Old Testament
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यहोशू 11:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोशू ने उस सारे देश को, अर्थात् पहाड़ी देश, और सारे दक्षिणी देश, और कुल गोशेन देश, और नीचे के देश, अराबा, और इस्राएल के पहाड़ी देश, और उसके नीचेवाले देश को,
यहोशू 11:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 11:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 10:41 (HINIRV) »
और यहोशू ने कादेशबर्ने से ले गाज़ा तक, और गिबोन तक के सारे गोशेन देश के लोगों को मारा।

यहोशू 11:21 (HINIRV) »
उस समय यहोशू ने पहाड़ी देश में आकर हेब्रोन, दबीर, अनाब, वरन् यहूदा और इस्राएल दोनों के सारे पहाड़ी देश में रहनेवाले अनाकियों को नाश किया; यहोशू ने नगरों समेत उनका सत्यानाश कर डाला।

यहोशू 12:8 (HINIRV) »
हित्ती, और एमोरी, और कनानी, और परिज्जी, और हिव्वी, और यबूसी, जो पहाड़ी देश में, और नीचे के देश में, और अराबा में, और ढालू देश में और जंगल में, और दक्षिणी देश में रहते थे।
तब यहोशू ने उस सारे देश को...
पद यहोशू 11:16 का पठन-परिदृश्य यह बताता है कि यहोशू ने कुँचित विजय-यात्रा पूरी कर, पूरे-fold-प्रदेश पर अधिकार स्थापित किया। यह अध्याय वह निर्णायक फोटो खिंचता है जिसमें उत्तर-भूमि के सभी किलों और जातीय समूहों के विरुद्ध ईश्वरीय योजना के अनुसार ईश्वर की सेना एकीकृत होकर आगे बढ़ती है। यहोशू 11 में उत्तर की विशाल साम्राज्य-विध्वंस कथा एक‑अर्थपूर्ण समापन की ओर बढ़ती है: पहाड़ी देश, दक्षिणी क्षेत्र, गोशेन के देश, नीचे के देश, अराबा और इस्राएल के पहाड़ी देश—सब एक ही विस्तार में आ जाते हैं, ताकि भविष्य की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जगह बन सके।
यह पाठ ईश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
- ईश्वर की पूर्ण सत्ता और वचन-चुकाने की कृपा स्पष्ट है। यहोशू का साहस, परमेश्वर के निर्देशों के प्रति अगुवाई का उत्तर है, और हर स्थान पर ईश्वर की सहायता को प्रत्यक्ष अनुभव करता है।
- परमेश्वर के वचन से साहस, धैर्य और समर्पण की जरूरत दिखती है: बड़े लक्ष्य मिलने के लिए ईश्वर के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ना आवश्यक है, चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो।
क्यों महत्वपूर्ण शब्द और imagery
- “देश” और “देश के नीचे” का क्रम क्षेत्रीय-परिचय का संकेत है, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर ने पूरे भू-भाग को आच्छादित किया, ताकि उनके लोग एकता में रहें।
- “पहाड़ी देश” बनाम “नीचे के देश” में भौगोलिक और सामाजिक विविधता के बावजूद एकत्रता का संदेश है—ईश्वर के राज्य का विस्तार सभी हवाओं और ऊचाइयों को समेटे है।
संबंधित अनुभाग
- इब्रानी इतिहास में ईश्वर की जय-यात्रा और परमादेश की पूर्ति का क्रम बार‑बार किया गया है; यहाँ भी यहोशू का कमांड और परमेश्वर की सत्ता एक साथ चलते दिखते हैं।
- अन्य भागों में भी यहोशू 12-13 में देश की विभाजन-योजना बनती है; यहाँ एकीकृत विजय के बाद स्थिर शासन की स्थापना का सिलसिला दिखाई देता है।
आज के समय में व्यक्तिगत अनुप्रयोग
प्रेरणा हेतु छोटा संदर्भत्रय: प्रेरित करता है कि ईश्वर के वचन के अनुसार योजना बनाएं, उसका भरोसा रखें, और एक-एक कदम से विजय की दिशा पकड़ें।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप):
- यहोशू 11:23 — सम्पूर्ण देश ईश्वर के नियमों के अनुसार कब्जा हुआ; एकता और स्थिरता की नींव स्थापित हुई।
- यहजन 18:3-4 — मनुष्य के लिए संपन्नता व विजय के लिए संगठन और एकता आवश्यक है।
- राजाओं 6:12-13 — परमेश्वर की योजना के अनुरूप प्रतिष्ठान और नम्रता के साथ निर्माण का संदेश।
ध्यान दें: उपरोक्त क्रॉस-रेफरेंसेस केवल संदर्भ-आख्यान हैं, पूर्ण पद नहीं दिए गए हैं; पाठ के साथ संलग्न आयाम समझ में लाने के लिए ही प्रस्तुत हैं।
सूत्र-धारणा: यह अध्याय उस समय के आंतरिक विश्वास और समुदाय की एकता की पुष्टि करता है—ईश्वर यदि मार्ग दें, तो किसी भी विशाल चुनौती से नहीं डरना चाहिए; उससे मिली सफलता यह दिखाती है कि वचन-आदेशों के अनुसार चले तो राष्ट्रों की सीमाएं भी खुलती हैं।
नोट: इस टिप्पणी में अनुमानित महत्त्व Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे पावन-कोटियों से मिली अवधारणाओं को मूल संदेश के साथ सहज रूप में समाहित किया गया है।