Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 9:17 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 9:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब इस्राएली कूच करके तीसरे दिन उनके नगरों को जिनके नाम गिबोन, कपीरा, बेरोत, और किर्यत्यारीम है पहुँच गए,
यहोशू 9:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 9:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।



यहोशू 9:17 पर टिप्पणी — एक नज़ाकतपूर्ण गठबंधन के बाद का पाठ
यह अंश यह दर्शाता है कि इस्राएली कूच करके तीन दिन के भीतर गिबोन, कपीरा, बेरोत और किर्यत्यारीम के नगरों तक पहुँचे। यह पाठ प्रभु की यात्रा-योजना और आक्रमण के क्रम का भाग है, जहां गंधर्व-यात्रा के बाद नगरों की स्थिति और उनके नेताओं के व्यवहार उभरकर आते हैं। यही मौके हैं जहां चकित करने वाले सामाजिक-धार्मिक परिदृश्य की परख होती है—आश्चर्यजनक सहमति, और बन्धुता के साथ निर्णय की गतिशीलता दिखती है।
पद का संदर्भ-परिचय
यहोशू 9 अध्याय में इस्राएली सतर्क रहते हैं और पड़ोसी राष्ट्रों के साथ रिश्ते बनाते या तोड़ते हैं।Verse 17 बताता है कि नगरों तक पहुँचने में तीन दिन लगे और ये नगर गिबोन, कपीरा, बेरोत, किर्यत्यारीम थे। यह दृश्य कि कैसे परिवार-परिवार, शहर-शहर यात्रा पूरी होती है, यह दिखाता है कि इतिहास में कदम कैसे कदम मिलाकर चलते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) निर्भय साहस और प्रकृति-नियतंत्रण: परमेश्वर के लोग मारpayen नहीं, बल्कि नियत काल और मार्ग के अनुसार चलते हैं। हर कदम पर उनका विश्वासी आचरण मार्गदर्शित करता है।
2) संघ और व्यवहार की परीक्षा: नगरों तक पहुँचना एक समन्वयात्मक प्रयास है—उचित निर्णय और व्यवहार से स्थिरता बनी रहती है, भले ही प्रतिद्वंद्विता कैसे भी हो।
अन्य मूल स्रोतों से संधान
यहां के लिए तुलनात्मक विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के साझा निशान उपयोगी हैं—ये अन्यायपूर्ण या बलपूर्वक आक्रमण के बजाय भरोसेमंद योजना, संयम और प्रश्न-उत्तर के रूप में विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। उनके विचारों के अनुसार, चरित्र-निर्माण और देव-नीति के संदर्भ में यह पाठ हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर अपनी योजना के अनुरूप ही घटनाओं को संचालित करते हैं और भरोसा करने वालों के लिए मार्ग बनाते हैं।
संयुक्त पाठ-व्याख्या (एकीकृत निष्कर्ष)
यह verse हमें यह स्पष्ट कर देता है कि इस्राएली अपने प्रवेश के समय किसी भी अति-उत्पात से पहले, अपनी दिशा-निर्देश और परमेश्वर की योजना को ध्यान में रखते हैं। नगरों तक पहुँचते हुए, वे परस्पर सम्बन्धों और नैतिक निर्णयों को प्रभु की इच्छानुसार समायोजित करते हैं। इस प्रकार यह कहानी एक विश्वसनीय आचरण की मिसाल बन जाती है—विश्वास, कर्तव्य, और धैर्य के साथ यात्रा करना।
कथा-संयोजन के लिए 2-3 क्रॉस-रेफरेंसे
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
यहोशू 9:17 हमें दिखाता है कि इतिहास की राह में विरले अवसरों पर भी विश्वास और नीति साथ-साथ चलते हैं। यह संदेश देता है कि परमेश्वर की योजना के अनुरूप ही निर्णय और दिशा तय होती है, और यह कथानक एक जागृत अनुशासन और समुदाय-निर्माण का प्रेरक स्रोत है।
युक्त उद्धरण (जहाँ लागू):
Matthew Henry: एक ठोस टिप्पणी के रूप में वह यह मानते हैं कि प्रबंधन और संधि के बीच संतुलन परमेश्वर के मार्गदर्शन से होता है।
Albert Barnes: वे विषयवस्तु के अनुसार यह कहते हैं कि आक्रमण से पहले सोच-विचार और शांति-उन्मुख दृष्टिकोण आवश्यक है।
Adam Clarke: वे यह बताने का प्रयत्न करते हैं कि नगर-चयन और शपथ के नियमleri इतिहास के भीतर परमेश्वर के उद्देश्य की अभिव्यक्ति हैं।