Old Testament
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यहोशू 12:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एक, होर्मा का राजा; एक, अराद का राजा;
यहोशू 12:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 12:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गिनती 21:1 (HINIRV) »
तब अराद का कनानी राजा, जो दक्षिण देश में रहता था, यह सुनकर कि जिस मार्ग से वे भेदिये आए थे उसी मार्ग से अब इस्राएली आ रहे हैं, इस्राएल से लड़ा, और उनमें से कुछ को बन्धुआ कर लिया।

गिनती 21:3 (HINIRV) »
इस्राएल की यह बात सुनकर यहोवा ने कनानियों को उनके वश में कर दिया; अतः उन्होंने उनके नगरों समेत उनको भी सत्यानाश किया; इससे उस स्थान का नाम होर्मा रखा गया।

गिनती 14:45 (HINIRV) »
तब अमालेकी और कनानी जो उस पहाड़ पर रहते थे उन पर चढ़ आए, और होर्मा तक उनको मारते चले आए।
यहोशू 12:14 – एक संकलित निष्कर्ष और संदर्भ
मुख्य interpretive point: यहोशू 12:14 में इशारा करता है कि कनान के विजय अभियान के हिस्से के रूप में यहूदा/इजराइल के अनेक राजा-संस्थाओं के विरुद्ध विकल्पों का स्पष्ट और क्रमबद्ध विवरण किया गया है। शासक-सूचियाँ यह दर्शाती हैं कि परमेश्वर का वचन, इतिहास के हर कालखंड में, प्रशासनिक संरचनाओं को भी मानक बनाकर आगे बढ़ता है—यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर का राज्य सामर्थ्य और अधिकार में स्थिर है, चाहे स्थानीय शक्ति कितनी भी बड़ी क्यों न हो।
साहित्यिक संदर्भ और संरचना
यहोशू 12 अध्याय में यूदर के कुछ प्रमुख शहरों के युद्ध और उनकी सूची प्रस्तुत करता है—मोहल, होर्मा, अराद आदि—ताकि यह दिखे कि किस प्रकार इस्राइल ने हर नई लड़ाई में परमेश्वर की सहायता से विजय पाई। इस शृंखला में 12:14 एक संकलन बिंदु के रूप में है, जो पूर्व के युद्ध-वर्णनों के साथ तालमेल बनाता है: यह दर्शाता है कि हर राजा-युद्ध के पीछे एक समन्वित divine उद्देश्य था, और यह सूची उन सभी विजयों की याद दिलाती है जो परमेश्वर के निर्देशानुसार हुईं।
आत्मिक significanse (आत्मिक महत्व)
यह इतिहास-संख्या बताती है कि God की योजना में सत्ता-शक्ति का स्रोत स्वामी वही है जो युद्ध-उद्धार से पूर्व और बाद के समयों में भी वही बना रहता है। यह हमारी आस्तिक-जीवन में भी सिखाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, परमेश्वर के निर्देश और वचन के मार्ग का पालन करते रहने से विजय संभव है।
बाइबल क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके जुड़ाव
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह समझ में आता है कि यहोशू 12:14 एक संकलन-घटना है जो विजय-इतिहास के एक सार-संरचना को समेटती है, ताकि पाठक को समग्रता का आभास हो।
धार्मिक महत्व
इस verse के पीछे का theological theme यह है कि God की सामर्थ्य और विश्वासयोग्यता इतिहास के हर चरण में बना रहता है। यहूदा-इतिहास में सत्ता की संरचना और विजय के पीछे एक दृढ़, क्रमबद्ध divine आदेश है—जो आज भी हमारे नैतिक-आधार और समुदायिक जीवन को मार्गदर्शित करता है।
प्रश्नों के लिए सुझाव
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 12:14 इतिहास के युद्ध-वर्णनों का एक सार है—प्रत्येक राजा-युद्ध, हर विजय का अंत परमेश्वर के कोप-निर्देश और कृपा से जुड़ा है। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि विश्वास में दृढ़ता और प्रार्थना के साथ परिस्थितियों को पार किया जा सकता है, क्योंकि परमेश्वर का शासन सार्वभौम है।
नोट: इस पंक्तिवाचन के लिए 5–6 शब्दों की exact quotes के बजाय संकलन का भाव रखा गया है; यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के छोटे उद्धरण चाहते हैं, तो मैं उपलब्ध public-domain टिप्पणियों से चयन कर सकता हूँ और उचित उद्धरण संरक्षित रखूँगा.