Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 11:8 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 11:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यहोवा ने उनको इस्राएलियों के हाथ में कर दिया, इसलिए उन्होंने उन्हें मार लिया, और बड़े नगर सीदोन और मिस्रपोतमैम तक, और पूर्व की ओर मिस्पे के मैदान तक उनका पीछा किया; और उनको मारा, और उनमें से किसी को जीवित न छोड़ा।
यहोशू 11:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 11:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 13:6 (HINIRV) »
फिर लबानोन से लेकर मिस्रपोतमैम तक सीदोनियों के पहाड़ी देश के निवासी। इनको मैं इस्राएलियों के सामने से निकाल दूँगा; इतना हो कि तू मेरी आज्ञा के अनुसार चिट्ठी डाल डालकर उनका देश इस्राएल को बाँट दे।


यहोशू 11:8 का महत्व और संदर्भ
यह वचन यह बताता है कि परमेश्वर ने इजराइलियों को कशीदगी से सीमाओं पर विजय दिलवाई। यहोवा ने विरोधियों को उनके हाथों में दे दिया, ताकि यह स्पष्ट हो कि उनके युद्ध की सफलता परमेश्वर की प्रेरणा और शक्ति पर निर्भर है। यह पाठ सार्वजनिक स्मारक-सा है कि परमेश्वर के वायदे और शक्ति मिलकर ही शत्रुओं को परास्त करते हैं, और यहोशू के नेतृत्व में यह विजय उनकी विश्वासयोग्यता का परिणाम है।
पिछला संदर्भ और स्थिति
यहोशू 11 अध्याय में उत्तर-यूनानी क्षेत्र के बड़े-से-बड़े शक्तिशालियों के विरुद्ध इजराइलियों की एक साथ हुई विजय का वर्णन है। पांच-छः युद्धों की श्रृंखला में यह बतलाता है कि कैसे मिस्रपोतामेम और सीदोन जैसे नगर-राज्यों के सैनिक दिल्ली-राज्य के खिलाफ हार मानते गए। यह पाठ स्पष्ट करता है कि शत्रु कितने ही मजबूत क्यों न हों, परमेश्वर के निर्णय और इजराइल की दृढ़ निष्ठा उनके लिए निर्णायक होती है।
मुख्य संदेश
1) परमेश्वर की सामर्थ्य से विजय: चारों ओर से जुटे राज्यों के विरुद्ध इजराइल की सफलता केवल याकोब के परमेश्वर के साथ रहने के कारण है। 2) निर्णायक शत्रु-विस्मय: नगरों और नगर-राज्यों का उल्लेख यह दिखाता है कि वे बहुविध दुष्ट शक्तियों के प्रतीक थे, परन्तु उनका भाग्य पूर्व निर्धारित था। 3) जीवन-निर्दोष शत्रुओं का निष्कासन: सभी को मारे जाने की बात से प्रेरित होकर यहूदी इतिहास में स्वच्छ-चाल और निष्कपट शासन की परंपरा को दर्शाया गया है।
विश्वास और परमेश्वर के भरोसे के अनुसार अध्यात्मिक मूल्य
- विषम परिस्थितियों में भी परमेश्वर की योजना पर निर्भरता: यह verse इशारा करता है कि भयभीत न रहते हुए, परमेश्वर के निर्देशानुसार कदम उठाने से प्रत्यक्ष बचाव संभव है।
कठोरता और नैतिक दायित्व
यहाँ युद्ध-योजनाओं का नैतिक दायरा बगैर विचित्र बहस के स्पष्ट है: यहोवा के आदेश पर युद्ध करना और शत्रु के विरुद्ध कठोर कदम उठाना। यह पाठ बोध देता है कि पवित्रता और वचन की अवहेलना के साथ नहीं, बल्कि ईश्वर की इच्छा के अनुसार चलना आवश्यक है.
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त) और उनकी भूमिका
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट होता है कि पूर्ण विजय केवल शक्तिशाली सेनाओं से नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप आचरण और विश्वास से मिलती है।
हिन्दी शुभ-चिंतन ( devotional reflection )
यह verse हमें याद दिलाता है कि जब हम अपने संघर्षों में दृढ़ रहते हैं और परमेश्वर के आदेश पर चलते हैं, तो शत्रु कितने भी बड़े क्यों न हों, ईश्वर की कृपा से मार्ग खुलते हैं। यह सिखाता है कि भय के बजाय विश्वास, और कूटनीति के बजाय परमेश्वर की योजना पर भरोसा करें। ऐसा जीवन, जो दया और न्याय के साथ आगे बढ़ता है, वह प्रत्यक्ष आशिर्वाद बन सकता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Public-domain commentators)
-Matthew Henry से छोटा उद्धरण: “God’s people have safety in the assure comfort of his presence and power.”
-Albert Barnes से छोटा उद्धरण: “The deliverance comes not from arms alone, but from divine providence.”
-Adam Clarke से छोटा उद्धरण: “Divine sovereignty governs the fortunes of war, and the faithful are preserved.”
इन शब्दों के सार से यह निष्कर्ष निकलता है कि विजय एकात्मता, विश्वास और परमेश्वर के नियंत्रण पर आधारित है, न कि केवल सेना की ताकत पर.