Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
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यशायाह 65:10 पर टिप्पणी (HINIRV)
: यशायाह की ग्रंथावली में यह भाग बडे़ परिवर्तन और उद्धार के भविष्यवाणीय संकेत देता है। 65:10 में प्रभु अपने चुने हुओं के लिए एक आशीषपूर्ण दृश्य प्रस्तुत करते हैं: मेरी प्रजा जो मुझे ढूँढ़ती है, उसकी भेड़-बकरियाँ शारोन के मैदानों में चरेंगी और उनके गाय-बैल आकोर नामक तराई में विश्राम करेंगे। यह संदेश उन लोगों के लिए है जो परमेश्वर के साथ सत्यापना-व्यवहार बनाते हैं और उनकी योजना में भागीदारी करते हैं।
केन्द्रीय विचार: यह छवि एक शांति-एवं अभय का चित्र है जिसमें ईश्वर अपने लोगों के आध्यात्मिक-सुरक्षा and जीवन-उन्नति को संरक्षित करते हैं। शारोन और आकोर दोनों ठहराव और फल-प्रदाता स्थान के प्रतीक बनते हैं, जहाँ प्रजा सुरक्षित और समृद्ध वातावरण में जीती है। यह उद्धार का वह स्थायी पहलू है जिसमें परमेश्वर के राज्य की क़ायदा-स्वरूपता और नयी सृष्टि का भाव मुखर होता है।
मुख्य विषय: - 1) परमेश्वर की देखरेख में सुरक्षा: भेड़-बकरियाँ और गाय-बैल दोनों के चरना-विजय से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपनी प्रजा की दैनिक ज़रूरतों का ध्यान रखते हैं और उन्हें शांत, संरक्षित स्थान देते हैं। - 2) शांति और विश्राम: आकोर तराई में विश्राम का भाव सीधे-सीधे शांति के राज्य की पुष्टि करता है जहाँ शत्रु-उत्पन्न अशांति घटित नहीं होती। - 3) स्थान-प्रतीक और भविष्य का आशय: शारोन और आकोर जैसी ठहराव-उत्पत्ति से यह संकेत मिलता है कि ईश्वर की नई सृष्टि में लोग अपनी पहचान बनाए रखते हैं, फिर भी उनके संरक्षण और प्रमुखता की गारंटी होती है।
संबंधित आयतें (संक्षेप में) और उनका तात्पर्य: - संदर्भ जागरूकता: यह बालकृष्णपूर्वक उद्धारक योजना के भीतर भले-बुरे दोनो प्रकार के मानव-जीवन को एक साथ समेटता है; परमेश्वर के राज्य में जीवन-शांति और समृद्धि का आह्वान प्रकट होता है। - नयी सृष्टि के संकेत: यह भाग पुराने राज्य के तनावों से मुक्त एक नए, शान्त और सुरक्षित वातावरण की कल्पना कराता है—जो पवित्र आत्मा के कार्य से संभव है। - दया और प्रभुता का संयोजन: परमेश्वर अपनी प्रजा के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है, और उनकी भलाई का ध्यान रखता है।
दो-तीन व्यावहारिक आचार-प्रेरणा: - अपनी ज़िंदगी में परमेश्वर की सुरक्षा पर भरोसा रखें; भय-उत्पन्न स्थिति में भी उनकी अगुवाई में विश्राम पाने की कोशिश करें। - अपने समुदाय में शांति और मेल-जोड़ बनाए रखें; जैसे चरने के स्थान पर भेड-बकरियाँ एक सुरक्षित स्थान पाती हैं, वैसे ही हम भी एक-दूसरे के लिए सुरक्षित और सहायक बनें। - अपने स्थान-निर्देशन में आशीष और कर्तव्य-भाव बनाएं; ईश्वर के राज्य के आदर्श-स्थलों को अपने जीवन में लागू करें।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में) और उनके अर्थ: - इब्रानी भविष्यकथन में शांति के स्थानों का उल्लेख—यह दिखाता है कि परमेश्वर नए समुदाय में सामाजिक स्थिरता और व्यक्तिगत भलाई चाहते हैं। - पुराने नियम के अन्य स्थान जहाँ ईश्वर अपने लोगों को चरने के स्थान देकर उनकी जरूरतें पूरी करते हैं; यह विचार निर्वचन करता है कि ईश्वर जीवन-यापन के हर प्रकार के अवसर प्रदान करते हैं। - एक-दो संदर्भ जो उद्धार और नवीन-युग की आशा को समेटते हैं, ताकि पाठक समझ सके कि यह दृश्य एक दीर्घकालिक योजना का भाग है।
संक्षिप्त निष्कर्ष: यशायाह 65:10 भविष्य के उद्धार का सुखद चित्र प्रस्तुत करता है—जहाँ परमेश्वर की प्रजा सुरक्षा, शांति और स्थायित्व के साथ रहते हैं। शारोन और आकोर के प्रतीकात्मक स्थान इस बात की पुष्टि करते हैं कि ईश्वर अपने लोगों को एक सुरक्षित, समृद्ध और धार्मिक रूप से संतुष्ट जीवन देना चाहते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण संकेत: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के ठोस वाक्यों के सीधे उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि चाहेंगे तो मैं उनके Public Domain कार्यों से संक्षिप्त, उपयुक्त पंक्तियाँ चयन कर सकता हूँ और उनका संदर्भ दे सकता हूँ।
छोटे उद्धारण (संलग्न): अगर चाहें, तो मैं नीचे दिए गए आयोग के अनुसार इन प्रमुख टिप्पणीकारों के संक्षिप्त, प्रासंगिक सार निष्कर्षों से 2–3 पंक्तियाँ जोड़ सकता हूँ, ताकि पाठक को मूल विचार अधिक स्पष्ट मिलें।