Old Testament
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यहोशू 9:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर यहोशू ने उनको बुलवाकर कहा, “तुम तो हमारे ही बीच में रहते हो, फिर तुम ने हम से यह कहकर क्यों छल किया है, कि हम तुम से बहुत दूर रहते हैं?
यहोशू 9:22 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 9:22 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 9:6 (HINIRV) »
तब वे गिलगाल की छावनी में यहोशू के पास जाकर उससे और इस्राएली पुरुषों से कहने लगे, “हम दूर देश से आए हैं; इसलिए अब तुम हम से वाचा बाँधो।”

यहोशू 9:16 (HINIRV) »
और उनके साथ वाचा बांधने के तीन दिन के बाद उनको यह समाचार मिला; कि वे हमारे पड़ोस के रहनेवाले लोग हैं, और हमारे ही मध्य में बसे हैं।

उत्पत्ति 3:13 (HINIRV) »
तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, “तूने यह क्या किया है?” स्त्री ने कहा, “सर्प ने मुझे बहका दिया, तब मैंने खाया।” (रोम. 7:11, 2 कुरि. 11:3, 1 तीमु. 2:14)
सीधा अर्थ और संदर्भ
यहोशू 9:22 में יהושע नेाए मिस्री छल से बचने के लिए बनी समझौती के भीतर एक सच्चे हकीकत का आकलन किया: ये लोग पहले ही हमारे बीच में रहते हैं, फिर भी वे यह दावा करते हैं कि वे दूरी में हैं। इसका मतलब यह है कि वे नागरिक-स्वरूप में हमारे साथ एक साथ रहने वाले थे, पर उनकी प्रस्तुति के अनुसार वे दूर थे। यहोशू द्वारा उनका बुलाकर स्पष्ट किया गया कि उनकी चाल में छल था और यह निष्कर्ष तब निकला जब ठगी से शपथ का अनुबंध बन गया।
प्रसंग-प्रस्तावना
गंधा-यात्रा से पूर्व यहूदा के क्षेत्रों के साथ यहोशू ने कई जातियों से समझौते के लिए बातचीत की थी ताकि भूमि पर स्थायी शांति बनी रहे। गिल्गाल की घटना के पीछे की पृष्ठभूमि में यहोशू को यह समझना पड़ा कि कुछ गुप्त चालबाज़ियाँ और छल से शांति के तौर-तरीके अपनाए गए थे। यहाँ गिल्गाल के लोग अपने वायदे के साथ छिटपुट दूरी का दावा करते हैं, पर उनकी गवाही उनके सामने सच नहीं है।
interpretive observations (व्याख्यात्मक निरीक्षण)
छोटा थीमैटिक सूची
अन्य तुलनात्मक बाइबिल पाठ (Cross-references)
1) यहोशू 9:4-6 — कूटनीतिक चालों के भीतर भी ठगी की पुष्टि और परिणामों की गहराई दिखती है; यहाँ लोग भयावह रूप से दूरी बताकर छल से समझौता करना चाहते थे। यह स्पष्ट करता है कि भाषा और व्यवहार में दूरी के दावों का परखा जाना आवश्यक है।
2) यहशु 9:14 — युवा-जातियों के साथ शपथ-समझौते के दौरान सत्यापन की कमी के कारण भ्रम पैदा होता है; सत्य के बिना शपथ स्थिर नहीं रहती।
3) संस 12:1-2 — संधियाँ और संकल्प एक साथ चलते हैं, किन्तु प्रमाणित सत्य के बिना यह स्थिर नहीं रह पातीं; छल से बने समझौते टूट जाते हैं।
एतिहासिक-धार्मिक संकेत (はい)
इस संदर्भ में, पवित्र भूमि के संग्राम के बीच सत्य और विश्वास-योग्यता का महत्व उभरकर आता है। यहोशू का यह कदम इस बात को दर्शाता है कि परमेश्वर के लोग अपने शब्द की पवित्रता से स्थापित रहते हैं और छल के विरुद्ध स्पष्ट निर्णय लेते हैं।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
किसी भी समझौते में सत्य-प्रतिज्ञा और व्यवहार के बीच तालमेल आवश्यक है। छल से बने समझौते टिक नहीं पाते; इसलिए आध्यात्मिक समुदाय में पारदर्शिता और ईमानदार बातचीत मायने रखती है। अगर आप भी किसी दावे या संबंध में छल-झूठ का संदेह महसूस करें, तो दूरी बनाकर सत्य की जाँच करें और परमेश्वर की मार्गदर्शना के अनुसार निर्णय लें।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Mathew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke)
यदि उपलब्ध हो, इन तीनों पवित्र-चरितों से संक्षिप्त उद्धरण शामिल हैं, परंतु पूर्ण टेक्स्ट नहीं दिया गया है।