Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 10:1 यहोशू 10:2 यहोशू 10:3 यहोशू 10:4 यहोशू 10:5 यहोशू 10:6 यहोशू 10:7 यहोशू 10:8 यहोशू 10:9 यहोशू 10:10 यहोशू 10:11 यहोशू 10:12 यहोशू 10:13 यहोशू 10:14 यहोशू 10:15 यहोशू 10:16 यहोशू 10:17 यहोशू 10:18 यहोशू 10:19 यहोशू 10:20 यहोशू 10:21 यहोशू 10:22 यहोशू 10:23 यहोशू 10:24 यहोशू 10:25 यहोशू 10:26 यहोशू 10:27 यहोशू 10:28 यहोशू 10:29 यहोशू 10:30 यहोशू 10:31 यहोशू 10:32 यहोशू 10:33 यहोशू 10:34 यहोशू 10:35 यहोशू 10:36 यहोशू 10:37 यहोशू 10:38 यहोशू 10:39 यहोशू 10:40 यहोशू 10:41 यहोशू 10:42 यहोशू 10:43
यहोशू 10:32 पर टिप्पणी — यहोवा की विजय और पूर्णता की योजना
यहोशू 10:32 में लेखा गया है कि यरदन के पार के जिलों को विजित करते समय ईश्वरीय हाथों से एक और नगर, लाकीश, इस्राएली शस्त्रों के सामने हार गया। यह पाठ घटनाओं की क्रमबद्धता में एक विशिष्ट चरण की पुष्टि करता है: परमेश्वर की सहायता से अन्य नगरों के समान ही लाकीश की भी तबाही। कहानी की पुनरावृत्ति हमें यह दिखाती है कि चाटुर्क नियतियों के विरुद्ध ईश्वर के लोग कितनी निष्ठा और मजबूती से आगे बढ़ते हैं।
पठ के भीतर पर पाठ का स्थान
यहोशू 10 अध्याय में यमनी के बड़े सेनापति और सात नगरों के विरुद्ध के प्रयासों का वर्णन है। लाकीश पर विजय का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यहोशू का नेतृत्व, और यहोवा की सहायता, क्रमशः निर्णायक बनती जा रही है। जैसा कि पहले भी अन्य नगरों के संदर्भ में हुआ, यहाँ भी राजा और नगर के निवासियों के विरुद्ध यहोवा का निर्देश स्पष्ट रूप से क्रियान्वित होता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस वचन में तीन मुख्य धारणाएँ उभरती हैं: - परमेश्वर की सहायता से योजना की सफलता: युद्ध में विजय का कारण सिर्फ सैनिक कौशल नहीं, परमेश्वर की प्रेरणा और आशीष है। - सुसंगत निर्धारितता: यहोशू के नेतृत्व में क्रमशः अन्य नगरों की तरह लाकीश पर भी तलवार उठी और परिशुद्ध निष्कर्ष निकला—न्याय और दीनवत क्रिया की मिसाल। - एक ईश्वर-केन्द्रित इतिहास: हर नगर की विजय के पीछे एक सुविचारित पथ और ईश्वर की योजनाओं का प्रतिफल है।
अन्य बाइबल פסוקים के साथ तुलना
- जेनुइन विजय का क्रम: यहोशू 6 (यरुशलाम) और 8 (ाघाटी) में इस्राएली विजय के स्वरूप दिखते हैं; प्रत्येक बार यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप युद्ध की रणनीति बनती है।
- यहोशू 11:6-8 के साथ: पुराने नगरों की निर्णायक बर्बादी और यहोवा की सहायता का दृश्य दोहराया गया है, जो यह दर्शाता है कि प्रभु के नेतृत्व में शत्रुओं से निर्भय लड़ाई संभव है।
- आदम–क्लार्क टिप्पणी: “यहोवा के साथ रहने पर ही सत्यनिष्ठ क्रिया की दिशा सुरक्षित होती है; परमेश्वर की कृपा से विजयी होना ही धर्मी जीवन का परिणाम है।”
क्रियात्मक अनुप्रयोग
धार्मिक-संदर्भ और उद्धरण
यह पाठ यह संकेत देता है कि परमेश्वर की सहायता के बिना कोई भी युद्ध नहीं जीता जा सकता। मैथाॅय हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेखित टिप्पणियों से सामान्य स्वर मिलता है कि यह विजय स्मरण कराती है कि பிரத्वर्ती शक्तियों के विरुद्ध परमेश्वर की सहायता अपरिहार्य है। नीचे छोटे उद्धरण सीमित रूप में दिए जाते हैं जब वे उपलब्ध हों:
“परमेश्वर की सहायता के अभाव में कोई प्रयास सफल नहीं होता।” (पब्लिक-डोमेन टिप्पणी से सन्निकट विचार)
संक्षेप पर सार
यहोशू 10:32 में लाकीश की विजय से यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर की योजना में विश्वास और उसकी कृपा-निर्देशण ही निर्णायक शक्ति बनती है। यहूदी-युवा योद्धाओं के बीच यह संदेश मजबूत करता है कि प्रभु की सहायता और सही नेतृत्व से बड़े से बड़े शत्रु भी ढह जाते हैं।
संदर्भ-चिह्न: यहोशू 10:32; 10:40; 11:6-8