्चस्व स्थापित किया, तो इस वाक्य में विभाजन और सीमाओं के साथ-साथ परमेश्वर की दी हुई सत्ता की गहराई स्पष्ट होती है। यह पंक्ति बताती है कि काउंसिलर नहीं, बल्कि प्रभु की शक्ति से ही इजराइल ने विभिन्न क्षेत्रों पर अधिकार किया।
पद का संदर्भ और अध्याय के साथ स्थिति
यहोशू के युद्ध-विजयों के भाग में यह सूचित करता है कि यहूदा के हथियारबंद दस्ते ने हिर्मोनी पर्वत सल्का, गशूरियों, माकियों की सीमा, बाशान के राजा सीहोन की सीमा तक तथा आधे गिलाद तक प्रभुता ग्रहण की। यह हिमालयी और पहाड़ों वाले भू-भागों से ले कर अधिकतर सीमा-रेखा पर प्रभु की सत्ता की पुष्टि है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य बाइबिल संदर्भों से तुलना
इस पंक्ति में सामना होने वाले क्षेत्रीय अधिकार, जैसे कि सीहोन का राज्य और गिलाद के क्षेत्र, मिसाल बनते हैं कि परमेश्वर की योजना में शत्रुओं के विरुद्ध प्रभुत्व उसकी इच्छा से ही आता है। पहले पलों में भी यहूदी इतिहास दिखाता है कि परमेश्वर के निर्देश के अनुसार आगे बढ़ना ही सच्चे विजय का मार्ग है; इसी प्रकार याचना, धैर्य और आज्ञापालन से अतीत के खतरे दूर होते हैं।
विधेयक-अप्लिकेशन
आज के पाठकों के लिए इसका अर्थ है: सुरक्षा केवल हथियारों में नहीं, बल्कि परमेश्वर की आज्ञाओं में है। जीवन के क्षेत्र-सीमाओं के साथ हमने भी अपने विश्वास के आकाश-रेखा को स्पष्ट करना है: कौन से क्षेत्र अभी प्रभु के अधीन हैं और कौन से परिवर्तन की आवश्यकता है। कठिनाइयों के समय आत्म-निर्भरता छोड़कर परमेश्वर की योजना की ओर रुख रखना सीखना चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षिप्त संबंध
- यहोशू 11–12 आत्म-समर्थन एवं परमेश्वर की विजय-योजना के पूर्ण समन्वय का संदर्भ देता है। संकल्प और व्यवस्था के साथ विजय की दिशा स्पष्ट है।
- व्यवस्थाविधान 2:9–24 में सीमाओं और दान-भूमि के वितरण का क्षेत्रीय आयाम दिखता है, जो यहाँ के क्षेत्रीय प्रभुत्व को पूरक करता है।
- इब्रानियों 11:33–34 में ईमानदारी से चलने वाले के लिए विजय के संकेत मिलते हैं, जो इस पाठ के आध्यात्मिक प्रभाव को उजागर करते हैं।
संक्षेप में निष्कर्ष
यहोशू 12:5 हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर की शक्ति से ही दुष्ट शक्तियाँ और क्षेत्रीय बाधाएं मिटती हैं। सीमाएं वही होती हैं जो परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप निर्धारित हों, और जहाँ वह प्रेरित करता है, वहाँ विजय संभव है। इस पाठ में विश्वास, आज्ञापालन और क्षेत्रीय प्रभुत्व का संयोजन हमारे आध्यात्मिक जीवन के लिए मार्गदर्शक बनता है।
पूर्व-लेखन के विचार (सूत्र-संदर्भ)
“मॉथ्यू हेनरी” और “एल्बर्ट बार्न्स” तथा “एडम क्लार्क” के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि पवित्र युद्ध में परमेश्वर की गरिमा और लोगों की अनुशासन-चेतना साथ चलते हैं। उनके संकेतों के अनुसार, विजय भगवान की योजना के अनुरूप प्राप्त होती है और मानव प्रयास सिर्फ सल्तनत का भाग बनते हैं।
नोट: इस पाठ में सीधे उद्धृत अंश उपलब्ध नहीं हैं; यदि कभी मिलें, तो उन्हीं के स्रोत-उद्धरण संकेत दे दिए जाएंगे।