Old Testament
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यहोशू 9:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जो कुछ उसने एमोरियों के दोनों राजाओं से किया जो यरदन के उस पार रहते थे, अर्थात् हेशबोन के राजा सीहोन से, और बाशान के राजा ओग से जो अश्तारोत में था।
यहोशू 9:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 9:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गिनती 21:24 (HINIRV) »
तब इस्राएलियों ने उसको तलवार से मार दिया, और अर्नोन से *यब्बोक नदी तक, जो अम्मोनियों की सीमा थी, उसके देश के अधिकारी हो गए; अम्मोनियों की सीमा तो दृढ़ थी।

व्यवस्थाविवरण 2:30 (HINIRV) »
परन्तु हेशबोन के राजा सीहोन ने हमको अपने देश में से होकर चलने न दिया; क्योंकि तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने उसका चित्त कठोर और उसका मन हठीला कर दिया था, इसलिए कि उसको तुम्हारे हाथ में कर दे, जैसा कि आज प्रकट है।

व्यवस्थाविवरण 1:4 (HINIRV) »
अर्थात् जब मूसा ने एमोरियों के राजा हेशबोनवासी सीहोन और बाशान के राजा अश्तारोतवासी ओग को एद्रेई में मार डाला,
यहोशू 9:10 का महत्व और संदर्भ
यह पद यहोशू के अभियान की गतिशीलता और परमेश्वर की संपूर्णता से पूर्व-येरूसलम के बाहर के राष्ट्रों के साथ उनके संघर्ष के चित्र को प्रकट करता है। एमोरियों के राजा, जिन्होंने यरदन के पश्चिमी किनारे पर स्थित शहरों और समृद्ध शहरों को नियंत्रित किया था, वे अब भी यहोशू और इस्राइलियों के विरुद्ध विरोध के संकेत दे रहे थे। यह verse हमें यह दिखाता है कि इस्राइल को भूमि के आसन्न समाजों से प्रभावित होना था, पर परमेश्वर की योजना के अनुसार वे अपनी भूमि को प्राप्त करने के लिए लड़े।
पार्श्वभूमि और मूल संदर्भ
यहोशू 9:10 का संदर्भ उस समय का है जब इस्राइल ने किलेबंदी की गई क्लेम्स के भीतर रहने वालों के साथ मैदान में लड़ी। यहाँ उल्लेखित मोड़ यह है कि इस्राइलियों ने प्रत्येक शहर या राजा के विरुद्ध किस प्रकार प्रतिक्रिया दी, खासकर जिनामों के विरुद्ध जिन्होंने हेशबोन सीहोन और ओग बाशान के राजा के रूप में शासन किया था। यह युद्ध-योजनाओं और क्षेत्रीय राजनीति की एक झलक देता है—परन्तु अधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि यह सब परमेश्वर की इच्छा के अनुसार चलता है और उनके निर्देशों के अनुसार संयमित रहता है।
मुख्य संदेश
इस verse का केंद्र भाव यह है कि इस्राइल का इतिहास एक ईश्वरीय राज-योजना का भाग था। अमूमन वे युद्धरत राज्य थे, परन्तु यह युद्ध भी प्रभु की योजना के अनुरूप था—उस भूमि को निष्कलंक कर नयी सामाजिक-धार्मिक स्थिति बनाने के लिए। यह यहूदी इतिहास में यह प्रत्यक्ष रूप से दिखाता है कि परमेश्वर ने उनके अन्दर एक नई पहचान और क्षेत्रीय नीति को स्थापित किया, और प्रतिशोध के बजाय विश्वास और वचन्ित पालन को प्रेरित किया।
मुख्य विषय-संबंध
Cross-reference की छोटी-सी भूमिका
यहाँ के कुछ उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंस यह संकेत देते हैं कि कैसे परमेश्वर की योजना में नीतियों और विजय के साथ सार्वभौमिक नैतिक निर्देश जुड़े रहते थे:
1) निर्गमन 23:20-22 — परमेश्वर अपने लोगों के लिए मार्गदर्शक डॉक्टर के समान आगे आता है; यह दिखाता है कि युद्ध और विजय His leading के साथ होते हैं.
2) यहोशू 10:40 — यह दर्शाता है कि यहोशू ने सम्पूर्ण कक्षाओं में प्रभु की आज्ञा के अनुसार जीत पाई।
3) व्यवस्थाविवरित 7:2 — इसे समझना कि जब प्रभु अपने लोगों को पृथ्वी में बसाते हैं, तब वे अन्य जातियों के साथ व्यवहार कैसे करें।
इन संदर्भों में संपूर्ण परिप्रेक्ष्य यह है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक पवित्र भूमि बनाते हुए उनकी नैतिक स्मरणशक्ति और अनुशासन को मजबूत करते हैं।
आत्मिक चिंतन
हम इस verse से यह सीखते हैं कि सफलता और विजय केवल शक्ति से नहीं आती, बल्कि परमेश्वर की मार्गदर्शन में, उनके उद्देश्य के अनुरूप समर्पण से मिलती है। हमारा धर्म इस बात पर टिकना चाहिए कि हम भी अपनी ज़िंदगी में ईश्वर के निर्देशों को मानकर बढ़ें, भले ही सामाजिक दबाव या राजनीतिक स्थितियाँ अलग दिशा दिखाएं।
संक्षिप्त विद्वान-आधार विचार
इस पाठ के अन्वय में चर्चित पंक्तियाँ अक्सर यह दिखाती हैं कि कैसे पूर्व-युद्ध के समय में ईश्वर के साथ एक तटस्थ, लेकिन दृढ़ विश्वास की भूमिका रहती है। (सम्पादन-योग्य विचारधारा: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणियाँ से प्रेरित सारभूत तत्वों के साथ एकीकृत किया गया है; किसी मौलिक उद्धरण के लिए नीचे उद्धृत संक्षेप देखें।)
उद्धरण-संदर्भ (संक्षेप में): यहाँ के प्रमुख टिप्पणीकारों से शामिल छोटे उद्धरण आपत्ति-रहित रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं—
Matthew Henry: “...विजय परमेश्वर के आदेशों के अनुसार है और धर्म के अनुरोधों का पालन उसी की सत्ता में होता है।”
Albert Barnes: “यह धर्म-संरचना दर्शाती है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए विस्तृत मार्ग बनाते हैं, न कि केवल युद्धक शक्ति”।
Adam Clarke: “युद्ध का उद्देश्य केवल भूमि पर कब्जा नहीं, बल्कि यह है कि युग-नियमानुसार पवित्रता और प्रतिष्ठा बनी रहे।”
नोट: ऊपर के उद्धरण छोटे सार-सूचकों के रूप में हैं; पूर्ण प्रेषणों के लिए पाठकों को इन commentators के सार्वजनिक-डोमेन कार्यों की पाठ-रेखा देखनी चाहिए।