Old Testament
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यहोशू 9:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यह सुनकर हित्ती, एमोरी, कनानी, परिज्जी, हिव्वी, और यबूसी, जितने राजा यरदन के इस पार पहाड़ी देश में और नीचे के देश में, और लबानोन के सामने के महानगर के तट पर रहते थे,
यहोशू 9:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 9:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 3:17 (HINIRV) »
और मैंने ठान लिया है कि तुमको मिस्र के दुःखों में से निकालकर कनानी, हित्ती, एमोरी, परिज्जी हिव्वी, और यबूसी लोगों के देश में ले चलूँगा, जो ऐसा देश है कि जिसमें दूध और मधु की धारा बहती है।'

निर्गमन 23:23 (HINIRV) »
इस रीति मेरा दूत तेरे आगे-आगे चलकर तुझे एमोरी, हित्ती, परिज्जी, कनानी, हिव्वी, और यबूसी लोगों के यहाँ पहुँचाएगा, और मैं उनको सत्यानाश कर डालूँगा।*

यहोशू 9:1 पर कवरेज: संदर्भ और एक नैतिक समझ
यहोशू के समय यरदन के पार और उसके नीचे के पहाड़ी देशों में रहने वाले विभिन्न जातियों का एक साथ संगठित होना एक बड़े जागरूकता-आह्वान का चित्र बनाता है। इस पंक्ति में उल्लेखित प्रमुख राष्ट्र—हित्ती, एमोरी, कनानी, परिज्जी, हिव्वी और यबूसी—योरदन पार और उसके निकट के भूभागों को नियंत्रित करते हैं। वे यह सुनकर एक सम्मिलित शक्ति के रूप में एकजुट होते हैं ताकि इज़राइल के विरुद्ध मिलकर लड़ाई की तैयारी कर सकें। यह संदर्भ हमें ईश्वर के लोगों पर पड़ने वाले बाहरी दबावों और उनके विश्वास-योग्यता के परीक्षण की एक ठोस तस्वीर देता है।
केंद्रीय मतलब
इस आयाम में यह स्पष्ट है कि इज़राइल-युग की युवा-परिवेशना के समय, सातों ही राष्ट्र एक संगठित रणनीति बनाकर यहूदियों के विस्तार को रोकना चाहते थे। यह वही समय है जब ईश्वर के लोग जमीन के विरुद्ध आक्रामकता से भिड़े थे और परमेश्वर की योजना के अनुरूप नई विरासत ग्रहण करने की कोशिश कर रहे थे। कहानी की यह शुरूआत दर्शाती है कि बाहरी संगठनों के मिलकर आने से आंतरिक एकता और विश्वास-समझ की आवश्यकता कितनी बढ़ जाती है।
मुख्य विषय (2–3 प्रमुख तत्व)
अनुसंधान योग्य क्रॉस-रेफरेंसेस
1) यदुवंश के विरुद्ध अन्य जातियों का संहति– यह संयोजन इज़राइल के लिए चुनौती बनता है और उन्हें ईश्वर की योजना के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है (अनुशंसा: रोम 8:28; यहूदा 1:3—धार्मिक संघर्ष में विश्वास की धुरी पर बल)।
2) परमेश्वर के लोगों पर होने वाले दबावों के बीच आस्था बनाम भय का संघर्ष—यह शोभा देता है कि चले हुए समय के अनुभव से ही आस्था मजबूत होती है (आग्रहित उदाहरण: यहोश 1:9; दान 3:18)।
व्यावहारिक विचार
यहोशू 9:1 से हमें एक पाठ मिलता है: जब बाहरी शक्तियाँ साथ आकर एकजुट हों, तब हमारे भीतर की एकता और धारणीय विश्वास–आधार सबसे मजबूत हथियार बनते हैं। कठिन परिस्थितियों में, ईश्वर के वचनों पर टिके रहना और समुदाय के बीच संसाधन, धैर्य और सत्यनिष्ठा बनाए रखना आवश्यक है।
संक्षिप्त सार
यह verse बाहरी मिली-जुली ताक़तों के सामने इज़राइल के लिए एक चेतावनी और एक अवसर है—एकता और विश्वास के बल से वे अपनी प्रतिज्ञाओं के अनुसार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं, जबकि कड़ी परीक्षा के समय ईश्वर की योजना के अनुरूप चलना सीखते हैं।
संक्षिप्त संदर्भ-नोट
चाहे आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्दों का संक्षिप्त उद्धरण देखें, इन टिप्पणीकारों ने यह दर्शाया है कि बाहरी दमन के बीच आंतरिक विश्वासी समुदाय की स्थिरता और ईश्वरीय उद्देश्य का अनुसरण सबसे अधिक निर्णायक है।