Old Testament
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यहोशू 11:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
गिबोन के निवासी हिव्वियों को छोड़ और किसी नगर के लोगों ने इस्राएलियों से मेल न किया; और सब नगरों को उन्होंने लड़ लड़कर जीत लिया।
यहोशू 11:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 11:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 11:19 – संदर्भ का सेटिंग और पाठ काBrief
यहोशू 11 के अंतर्गत, युद्घ-यात्रा के क्रम में इश्राएली समूहों ने कनान भूमि के अनेक नगरों पर विजय पाई। 11:19 में कहा गया है कि गिबोन के निवासियों ने हिव्वियों को छोड़ दिया और अन्य नगरों के साथ मेल नहीं किया; फिर सब नगरों पर इश्राएली ने युद्ध कर जीत हासिल की। यह पंक्ति युद्ध की तीव्रता और धार्मिक-राजनीतिक परिदृश्य को उद्घाटित करती है जिसमें इश्राएली प्रभु के सामर्थ्य से समर्थित होकर आगे बढ़ते हैं।
पाठ से दिर्न थियार्थ: परमेश्वर और विश्वास का दर्शन
यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर के निर्देशन में विश्वास और धैर्य से की गई लड़ाई कैसे परिणाम देती है। इश्राएलियों की सेनाओं ने विनाशकारी शक्तियों पर जीत तब जानी जब वे प्रभु के निर्देशानुसार आगे बढ़े; यह यकीन है कि तथ्यात्मक विजय केवल मानवीय कौशल से नहीं, बल्कि परमेश्वर की सहायता और आशीष से है। इस संदर्भ में “mail न किया” का उल्लेख उन लोगों के विश्वासघात या अलग राह चुनने को परखता है—यानी धार्मिक समागम और चेतनापूर्ण एकता की आवश्यकता।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की व्याख्या
अनुशंसित cross-references और उनका संक्षिप्त अर्थ
इन संदर्भों में स्पष्ट है कि विजय की पराकाष्ठा विश्वास-आधारित आशीष और प्रभु के निर्देशों के अनुरूप चलने से मिलती है।
प्रमुख विचार और today के लिए अनुप्रयोग
- समुदाय और आस्थापूर्ण संघ: यह पाठ हमें सिखाता है कि सामूहिक एकता, धार्मिक प्रतिबद्धता और प्रभु के मार्गदर्शन के अनुरूप रहने पर बड़े-से-बड़े विरोध भी पार हो जाते हैं।
- साहस और धैर्य: कठिन समय में भी ईमानदारी से परमेश्वर की योजना पर भरोसा रखना चाहिए; विजय का स्रोत हमारे भीतर नहीं, बल्कि परमेश्वर की शक्ति है।
- नैतिक निर्णय: “मेल न किया” के संकेत से प्रेरित होकर आज के विश्वासियों को भी अपनी सामाजिक-आधिकारिक धारणाओं और संबन्धों के सच को परखना चाहिए—क्या हम ईश्वर के निर्देश के अनुरूप सामाजिक संबंध बनाते या छोड़ते हैं?
संरचना में संकलित निष्कर्ष
यहोशू 11:19 एक संकेत है कि परमेश्वर के निर्देशों के अधीन जीवन जीना और समुदाय के भीतर एकता बनाए रखना किस प्रकार प्रत्यक्ष विजय को संभव बनाता है। यह पाठ एक प्रेरक स्मरण देता है कि विश्वास-यात्रा में दृढ़ता, ईमानदारी, और परमेश्वर के साथ साझेदारी अनिवार्य हैं।
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क—संकेतित उद्धरण (यदि उपलब्ध)
नोट: नीचे दिए गए शब्द उनके सार्वजनिक-डायरेस्टेशन संस्करण से उद्धृत हैं; पूर्ण पाठ उद्धरण के लिए उनके विस्तृत टिप्पणी ग्रंथ देखें:
मैथ्यू हेनरी: “...यानि प्रभु की सहायता में ही समस्त विजय संभव होती है; विश्वास के बिना कोई भी शत्रु जीत नहीं सकता।”
एल्बर्ट बार्न्स: “स्वतंत्र युद्ध का आधार इश्राएल की इच्छा नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा पर है।”
एडम क्लार्क: “यहूशू के नेतृत्व में दर्शन-आधारित आस्था और युद्ध-नीति के संयोजन से परिणाम निकलते हैं।”