Old Testament
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यहोशू 11:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और वे अपनी-अपनी सेना समेत, जो समुद्र के किनारे रेतकणों के समान बहुत थीं, मिलकर निकल आए, और उनके साथ बहुत से घोड़े और रथ भी थे।
यहोशू 11:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 11:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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न्यायियों 7:12 (HINIRV) »
मिद्यानी और अमालेकी और सब पूर्वी लोग तो टिड्डियों के समान बहुत से तराई में फैले पड़े थे; और उनके ऊँट समुद्र तट के रेतकणों के समान गिनती से बाहर थे।

1 शमूएल 13:5 (HINIRV) »
पलिश्ती इस्राएल से युद्ध करने के लिये इकट्ठे हो गए, अर्थात् तीस हजार रथ, और छः हजार सवार, और समुद्र तट के रेतकणों के समान बहुत से लोग इकट्ठे हुए; और बेतावेन के पूर्व की ओर जाकर मिकमाश में छावनी डाली।

उत्पत्ति 22:17 (HINIRV) »
इस कारण मैं निश्चय तुझे आशीष दूँगा; और निश्चय तेरे वंश को आकाश के तारागण, और समुद्र तट के रेतकणों के समान अनगिनत करूँगा, और तेरा वंश अपने शत्रुओं के नगरों का अधिकारी होगा; (इब्रा. 6:13,14)
यहोशू 11:4 का महत्व क्या है?
यहोशू 11:4 की पंक्ति बताती है कि युद्ध के मैदान में वह संगठित विशाल शक्ति किस प्रकार एक साथ उठ खड़ी होती है। इस verse में शत्रु सेनाओं के विशाल आकार, उनके घोड़े और रथों की संख्या, और समुद्र के किनारे रेतकणों के समान बढ़े हुए समूह—इन सबके द्वारा सुरक्षा और प्रभुत्व के लिए मानव-योजना की सामर्थ्य का प्रदर्शन होता है। फिर भी परमेश्वर की इच्छा के अनुसार यह सब एक उद्देश्य की पूर्ति के लिए है: वह क्षेत्र को नई उपलब्धियों और सतर्क चेतावनी के साथ जीत लेने के लिए Israellites के सामने लाता है, ताकि सत्यापित हो कि बंधन और दमन के विरुद्ध परमेश्वर की सहायता निर्भर है।
संवेदना और संदर्भ: असली पृष्ठभूमि
यह पंक्ति यरदन के पार से आये कण्ठ-बल के साथ युद्ध-योजनाओं की एक क्रमबद्ध झलक देती है, जहाँ इजरायली सेनापति जोशू ने कड़ी सरकार और विश्वास से नेतृत्व किया। यह समय इजरायल के दावेदारी के बाद के संघर्ष का है, जब वे क़ानून-प्राप्ति के बाद उत्तर और दक्षिण के नगरों को जीतना चाहते थे। इस संदर्भ में, प्रभु का वचन उनके सामने एक ठोस आधार बनकर खड़ा था—कि वह अपने लोगों के साथ है और उनकी आस्था उन पर निर्भर है।
प्रधान संदेश
मुख्य विचार यह है कि परमेश्वर का उद्देश्य ही इतिहास के मंच पर दिखता है—हत्या-युद्ध, सामरिक ताकत और मानव-योजना से ऊपर उठकर। घोड़े और रथों की संख्या भले अधिक हो, परन्तु यह उद्धार की दिशा नहीं बदलती जब परमेश्वर का योजनाकार कहीं अन्य स्थान पर नहीं, बल्कि वही है जो अपनी प्रजा के लिए लड़ाई को जीत देता है। इसलिए एकात्मता, विश्वास और परमेश्वर के निर्देशों की व्रद्धि अनिवार्य है।
आध्यात्मिक विषय और शाब्दिक संबंध
- विश्वास बनाम भय: इजाबेलों के सरल न होने पर भी इजरायल को विश्वास बनाए रखना है; परमेश्वर की सहायता से असंगत ताकत भी कम पड़ जाती है।
- प्रभु की योजना के अनुरूप विजय: भौतिक शक्ति के बजाय ईश्वर का उद्देश्य पहले स्थान पर है।
- इतिहास में ईश्वर की विश्वसनीयता: जोशू के नेतृत्व में यहूदियों ने यह दिखाया कि परमेश्वर अपने अनुयायियों के साथ रहता है और उनके संघर्षों में साहस देता है।
कुछ उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेज़
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि वाह्य बलों की भारी रचना के बावजूद परमेश्वर की सहायता और निर्देशन सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं।
संक्षिप्त देवotional विचार
हम भी अपने जीवन में बड़े जालों और भारी परिस्थितियों का सामना करते हैं, जहाँ घोड़े-रथों जैसी बाह्य शक्तियाँ दिखती हैं। परन्तु यह verse और उसका समर्थक पाठ हमें याद दिलाते हैं कि यदि हम प्रभु के निर्देशों के अनुसार चलते हैं और उनकी सहायता के भरोसे रहते हैं, तो भयभीत होने की जरूरत नहीं। परमेश्वर की विधान में स्थिर रहें; वह आपकी लड़ी को जीत में बदल देगा, भले ही रास्ता कठिन क्यों न हो।