यहोशू 10:29 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब यहोशू सब इस्राएलियों समेत मक्केदा से चलकर लिब्ना को गया, और लिब्ना से लड़ा;

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यहोशू 10:29 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहोशू 10:29 का विवरण और मायने

अभिज्ञेय पंक्ति के ठीक बाद यहोशू के नेतृत्व में इज़राइल के सैनिक मक्केदा से आगे बढ़ कर लिब्ना पर आक्रमण करते हैं। यह दृश्य एक संगठित युद्ध-यात्रा का हिस्सा है, जहाँ परमेश्वर के आदेश से यहोशू ने पड़ोसी राष्ट्रों के विरुद्ध कदम उठाए। इस संदर्भ में लिब्ना शहर का विजय, इज़राइल के प्रति परमेश्वर के साथ अदम्य विश्वास और उसका संकल्प प्रकट करता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के साथ रहते हैं और उनके सामने जो भी बाधाएं हों, उन्हें तोड़ देते हैं।

बाइबल का पाठ और विश्वास की सीख

यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर अपनी प्रजा के लिए साहस और सुरक्षा प्रदान करते हैं, भले ही प्रत्यक्ष संघर्ष की स्थिति हो। लिब्ना के विरुद्ध लड़ाई में यहोशू ने भरोसे के साथ आगे बढ़कर, प्रभु के निर्देशों के अनुसार चालित किया; इससे यह स्पष्ट होता है कि सफलता मानव-कौशल से नहीं, बल्कि परमेश्वर की शक्ति और सहयोग से मिलती है।

महत्वपूर्ण शब्द और चित्र

  • यहोशू— नेतृत्व और परमेश्वर की प्रतिनिधि शक्ति; उनका विश्वास परमेश्वर के निर्देशों में निर्भर रहता है।
  • मक्केदा— एक पड़ोसी सर्ती शहर जो युद्ध-यात्रा के क्रम में आने वाले संघर्षों का संकेत है।
  • लिब्ना— स्थान जहाँ यहोशू और इज़राइलियों ने आक्रमण किया; इसका उद्देश्य शक्तिशाली प्रतिरोधी से देश की सुरक्षा प्राप्त करना है।

संदर्भ-सम्बन्ध

1) यहोशू 10:28-30 — इन पड़ोसियों के विरुद्ध अन्य विजय-प्रकरणों के साथ एक समन्वित युद्ध-यात्रा का भाग।

2) मिथ्य-देवताओं के मुकाबले परमेश्वर की शक्ति—यहोशू के नेतृत्व में यहूदियों का साहस उसी प्रभु के प्रति विश्वास पर टिका है।

3) प्रतिज्ञा-भरोसा—यहोशू के समस्त अभियानों का आधार है कि प्रभु उनके साथ हैं और उनकी भूमि सुरक्षित है नहीं तो उसका भाग्य भी बदल जाएगा।

आधार उद्धृत विचार(from पुराने सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकार)

Matthew Henry के अनुसार, यहोशू की विजयों में परमेश्वर के साथ एक निष्ठा-युक्त संयुक्तता दिखती है; यहूदी राजा-यात्रा में प्रत्येक कदम परमेश्वर की सहायता से होता है। Albert Barnes इसे बतौर ऐतिहासिक-धार्मिक संकेत मानते हैं कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए लम्बे समय तक सुरक्षा बनाये रखते हैं, जब वे उसकी आज्ञाओं का पालन करें। Adam Clarke भी बल देते हैं कि विश्वास का कार्य यहोशू की चिन्हित-युद्ध-योजनाओं में स्पष्ट रूप से परिलक्षित है।

छोटा उद्धरण (जब उपलब्ध हो)

यहाँ प्रत्यक्ष पूर्ण वाक्यों को उद्धृत करने के बजाय छोटे सार-उद्धरणों का उल्लेख किया गया है; यदि आप चाहें तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के विशिष्ट वाक्यों के संक्षिप्त अंश दिए जा सकते हैं।

आज के लिए अनुप्रयोग

1) विश्वास पर आधारित निर्णय—जीवन के संघर्ष में प्रभु के निर्देशों पर चलना, भय से ऊपर उठना और आत्म-विश्वास बनाए रखना।

2) साझा नेतृत्व—योध्वा-यात्रा में समुदाय का एकजुट होना और एक दूसरे के साथ प्रत्यक्ष मार्गदर्शन-निर्देशन का पालन करना।

3) परमेश्वर की सहायता को माँगना—सफलता हमारी नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा और शक्ति पर निर्भर है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहोशू 10:29 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब उन्होंने हारून याजक के वंश को चराइयों समेत खूनी के शरण नगर हेब्रोन, और अपनी-अपनी चराइयों समेत लिब्ना,

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जब सिदकिय्याह राज्य करने लगा, तब वह इक्कीस वर्ष का था; और यरूशलेम में ग्यारह वर्ष तक राज्य करता रहा। उसकी माता का नाम हमूतल था जो लिब्नावासी यिर्मयाह की बेटी थी।

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