Old Testament
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यहोशू 9:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और इस्राएलियों ने उनको न मारा, क्योंकि मण्डली के प्रधानों ने उनके संग इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की शपथ खाई थी। तब सारी मण्डली के लोग प्रधानों के विरुद्ध कुड़कुड़ाने लगे।
यहोशू 9:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 9:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 15:4 (HINIRV) »
वह जिसकी दृष्टि में निकम्मा मनुष्य तुच्छ है, पर जो यहोवा के डरवैयों का आदर करता है, जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठाना पड़े;

2 शमूएल 21:7 (HINIRV) »
परन्तु दाऊद ने और शाऊल के पुत्र योनातान ने* आपस में यहोवा की शपथ खाई थी, इस कारण राजा ने योनातान के पुत्र मपीबोशेत को जो शाऊल का पोता था बचा रखा।

सभोपदेशक 5:2 (HINIRV) »
बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के सामने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिए तेरे वचन थोड़े ही हों।
यहोशू 9:18 का संदर्भ और अर्थ
यहोशू 9 के अध्याय में इजरायल के लोग कांखेर और गिल्गाल के नगरों के साथ मिलकर संपूर्ण रीति-रिवाज़ और शपथ के संबंध में विचित्र घटनाओं से जूझते हैं। यहाँ verse 18 में कहा गया है कि इजरायली लोग उन लोगों को मार नहीं पाए, क्योंकि मण्डली के प्रधानों ने उनके संग परमेश्वर यहोवा की शपथ ली थी। यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि क्यों शपथ और कानून के रखने की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से रही, भले ही परिस्थितियाँ असहज क्यों न हों।
केंद्रीय अभिप्राय
इस verse का केंद्र यह है कि परमेश्वर के लोग, शपथ के प्रति निष्ठा और प्रशासनिक निर्णयों के समीकरण में, कुछ स्थिति-गत दबावों के बावजूद नियमों के अनुसार आगे बढ़ते हैं। प्रधानों द्वारा यह शपथ निभाने की प्रतिज्ञा, समुदाय की नैतिक पहचान और परमेश्वर के वचन के प्रति सम्मान का संकेत है। परिणामस्वरूप, यह निर्णय तत्काल हिंसा से बचाव करता है, परन्तु आंतरिक विवशता और बाद के दुष्परिणाम भी सामने आते हैं; शपथ के पालन और न्याय के संतुलन की मुश्किलपूर्ण व्यावहारिकता दिखती है।
दो–तीन प्रमुख विषय
अन्य दृष्टांत और क्रॉस-वाइंडिंग संदर्भ
यह घटना निम्नानुसार अन्य हिस्सों से सम्बद्ध हो सकती है:
संदर्भ के इन अंशों से यह स्पष्ट होता है कि शपथ का पालन समुदाय के नैतिक ढाँचे को स्थिर बनाता है, परन्तु यह भी दिखाता है कि नियमों के भीतर निर्णय लेते समय दयालुता और विवेक की आवश्यकता रहती है।
व्यावहारिक चिंतन
आज के पाठक के लिए यह verse एक सीख देता है कि बाइबल के आदेशों के अनुसार जीवन जीना आवश्यक है—परन्तु हर स्थिति में निर्णय लेने से पहले चर्चित नैतिक सिद्धांतों और समुदाय की एकता को संतुलित किया जाना चाहिए। शपथ के प्रति निष्ठा परमेश्वर के प्रति विश्वास को मजबूत करती है, परन्तु गलत सोच या दबाव में शपथ के अर्थ को भारी न बनाएं। कठिन समय में भी ईमानदारी और करुणा के साथ निर्णय लेना चाहिए।
संक्षिप्ता सार
यहोशू 9:18 में मण्डली ने शपथ के कारण नगरों के विरुद्ध सीधे सैन्य उपाय नहीं उठाए, ताकि परमेश्वर की आज्ञा और प्रशासनिक निर्णय समान रूप से पालन हो। यह घटना शपथ की महत्ता, समाज की एकता और निर्णय-प्रक्रिया में विवेक की आवश्यकता को एक साथ उजागर करती है।
संक्षिप्त उद्धरण (हेनरी, बार्न्स, क्लार्क से)
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