Old Testament
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यहोशू 9:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब सब प्रधानों ने सारी मण्डली से कहा, “हमने उनसे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की शपथ खाई है, इसलिए अब उनको छू नहीं सकते।
यहोशू 9:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 9:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 9:20 (HINIRV) »
हम उनसे यही करेंगे, कि उस शपथ के अनुसार हम उनको जीवित छोड़ देंगे, नहीं तो हमारी खाई हुई शपथ के कारण हम पर क्रोध पड़ेगा।”

सभोपदेशक 9:2 (HINIRV) »
सब बातें सभी के लिए एक समान होती हैं, धर्मी हो या दुष्ट, भले, शुद्ध या अशुद्ध, यज्ञ करने और न करनेवाले, सभी की दशा एक ही सी होती है। जैसी भले मनुष्य की दशा, वैसी ही पापी की दशा; जैसी शपथ खानेवाले की दशा, वैसी ही उसकी जो शपथ खाने से डरता है।

यहोशू 9:19 का संक्षेप और संदर्भ
यह verse उस क्षण का हिस्सा है जब इज़राइल के पुत्रों ने तेलों के नगर गिलगाल के संधिपत्र (वचन-समझौते) के बाद एक अलग कथा सुनाई: हमारे पास परमेश्वर यहोवा की शपथ है, इसलिए हमने उन्हें छूना नहीं चाहिए। यह स्थिति युद्धवृत्ति और नैतिक दायित्व के बीच उभरती जटिलता को दर्शाती है कि परमेश्वर की शपथ की पाबंदी किस तरह मण्डली के निर्णयों और व्यवहार को निर्देशित करती है।
केंद्रीय अर्थ
यह वाक्य दिखाता है कि इज़राइल के नेताओं और पूरे समुदाय ने यह नियम निर्धारित किया कि शपथ के कारण गिलगाल के सेहेरियों पर क्रूर दमन नहीं किया जाएगा। सत्य यही है कि शपथ का सम्मान एक उच्च नैतिक मानक बन जाता है, पर वास्तविक संघर्ष और पक्षपात के समय यह मार्गदर्शक बन सकता है।
मुख्य विषय
अनुप्रयोग और विद्वान-रोशनी
प्रमुख पुरालेखीय टिप्पणीकारों के प्रकाश में यह दिखता है कि शपथ के पाठों को निभाने का मतलब केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि परमेश्वर के लक्ष्यों और पवित्र पथ की सुरक्षा करना है। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचार इन विचारों को प्रेरणा देते हैं—पर वे सीधे शास्त्र की दृष्टि से इसे एक गहरी नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखते हैं।
संक्षेपित निष्कर्ष: शपथ-प्रतिष्ठा एक ऐसी नैतिक संरचना है जो हिंसा-रहित नियंत्रण, न्यायपूर्ण निर्णय, और समुदाय के विश्वास की रक्षा करती है।
क्रॉस-रेफरन्स (संक्षेप)
1) यहोशू 9:3-15 – शपथ-समझौते की उत्पत्ति और शहरों के अनुभव का विस्तृत प्रसंग।
2) निर्गमन 24:7 – शपथ और पालन के आदर्श की कसौटी।
3) व्यवस्थाविवरण 7:2-4 – जब निश्चय युद्ध के समय अन्य राष्ट्रों से शत्रुता समाप्त करनी हो, शपथ और वैधता पर विचार।
व्यावहारिक विचार
हमारे सामाजिक-आचार के संदर्भ में यह याद दिलाता है कि हमारे शब्द और प्रतिज्ञाएं कितनी ऊँचाई पर हैं। अगर हम किसी दायित्व को निभाने के लिए प्रतिबद्ध हों, तो उसे पूरी ईमानदारी और विवेक के साथ निभाएं—खासकर तब जब यह दूसरों के लिए न्याय और सुरक्षा का प्रश्न बने।
संक्षिप्त समापन
यहोशू 9:19 हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर की शपथ का सम्मान समुदाय के नैतिक बुनियाद का हिस्सा है। यह न केवल कानून के पालन की बात है, बल्कि विश्वास की पवित्रता और समुदाय की एकता बनाए रखने की कसौटी है।
नोट: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से मिले विचारों को सामान्यीकृत रूप में समन्वित किया गया है; अगर exact उद्धरण चाहिए तो वे विशिष्ट पंक्तियों के भीतर पाए जा सकते हैं।