Old Testament
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यहोशू 9:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हम उनसे यही करेंगे, कि उस शपथ के अनुसार हम उनको जीवित छोड़ देंगे, नहीं तो हमारी खाई हुई शपथ के कारण हम पर क्रोध पड़ेगा।”
यहोशू 9:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 9:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नीतिवचन 20:25 (HINIRV) »
जो मनुष्य बिना विचारे किसी वस्तु को पवित्र ठहराए, और जो मन्नत मानकर पूछपाछ करने लगे, वह फंदे में फंसेगा।

मलाकी 3:5 (HINIRV) »
“तब मैं न्याय करने को तुम्हारे निकट आऊँगा; और टोन्हों, और व्यभिचारियों, और झूठी शपथ खानेवालों के विरुद्ध, और जो मजदूर की मजदूरी को दबाते, और विधवा और अनाथों पर अंधेर करते, और परदेशी का न्याय बिगाड़ते, और मेरा भय नहीं मानते, उन सभी के विरुद्ध मैं तुरन्त साक्षी दूँगा, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। (याकू. 5:4)

2 शमूएल 21:1 (HINIRV) »
दाऊद के दिनों में लगातार तीन वर्ष तक अकाल पड़ा; तो दाऊद ने यहोवा से प्रार्थना की। यहोवा ने कहा, “यह शाऊल और उसके खूनी घराने* के कारण हुआ, क्योंकि उसने गिबोनियों को मरवा डाला था।”
यहोशू 9:20 का पाठ-आधारित व्याख्या
सीधे शब्दों में कहें तो यह वचन बताता है कि यहोशू और इस्राएलियों ने गिलगाल के लेआती निवासियों के विरुद्ध शपथ-उल्लंघन के कारण उन्हें जीवित छोड़ने की नीति तय की, ताकि शपथ का आदर बना रहे और परमेश्वर के क्रोध से खुद को बचाया जा सके।
पृष्ठभूमि और स्थिति
यहूशा के युद्धों के समय इजराइल ने कन्नियों के साथ एक शपथ-समझौता किया था — कि वे इन नगरों के निवासियों के साथ दयालु व्यवहार नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देंगे (यह संदर्भ प्रत्यक्ष रूप से अन्य जगहों से ज्ञात शपथ-आदेशों से जुड़ा है)। तब कुछ गिलगाल के निवासियों ने धोखे से प्यादा बनकर, अपने कोयल-आधार पर मित्रवत दिखाकर, उन्हें जीत में भ्रमित कर लिया था। यह शपथ-विरोधी परिस्थिति है जिसमें आयोध्या के नेता यह निर्णय लेते हैं कि वे शपथ के अनुसार न मारें, ताकि परमेश्वर की योजना के भीतर न्याय का तात्पर्य बना रहे।
व्याख्यात्मक बिंदु
अनुवादकों के दृष्टिकोण (संक्षेप)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने इस कथन को इस प्रकार सुलझाया है:
Henry: शपथ-उल्लंघन के पंजी पर विचार करते हुए बताते हैं कि यह निर्णय इस्राएल की नैतिकता और पवित्र शपथ के सम्मान का प्रतीक बन गया है; यह कथन यह दिखाता है कि शत्रु की धोखे से प्राप्त लग्न को भी दया-संवेदनशीलता के साथ संभाला गया।
Barnes: वे इसे शपथ के दायित्व की सुरक्षा के रूप में देखते हैं, ताकि दोषी-समझौते के कारण परमेश्वर के क्रोध से बचा जा सके, और यह भी कि दयालुता से संबंध बनाने की नीतियां कभी-कभी युद्ध-आचरण की मजबूरी बन जाती हैं।
Clarke: शपथ-पालन और न्याय-नियमन के बीच संतुलन पर बल देते हैं; धोखाधड़ी के बावजूद इस निर्णय से यह उजागर होता है कि ईश्वर के उद्देश्य में मानव-योजना का हिस्सा भी होता है।
संकेतित क्रॉस-रेफरेंसेस
1) यहोशू 2:14-15 — सुरक्षा और शपथ-पालन की जटिलताओं का संकेत मिलता है कि कैसे पवित्र शपथ व्यक्तिगत और सामूहिक निर्णयों को प्रभावित करती है।
2) योका 9:15 — अन्य धार्मिक-नेतृत्वों के निर्णयों में शपथ-पालन और दया-आचरण के बीच संतुलन की चर्चा मिलती है।
3) निर्गमन 22:28 — शपथ और कानूनी-धारणाओं के बीच के बन्धन की परमेश्वर-आगाही का संकेत देता है।
संक्षिप्त thematic takeaway
व्यावहारिक अनुप्रयोग
आज के पाठ से सीख यह है कि वचन-प्रतिष्ठा और ईमानदारी जीवन के मूल धर्म-आदर्श हैं। हम कैसे भी परिस्थिति में सत्य और दया के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करें, ताकि परमेश्वर का नाम ऊँचा रहे और हमारे निर्णय उन पर टिके रहें।
पक्का संदर्भ
यदि आप चाहें, तो पढ़ने के लिए नीचे दिए गए संदर्भों पर ध्यान दें: यहोशू 2:14-15; निर्गमन 22:28; योहन्ना 14:21 — इन क्षेत्रों में शपथ-पालन, दया और न्याय के पारस्परिक सम्बन्ध स्पष्ट होते हैं।