Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 20:9 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 20:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सारे इस्राएलियों के लिये, और उनके बीच रहनेवाले परदेशियों के लिये भी, जो नगर इस मनसा से ठहराए गए कि जो कोई किसी प्राणी को भूल से मार डाले वह उनमें से किसी में भाग जाए, और जब तक न्याय के लिये मण्डली के सामने खड़ा न हो, तब तक खून का पलटा लेनेवाला उसे मार डालने न पाए, वे यह ही हैं।
यहोशू 20:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 20:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

गिनती 35:15 (HINIRV) »
ये छहों नगर इस्राएलियों के और उनके बीच रहनेवाले परदेशियों के लिये भी शरणस्थान ठहरें, कि जो कोई किसी को भूल से मार डाले वह वहीं भाग जाए।

यहोशू 20:4 (HINIRV) »
वह उन नगरों में से किसी को भाग जाए, और उस नगर के फाटक* में से खड़ा होकर उसके पुरनियों को अपना मुकद्दमा कह सुनाए; और वे उसको अपने नगर में अपने पास टिका लें, और उसे कोई स्थान दें, जिसमें वह उनके साथ रहे।

यहोशू 20:6 (HINIRV) »
और जब तक वह मण्डली के सामने न्याय के लिये खड़ा न हो, और जब तक उन दिनों का महायाजक न मर जाए, तब तक वह उसी नगर में रहे; उसके बाद वह खूनी अपने नगर को लौटकर जिससे वह भाग आया हो अपने घर में फिर रहने पाए'।”
यहोशू 20:9 — नगर पवित्र करने की व्यवस्था
यह अध्याय यहोशू के समय की उन शास्वत सज़ाओं के साथ नगर-नियोजन का भाग है, जहां कानून के अनुसार समुदाय के भीतर असावधानी से हुई हत्या की स्थिति में शरण लेने और न्याय के प्रत्यक्ष क्रियान्वयन के लिए विशिष्ट नगर निर्धारित किये गए थे। यह वाक्यावली यह दिखाती है कि यहूदी समाज में अपराध-निरोध और सुरक्षा के लिए एक सुव्यवस्थित सुरक्षा-चक्र था, जिसमें नगरों को शरण-स्थल बनाकर नागरिकों को न्यायालय की प्रतीक्षा करने का अवसर दिया गया।
ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास का संकेत
इस नीति का मूल में यह विचार है कि यह एक प्रकार का मानवीय सुरक्षा dispatched model है: जहाँ प्राणी की हत्या Accidentally हुई हो, वहाँ आहत परिवार तुरंत बदला नहीं मांग सकता, बल्कि न्याय के लिए मण्डली के सामने खड़े होने तक खून-प्रतिदान से बचाव प्राप्त हो। यह व्यवस्था दिखाती है कि ईश्वर कानून के साथ सुरक्षा और संरक्षा प्रदान करते हैं ताकि दोष-नियंत्रण में मानवीय दया और प्रक्रिया का संतुलन बना रहे।
महत्वपूर्ण शब्द चित्र
संबद्ध प्रसंग (cross-references)
1) प्रलम्बित दायित्व: दूसरे नगरों में शरण-स्थिति का नियम, जो सामुदायिक सुरक्षा के लिये व्यवहारिक मार्ग दिखाता है।
2) न्याय और दया का संतुलन: हत्या-घटना के बाद की कार्यवाही में दया, सुरक्षा और उचित निर्णय के बीच संतुलन का महत्व।
3) कुलीनता और समाज-नियम: समुदाय के भीतर एक कानून-संरचना से न केवल अपराध नियंत्रित होते हैं, बल्कि आश्रय और सुरक्षा का भरोसा भी बना रहता है।
आधुनिक अनुप्रयोग
आज के संदर्भ में यह उद्धृत व्यवस्था सुरक्षा, निष्पक्ष न्याय और मानवीय संरक्षण के महत्व की याद दिलाती है। यदि किसी अनजाने में नुकसान हुआ है, तो समाज को एक तर्कसंगत, कानून-आधारित मार्ग अपनाना चाहिए जिसमें त्वरित प्रतिशोध के बजाय उचित न्यायिक प्रक्रिया शामिल हो। यह भी दर्शाता है कि दोष-स्वीकार और समुदाय की सुरक्षा एक दूसरे के पूरक हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पाठ हमें बताता है कि ईश्वर ने समुदाय के लिए एक संरचित मार्ग निर्धारित किया ताकि हत्या के मामले में न्यायिक प्रक्रियाँ और सुरक्षा दोनों बराबर काम करें—शरण-स्थलों के माध्यम से निर्दोष को बचाते हुए, अपराध के लिए उचित और विवेकपूर्ण निर्णय संभव हो सके।
नोट: इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सीधे उद्धरण आवश्यकतानुसार सीमित रूप से सम्मिलित किये गए हैं।