Old Testament
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यहोशू 20:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जब तक वह मण्डली के सामने न्याय के लिये खड़ा न हो, और जब तक उन दिनों का महायाजक न मर जाए, तब तक वह उसी नगर में रहे; उसके बाद वह खूनी अपने नगर को लौटकर जिससे वह भाग आया हो अपने घर में फिर रहने पाए'।”
यहोशू 20:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 20:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गिनती 35:12 (HINIRV) »
वे नगर तुम्हारे निमित्त पलटा लेनेवाले से शरण लेने के काम आएँगे, कि जब तक खूनी न्याय के लिये मण्डली के सामने खड़ा न हो तब तक वह न मार डाला जाए।

गिनती 35:24 (HINIRV) »
तो मण्डली मारनेवाले और लहू का पलटा लेनेवाले के बीच इन नियमों के अनुसार न्याय करे; (गिन. 35:12, यहो. 20:6)

इब्रानियों 9:26 (HINIRV) »
नहीं तो जगत की उत्पत्ति से लेकर उसको बार-बार दुःख उठाना पड़ता; पर अब युग के अन्त में वह एक बार प्रगट हुआ है, ताकि अपने ही बलिदान के द्वारा पाप को दूर कर दे।
जहॉशू 20:6 का अर्थ और संदर्भ
इस पद में यह कहा गया है कि जब तक यह मण्डली के सामने न्याय हेतु खड़ा न हो और जब तक उन दिनों का महायाजक न मर जाए, तब तक वह उसी नगर में रहे; फिर अंततः वह खूँनी अपनी नगर लौटकर वह स्थान छोड़ दे जिसे वह भाग आया था। सरल भाषा में यह कहा गया है कि पिशाच, जो किसी शहर के अन्दर हत्या के दोष से बचना चाह रहा था, कुछ समय के लिए वहीं अटका रहा जब तक न्याय-प्रक्रिया और धार्मिक नेतृत्व की स्थिति स्पष्ट न हो जाए, और महायाजक के निधन के साथ उसकी शरण समाप्त हो जाती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोशू के समय में इfraएली नगर-घटाओं (कंट्रीस) में हत्या के अपराध से रोमांचित प्रतिशोध और शांति-स्थापना के लिए "न्याय के लिए नगर" प्रस्तावित किया गया था। यह नियम उन क़ायदे से जुड़ा है जिसके अंतर्गत यदि किसी अपराधी को शहर के भीतर सुरक्षित शरण मिल जाए, और शहर के अग्रणी न्याय-प्रमुखों द्वारा उसे निष्पादित किया जाना संभव हो, तब उसे वही शहर न्याय के दायरे में रखा जाएगा ताकि परिवार और समाज के बीच संतुलन बना रहे। यह अध्याय यहूदियों के नगर-शासन के नियमों की एक विशिष्ट व्याख्या देता है कि सुरक्षा और शमन के बीच किस प्रकार संतुलन कायम रहते हैं।
व्याख्या के बिंदु
कठोर और संयत समझाइश
यहPassage कानूनों के एक विशिष्ट किस्म की व्यवस्था है ताकि हत्या-प्रकोप के समय समाज में शांति बनी रहे, परन्तु अपराधी के प्रति डर और दमन से भी उपर न्याय-प्रक्रिया का मार्ग खुला रहे। यह कहानी एक समावेशी उद्देश्य बताती है—न्याय, शरण और समाज की सुरक्षा, सब मिलकर एक संतुलित कानूनी ढांचे के भीतर चलते हैं।
संबद्ध पाठ—छोटे क्रॉस-रेफरेंसे
1) यहोशू 20:1-3: नगर-शरण के नियमों की संकल्पना की शुरुआत; यह बताता है कि शरण-नगर कौन से हैं और क्यों बनाये गये।
2) व्यवस्थाविवरण 19:12-13: शरण लेने वाले के बारे में प्रक्रियात्मक मार्गदर्शन; परिवार और समुदाय के हित कैसे जुड़े रहते हैं।
3) 1 किंग 2:33: कुछ इतिहासिक संदर्भ में कहाँ और कैसे शरणार्थी के साथ न्याय का संतुलन बना रहता था।
छोटी निष्पादित takeaway
यह उपदेश हमें बताता है कि पाप के उत्तरदायित्व से निपटते समय समाज को सुरक्षा और न्याय के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। एक शरणार्थी की अस्थिरता का समाधान तब होता है जब न्याय-सरकार स्पष्ट और प्रभावी हो; तब शरण समाप्त होकर व्यक्ति अपने घर लौट सकता है और समुदाय पुनः स्थिर हो सकता है।
निष्कर्षित विचार
यह अध्याय अंततः यह संदेश देता है कि सही समय पर न्याय और व्यवस्थापन से समाज सुरक्षित रहता है; एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक-नैतिक धागा यह है कि धार्मिक नेतृत्व और कानून एक दूसरे के पूरक हों ताकि हिंसा से बचाव हो और जीवन की स्थिरता बनी रहे।
उद्धरण-नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक domain टिप्पणीकारों के ठीक उद्धरण इस पाठ के भीतर संक्षेप में प्रयुक्त नहीं हैं, बल्कि उनके विचारों की प्रेरणा को समेकित रूप से समाहित किया गया है ताकि हिन्दी पाठक को सरल और सुसंगत स्वर मिले।