Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 12:20 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 12:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एक, शिम्रोन्मरोन का राजा; एक, अक्षाप का राजा;
यहोशू 12:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 12:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 11:1 (HINIRV) »
यह सुनकर हासोर के राजा याबीन* ने मादोन के राजा योबाब, और शिम्रोन और अक्षाप के राजाओं को,

यहोशू 19:15 (HINIRV) »
कत्तात, नहलाल, शिम्रोन, यिदला, और बैतलहम; ये बारह नगर उनके गाँवों समेत उसी भाग के ठहरे।

यहोशू 12:20—Verse का संदर्भ और अर्थ
यहोशू के ठीक पहले के भाग में इजराइल के युद्ध-युद्धों और कंस्यूट के बाद के राज्य-संरचना का चित्रण है। अध्याय 12 में उन्होंने उन सभी नगरों और राजाओं के नाम गिनवाए हैं जिन्हें योरोशू ने हराया। यहोशू 12:20 में दो राजा-स्तर के उल्लेख से प्रकट होता है कि कनान की आस्तीन में कितनी शक्तियाँ थी और परमेश्वर के लोग किस निष्कर्ष तक पहुँचे—प्रत्येक विजय के पीछे परमेश्वर की सहायता का संकेत।
मुख्य अर्थ
यह verse एक संक्षिप्त खंड है जो बताता है: शिमरोन्मरोन के राजा और अक्षाप के राजा, दोनों, इजराइलवासियों के विरुद्ध विजयी गिनती में आते हैं। यह दर्शाता है कि पूर्व के सभी प्रयासों के साथ, क्षेत्र की राजधानियाँ और शक्तिशाली शासक, सेनाओं के प्रमुख नेताओं के रूप में याद रखे गए। यह क्रम स्पष्ट रूप से यह दिखाता है कि यरूशलेम के बाहर के क्षेत्र भी God के लोगों के लिए आस्था और प्रतिरोध का सामना कर रहे थे, परन्तु परमपिता के आदेश से वे सभी परास्त हुए।
तीन प्रमुख थीम
संबद्ध पाठ और विचार
अन्य अनुभाग जो इस संदर्भ को मजबूत करते हैं:
पाठ-व्यवहारिक विचार
आज के पाठक के लिए यह संदेश है कि सफलता और सुरक्षा अक्सर स्पष्ट योजना और विश्वास के संयोजन से आती है। कठिनाइयों के बावजूद, परमेश्वर के लोगों के लिए स्मृति-चिह्न बनते हैं—युद्ध के बाद भी आपसी बंधन और भरोसा बना रहता है। अपने जीवन में भी कठिन परिस्थितियों में पहले परमेश्वर की मार्गदर्शना खोजिए, फिर कदम उठाइए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 12:20 एक सूचित सूची मात्र है जो यह दर्शाती है कि क्षेत्र के प्रमुख राजा और नगर कैसे इजराइल के विद्यमान विजय-योजनाओं के साथ जुड़ते हैं। यह हमें यह समझाता है कि इतिहास में हर महत्त्वपूर्ण विजय के पीछे एक दिव्य योजना और हाथ है—जो विश्वस्त विश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा देता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
1) यहोशू 11:1-15 — एक साथ कई राजाओं के विरुद्ध एक व्यापक विजय का चित्रण देता है; यह verse की संरचना को पूरा करता है कि कैसे क्षेत्रीय विरोधी शक्तियाँ परास्त होती गईं।
2) गिनती 21:1-3 — युध्यक्षेत्र में देव की सहायता और संघर्ष के परिणामों पर प्रकाश डालता है कि कैसे परमेश्वर के निर्देश से विजय संभव बनती है।
3) यशायाह 54:17 — विरोध के बावजूद परमेश्वर के लोगों के बचाव की स्थिरता का स्मरण कराता है।
उद्धृत छोटे अंश (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से यदि उपलब्ध):
यहाँ किन्हीं स्पष्ट उद्धरणों के रूप में प्रस्तुत नहीं हैं; यदि उपलब्ध हों तो उद्धृत पंक्तियाँ नीचे जोड़ी जाएँगीं—पर मौजूदा पाठ में उनका संक्षेप सार यह है कि परमेश्वर की सहायता से क्षेत्रीय विजयों की विधि स्पष्ट होती है।