Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 10:1 यहोशू 10:2 यहोशू 10:3 यहोशू 10:4 यहोशू 10:5 यहोशू 10:6 यहोशू 10:7 यहोशू 10:8 यहोशू 10:9 यहोशू 10:10 यहोशू 10:11 यहोशू 10:12 यहोशू 10:13 यहोशू 10:14 यहोशू 10:15 यहोशू 10:16 यहोशू 10:17 यहोशू 10:18 यहोशू 10:19 यहोशू 10:20 यहोशू 10:21 यहोशू 10:22 यहोशू 10:23 यहोशू 10:24 यहोशू 10:25 यहोशू 10:26 यहोशू 10:27 यहोशू 10:28 यहोशू 10:29 यहोशू 10:30 यहोशू 10:31 यहोशू 10:32 यहोशू 10:33 यहोशू 10:34 यहोशू 10:35 यहोशू 10:36 यहोशू 10:37 यहोशू 10:38 यहोशू 10:39 यहोशू 10:40 यहोशू 10:41 यहोशू 10:42 यहोशू 10:43



यहोशू 10:31 पर टिप्पणी—आक्रमण और विजय का आचरण
मुख्य विचार: यहोशू 10:31 में यहोशू और इस्राएलियों की दृढ़ता दिखती है — रुकावटों के बीच निष्ठा से आक्रमण, संघर्ष और निष्पादन के साथ लोभी शक्तियों पर विजय पाने का कदम। युद्ध की यह कथा प्रकट करती है कि धार्मिक प्रसंगों में भी राजनीतिक-क्षेत्रों में नेतृत्व-कर्तव्य और एकजुटता कितनी महत्वपूर्ण है।
पाठ-संदर्भ के संदर्भ में: साहित्यिक क्रम
यहोशू 10 में यहोशू ने यरदन के पार युद्ध-यात्रा को जारी रखते हुए दक्षिणी और पश्चिमी कश्मीर के शहरों पर विजय पाई। 31वाँ पद यह उसे लाकीश (लाकिश) के विरुद्ध छावनी डालकर लड़ने की कार्रवाई दिखाता है, जो एक विशिष्ट नगर-नियामक क्रियाकलाप है। इसे पाठकों के लिए एक रणनीतिक कदम मानना है—अभिघात और नगर-नियन्त्रण के बीच सैनिक-निर्णय की महत्त्वपूर्णता उजागर होती है।
धार्मिक-थियोलॉजिकल significance
यहोशू के नेतृत्व में इज़राइल के युद्ध में परमेश्वर की सहायता का विश्वास प्रमुख रहा है। लाकीश के विरुद्ध मैदान पर डटे रहना, यह दर्शाता है कि परमेश्वर की अनुमति और बल से ही विजय संभव है, भले ही शत्रु बड़ी, मजबूत और गढ़े हुए क्यों न हों। युद्ध की सफलता से यह स्पष्ट होता है कि पवित्र उद्देश्यों के लिए किया गया संघर्ष भी आस्था, अनुशासन और संकल्प का परिणाम है।
पवित्रशास्त्र के अन्य भागों से संबंध
क्रॉस-रेफरंस के साथ प्रभाव यह है कि पानीदार विरोधों के बीच भी निष्ठा और प्रभु-आशीर्वाद के संदर्भ में कार्रवाई को मूल्य मिलता है—यही प्रवृत्ति इस हिस्से को निर्णायक बनाती है।
सोचने के प्रश्न
संक्षेप निष्कर्ष
यहोशू 10:31 यह स्पष्ट करता है कि आक्रमण-यात्रा में साहस, एकता और परमेश्वर के साथ स्पष्ट हाथ में हाथ होने पर कठिन लक्ष्य भी संभव होते हैं। यह न कहा जाए कि युद्ध ही सब कुछ है, बल्कि यह दिखाता है कि परमेश्वर की योजना के अनुसार कदम उठाने पर राजनीतिक-क्षेत्रों में भी विजय मिलती है।
पूर्व-प्रेरणा उद्धरण (इतिहासिक टिप्पणीकारों से स्वीकृत सृजन)
सारगर्भित टिप्पणीकारों के विचारों में, मॅथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क से जो प्रमुख बिंदु संगृहीत होते हैं, वे इस प्रकार मिलते हैं: युद्ध में नेतृत्व का भरपूर विश्वास, आस्था के साथ कार्रवाई, और परमेश्वर की सहायता की आशा—ये तीनों तत्व एक साथ चलते हैं ताकि विजय संभव हो सके (उद्धृत शब्दांश के रूप में नीचे दिये गए संक्षेप मगर पूर्ण टेक्स्ट नहीं)।
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