Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 12:15 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 12:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एक, लिब्ना का राजा; एक, अदुल्लाम का राजा;
यहोशू 12:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 12:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यहोशू 10:29 (HINIRV) »
तब यहोशू सब इस्राएलियों समेत मक्केदा से चलकर लिब्ना को गया, और लिब्ना से लड़ा;

1 शमूएल 22:1 (HINIRV) »
दाऊद वहाँ से चला, और बच कर अदुल्लाम की गुफा* में पहुँच गया; यह सुनकर उसके भाई, वरन् उसके पिता का समस्त घराना वहाँ उसके पास गया।
यहोशू 12:15 पर संक्षिप्त स्पष्टिकरण
यहोशू 12 अध्याय मेंIsrael के कितने राज्यों के राजा बताए गए हैं; यह verse सूची में 12 पिंगलों (राज्यों) के राजा की पहचान देता है। क्रमशः विश्लेषण दिखाता है कि किस तरह जातीय विभाजन के पूर्व चोटियों के बाद भी परमेश्वर की प्रेरणा से यहूदा और इस्राइल के शासन-खंड स्पष्ट होते हैं। यह छोटा पंक्तिवाली उद्धरण एक ऐसे इतिहास का भाग है जिसमें यहूदा और अन्य दूसरे देशों के राजा एक साथ सूचीबद्ध होते हैं ताकि कार्य-योजना और परमेश्वर के शासन के ढांचे का ठहराव स्पष्ट रहे।
केंद्रीय अर्थ
यह verse राजा लिब्ना के एक से जुड़ा है और साथ ही अदुल्लाम के राजा की भी पुष्टि करता है। यह एक संख्यात्मक सार है जो यह दर्शाता है कि इस्राइल के पथप्रदर्शक इतिहास में कितने राजाओं ने सत्ता हासिल की और किस प्रकार क्षेत्र-आयु के अनुसार शासन-क्रम बना। इस पंक्ति में परिस्थितिजन्य नामों के साथ यह भी दिखता है कि हर क्षेत्र पर प्रभु ने सत्ता-स्पर्धा के समय अपनी योजना के अनुसार शासन का निर्धारण किया।
मुख्य विषय
संबद्ध मल्टी-प्रेरित विचार (cross-references)
1) यहोशू 11:23 — यह बताता है कि यह्र ऐतिहासिक विजय कैसे समूचे देश के एकीकरण की दिशा में बढ़ते हैं।
2) गिनती 34:2-12 — उत्तर-सीमा के क्षेत्रों का दृष्टांत देता है, जहाँ राजा-सम्पूर्णता का संदर्भ आता है।
3) 1ushed 6:15 (अनुभाविक संदर्भ) — एकीकृत नेतृत्व के महत्व पर विचार देता है।
व्यावहारिक प्रतिफल
प्रत्येक क्षेत्र के राजा की सूची से हमें यह सीख मिलती है कि परमेश्वर के लोगों के लिए इतिहास और नेतृत्व का क्रम कैसे उद्देश्यपूर्ण रहता है। हमारी निजी जीवन में भी यह चेतना जगाती है कि हर निर्णय, चाहे छोटा या बड़ा हो, परमेश्वर की योजना से जुड़ा होता है। सतर्क रहें, अपने रास्तों को परमेश्वर के मार्गदर्शन के अनुसार मोड़ें, ताकि समूह या समुदाय में शांति बनी रहे।
संक्षेप सार
यहोशू 12:15 एक टिकाऊ इतिहास-चिह्न है जो यह दर्शाता है कि यहूदियों के तत्कालीन राज्यों के राजाओं की सूची उनके संगठित शासन-निर्णय और ईश्वर के चुनावित मार्ग के संकेतक के रूप में काम करती है।
पूर्व-उद्धरणों के नीचे नोट
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के संयुक्त विचारों के संक्षिप्त उद्धरणों की पुष्टि चाहते हैं, वे पीछे के पन्नों में विश्लेषण के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण देते हैं।
कार्य-निष्कर्ष: यह verse इतिहास-प्रधान दृष्टिकोण से यह दर्शाता है कि किस प्रकार क्षेत्रीय राजाओं के साथ एक संगठित राज्य-चरित्र बन रहा था, और यह किस प्रकार राष्ट्रीय पहचान बनाता है।