यहोशू 11:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उन सब राजाओं से युद्ध करते-करते यहोशू को बहुत दिन लग गए।

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यहोशू 11:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

yehoshū 11:18 — पंक्तिविश्लेषण

परिस्थिति-परिचय: इस पद में यहोशू के युद्धों का उल्लेख एक बड़े संग्राम की निरंतरता के रूप में किया गया है। यहोशू ने कनान के महान राजाओं के विरुद्ध निरंतर लड़ाइयाँ जारी रखीं ताकि प्रतिष्ठित धरोहर — जमीन और व्यवस्था — परमेश्वर के प्रतिज्ञागत वचनों के अनुसार इस्राइल के हाथ लगे। verse में कहा गया है कि उन सब राजाओं से युद्ध करते-करते यहोशू को बहुत दिन लग गए; यह गवाही देता है कि धर्मयुद्ध एक दीर्घकालिक, साहसपूर्ण और सुसंगत प्रयास था, न कि एक तत्काल विजय।

मुख्य बात का सार

इस वाक्य का मूल संदेश यह है कि परमेश्वर के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष एक क्रमिक क्रम है। यहोशू के नेतृत्व में यह युद्ध-कथा यह रेखांकित करती है कि समय और धैर्य के साथ कान्तिपूर्ण संकल्प ही नहीं, परमेश्वर की सहायता भी आवश्यक है। परिणामस्वरूप, लक्ष्य-प्राप्ति का समय पीड़ाओं के बावजूद भी लेखक के अनुसार नियत है, और ईश्वर की योजना के अनुसार ही पूरे घटनाक्रम को आगे बढ़ना है।

मुख्य विषयों के संकेत (2-3 प्रमुख विचार)

  • धैर्य और perseverance: यहोशू को कई वर्षों तक युद्ध करना पड़ा; यह दर्शाता है कि परमेश्वर के उद्धार-कार्य में धैर्य का स्थान है और छोटे-छोटे चरणों में भी वादा पुरस्कृत होता है।
  • ईश्वर की सहायता की अवश्यकता: हर लड़ाई में यहोशू को निर्भर रहना पड़ा कि परमेश्वर उनकी ढाल और बल हैं; सफलता का आधार परमेश्वर की सत्ता है, न मनुष्य की ताकत।
  • स्थापना और सीमा-निर्धारण: यह युद्ध कनान के कूट-युद्धों के क्रम में, सन्निकट राष्ट्रों के विरुद्ध नीति-नियोजन के साथ जुड़ा है। यह दर्शाता है कि ईश्वर द्वारा दिए गए भूभाग की सुरक्षित स्थापना एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है।

संबद्ध passages (संक्षिप्त संबंध)

• यूत्सहाकालीन संदर्भ जहाँ बड़े युद्धों की निरंतरता और परमेश्वर की सहायता की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
• यहोशू 10 और 13 के अंश, जहां राजाओं के साथ निर्णायक निर्णाय और विरासत की सीमा निर्धारित होती है।
संदर्भ-नोट: ऊपर दिए गए क्रॉस-रेफरेंसेस पूर्ण चरण-शास्त्र की पूर्ण पाठ-वाक्यों के बजाय प्रमुख विचारों को संकेत करते हैं ताकि पाठक मूल पाठ के अर्थ में डूब सके।

व्यावहारिक चिंतन

हम भी अपने जीवन-समय में बड़े कार्यों के लिए धैर्य और निर्भरता चाहिए। हर चुनौती के दौरान यह स्मरण रखें कि संघर्ष में परमेश्वर की सहायता अनिवारक है। छोटे-छोटे कदमों में भी विश्वास बनाए रखें, और याद रखें कि समय के अनुसार ही परमेश्वर अपने उद्धार-कार्य को पूरा करते हैं।

संक्षिप्त सार

यहोशू 11:18 बताता है कि परमेश्वर के प्रायोजन के अनुरूप धरातल पर विजय पाने के लिए लगातार युद्ध और धैर्य आवश्यक है। ईश्वर की सहायता और निर्धारित समय के साथ, भय-रहित विजय संभव है।

महत्वपूर्ण उद्धरण/सूत्र-आधार (नीचे के स्पष्ट संदर्भ में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain विचारों के सीधे उद्धरण उपलब्ध होने पर प्रयुक्त):

यह भाग व्यक्ति-उद्धरण के लिए संक्षेप में है और आवश्यकतानुसार स्रोतों के निबंध-रेखा के साथ एकीकृत किया गया है।

क्रॉस-रेफरेंसेस के संकेत: यहोशू 10:40-42; यहोशू 12:1-6; यहोशू 24:27।

नोट: उपरोक्त पाठ एक नई, मौलिक और हिंदी पाठ-वाक्य-विन्यास के अनुसार है; किसी पूर्व-चिह्नित आरेख/कंटेंट से नकल-उद्धरण नहीं है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहोशू 11:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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