Old Testament
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यहोशू 12:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एक, तप्पूह का राजा; एक, हेपेर का राजा;
यहोशू 12:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 12:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 19:13 (HINIRV) »
वहाँ से वह पूर्व की ओर आगे बढ़कर गथेपेर और इत्कासीन को गई, और उस रिम्मोन में निकली जो नेआ तक फैला हुआ है;


यहोशू 12:17 का सारगर्भित अर्थ
यहोशू 12:17 में दो राज्यों का उल्लेख उन अनेक राज्यों के विरुद्ध जीतों की गिनती के भागस्वरूप है। यहाँ एक छोटे-से अंश में कह दिया गया है कि तोप-घेरा या पथ-पराजय से पहले हर एक राजा के नाम गिनाए गए हैं। यह वाक्य पट्टिकाओं के बिना भी स्पष्ट है: परमेश्वर ने इस भूमि के परलोकीय विनाश के लिए इस क्षेत्र के शासनाध्यक्षों को परास्त किया था ताकि इस्राइल अपने उत्तराधिकार को ग्रहण कर सके।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोशू के पुस्तक के अंत की ओर, इस्राइल के पूर्ववर्ती अभियानों के परिणामस्वरूप, कनान की उन सभी नगर-राज्यों के राजा गिने जाते हैं जिनके विरुद्ध यहूदियों ने विजय प्राप्त की। 12:1–24 की सूचियाँ मिलाकर गिनती दर्शाती है कि किन-किन राजाओं को परास्त किया गया और किस क्रम में। यह सूची बताती है कि कनान के विभाजन से पहले इस्राइल के लिए नया क्षेत्र प्रशासनिक और सैन्य सफलता से भरा था, और यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर ने उनकी यात्रा को नियोजित क्रम में पूर्ण किया।
व्याख्यात्मक बिंदु
छोटा थीमैटिक सूची
अनुरोप cross-reference और संक्षिप्त व्याख्या
यहोशू 10:40 — यह दिखाता है कि कैसे मध्य-कनान के शहरों पर एक-एक कर विजय मिली; प्रेरित करता है कि एक प्रत्यक्ष नेतृत्व और परमेश्वर की सहायता से बड़ी जीत संभव है।
गिनती 14:24 — पूरी भूमि के व्यवस्थित प्रवेश की योजना का परिशीलन; विश्वास और नीति से निवास-स्थान प्राप्त होता है।
2 संगीत 5:6–10 — नए उत्तराधिकारी के राजा-विजय का प्रतीकात्मक संकेत देता है कि परमेश्वर के साथ भागीदारी में शोषण-रोधी कदम महत्वपूर्ण होते हैं।
व्याख्या के समय ध्यान रखने योग्य बाते
यहाँ सूची केवल गिन्ती के रूप में दी गयी है ताकि अंतःस्थापित शासन पर ध्यान बना रहे। किसी भी विजय-याडी के पीछे परमेश्वर की योजना और शक्तिशाली नेतृत्व का योगफल है, जो इस्राइल के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत बनती है।
व्यावहारिक takeaway
विश्वास की यात्रा में स्पष्ट नेतृत्व, परमेश्वर की सहायता और नीतिपूर्ण आगे बढ़ना आवश्यक है। कठिनाइयों के बीच भी विन्यास, योजना और परमेश्वरへの भक्ति बनी रहे तो बड़े टकरावों में भी विजय संभव है।
कथन-उद्धरण संकेत: “यहोशू ने झुककर परमेश्वर की सहायता पाई और कनान की धरती पर विजय पाई”— यह सार, सीधे पाठ से नहीं बल्कि व्याख्या से निकला है; पुराने-commentary से मिलते संकेतों के अनुसार यह उद्देश्य की पुष्टि करता है कि परमेश्वर के निर्देश और नेतृत्व ने सफलता दी।