Old Testament
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यहोशू 9:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब उन पुरुषों ने यहोवा से बिना सलाह लिये* उनके भोजन में से कुछ ग्रहण किया।
यहोशू 9:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 9:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गिनती 27:21 (HINIRV) »
और वह एलीआजर याजक के सामने खड़ा हुआ करे, और एलीआजर उसके लिये यहोवा से ऊरीम की आज्ञा पूछा करे; और वह इस्राएलियों की सारी मण्डली समेत उसके कहने से जाया करे, और उसी के कहने से लौट भी आया करे।”

1 इतिहास 10:13 (HINIRV) »
इस तरह शाऊल उस विश्वासघात के कारण मर गया, जो उसने यहोवा से किया था; क्योंकि उसने यहोवा का वचन टाल दिया था, फिर उसने भूतसिद्धि करनेवाली से पूछकर सम्मति ली थी।

यहोशू 9:14 पर केंद्रित टिप्पणी
मुख्य बिंदु: यहोशू के नेतृत्व में इज़राइलियों ने गिल्गाल के कपूर्व अरबियों के साथ एक सतर्क दुविधा अनुभव किया—उन्होंने अपनी समझदारी से काम लिया, पर भोजन को लेकर परमेश्वर की व्यवस्था के विरुद्ध आचरण किया। इस Verse में यह दर्शाता है कि उद्धार के प्रसंग में सत्यापन और परमादेश के साथ व्यवहार कितना महत्त्वपूर्ण है; आचरण में दूसरों की कृपा-धारणा या धुंधली कुटिलता को तौलते समय भी ईमानदारी बनाये रखने की आवश्यकता है। यहूदी-यूथिन संदर्श में, यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के निर्देशों के बिना ग्रहण किया गया भोजन एक बड़ा खतरा बन सकता है, भले ही इसके पीछे अच्छी मंशा क्यों न हो।
साहित्यिक पृष्ठभूमि
यहोशू 9 यहूदा-यात्रा के समय के उज्जवल पहलुओं में से एक है, जहाँ यरदन के पूर्वी किनारे के निवासियों द्वारा छलपूर्वक आत्म-प्रस्तुति होती है। गिल्गाल के निवासियों ने यहूदियों से सन्धि-संशोधित योजना के तहत परामर्श नहीं किया और न ही परमेश्वर के निर्देशों का पालन किया। अध्याय का मुख्य विषय है- असत्य-चाल और शील-स्वीकृति के बीच आस्तिन-झुकने के दुष्परिणाम।
आध्यात्मिक महत्व
यह verse यह स्पष्ट करता है कि आचरण के छोटे-छोटे चयन भी सामुदायिक संरक्षण और धर्मशीलता पर प्रभाव डालते हैं। परमेश्वर की योजना में विश्वास और आज्ञाओं की पाबंदी आवश्यक है, ताकि शत्रु के साथ भी सच्चा और देव-निर्भर संबंध बना रहे। यहूदा समुदाय के लिए यह सन्देश स्पष्ट करता है कि धार्मिक-यथार्थता और सत्यता बनाए रखना संसारिक छल के बीच भी आवश्यक है।
पवित्र ग्रंथों के साथ सम्बन्ध
- अनुशासन की आवश्यकता: इस घटना की तुलना अन्य स्थानों पर भी मिलती है जहाँ लोग परमेश्वर की आज्ञाओं को तिरस्कार कर लेते हैं और परिणामस्वरूप संकट उठाते हैं। - नैतिक विवेक: पवित्र शास्त्र में अक्सर यह कहा गया है कि जो लोग डर और धूर्तता से बचते हैं, वे नीति का पालन करते हैं; परन्तु बिना परमादेश के निर्णय संकट को बढ़ाते हैं।
अनुवादित विचार और पंक्तियाँ (Cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि तथ्यात्मक सजगता और आध्यात्मिक मानदंडों का मिलान कैसे फल देता है—आख्यायिक आचरण में विश्वास के साथ विचार-विमर्श और ईश्वर की इच्छा की महत्ता।
Reflection questions (विचार-विमर्श के लिए प्रश्न)
निष्कर्ष
यहोशू 9:14 हमें सिखाता है कि परमेश्वर के निर्देशों के बिना भीखमय या छल-व्यवहार से उबरना कठिन है। ईश्वर के प्रति निष्ठा और सत्य-आचरण बनाए रखना ही समुदाय की सुरक्षा और आशीष का मार्ग है। हमारे दैनिक निर्णय, चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों, परमेश्वर के उद्देश्य से मेल खाते हों तभी उनका प्रभाव आध्यात्मिक उन्नति के साथ जुड़ सकता है।
नोट: इस प्रविष्टि में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण विशेष रूप से संक्षेपित संदर्भों के रूप में सम्मिलित हैं केवल जहाँ उपयुक्त था।