Old Testament
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यशायाह 65:21 — संपूर्ण_context में एक दृष्टि
पद यह उस समय की आशा का चित्र प्रदर्शित करता है जब परमेश्वर की प्रतिजन्ती योजना के अनुसार लोगों के बीच शांति और स्थिरता लौटेगी। यशायाह के मकसद में यह उद्धोष है कि भविष्य की नई पृथ्वी में लोग अपने घर बनाकर बसेंगे, और वे अपनी मेहनत का फल आराम से खाएंगे, अर्थात् जीवन के साधारण और वास्तविक सुख पुनः स्थापित होंगे। यह योजना अभिशापपूर्ण दूत-नुकसान के बाद की राहत और सामान्य जीवन की सुरक्षा का प्रतीक है।
मुख्य अर्थ
यह शांति-पूर्ण और गहन स्थायित्व का विचार प्रस्तुत करता है: परिवार, घर, जमीन—सब एक सुरक्षित और स्थिर जीवन के साथ जुड़ते हैं। उद्धार के नए युग की शुरुआत में, निरंतरता, समुदायिक जीवन और भोजन की व्यवस्था पुनः बनती है। यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगो को समृद्धि, सेहत और स्थिरता देना चाहता है—कि वे डर और अशांति से मुक्त हों और अपने श्रम के फलों को सहज रूप से खाएं।
मुख्य विषय
संदर्भित आयाम
एक समान आशा और पुनर्स्थापना के चित्र नीचे के भागों में भी मिलती है:
पाठ-जीवन के आवेदन
जो पाठ इस वाक्य को देता है, वह आज भी हमें आशा देता है कि जीवन के साधारण-सी चीजें—घर, भोजन, परिवार—परमेश्वर की देखभाल और सुरक्षा के भीतर सुरक्षित रहें। कठिन समय में भी ईश्वर का उद्देश्य स्थिरता और दयालुता से भरा जीवन है। यह प्रेरणा देता है कि हम अपने परिवार और समुदाय के साथ मिलकर ईमानदारी और मेहनत के साथ जीवन को सुधारने की कोशिश करें, ताकि सामाजिक और नैतिक निरापदता बनी रहे।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
यशायाह 65:17–25 में नया निर्माण, शांति और सुरक्षित जीवन के संकेत मजबूत होते हैं। रोम31:12–13 जैसी शिक्षाएं भी ईश्वर की नई व्यवस्था में पूर्ण सुरक्षा और सामुदायिक जीवन के महत्व को रेखांकित करती हैं। मत्ती 6:33 में पहले परमेश्वर के राज्य की बात और अन्य आवश्यकताओं के पीछे न भागना—ये सभी विचार इस वचन के पीछे के उद्देश्य से संगत हैं: ईश्वर की राज्य-व्यवस्था में स्थिरता और संतुष्टि।
व्यवहारिक विचार
- अपने घर-परिवार के प्रति दायित्वों को पुनः मान दें और सामुदायिक सहयोग बढ़ाएं।
- मुश्किल समय में भी ईश्वर की दया पर भरोसा बनाकर धैर्य रखें, ताकि मेहनत के फलों को सही समय पर प्राप्त किया जा सके।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह 65:21 में एक आशाजनक चित्र है जिसमें God की पुनर्स्थापना के युग में स्थिरता, परिवार-जीवन और कर्तव्य-परिश्रम से प्राप्त भोजन का आनंद दिखाया गया है। यह वर्तमान में भी हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर अपने लोगों को सुरक्षित और भरपूर जीवन देना चाहता है, ताकि वे एक दूसरे के साथ प्रेम और निर्वहण के साथ रहते रहें।
महत्वपूर्ण उद्धरण (हार्नीज़/बार्न्स/क्लार्क से, केवल यदि उपलब्ध): “वे घर बनाकर उनमें बसेंगे; वे दाख की बारियाँ लगाकर उनका फल खाएँगे।”