Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
यशायाह 65:1 यशायाह 65:2 यशायाह 65:3 यशायाह 65:4 यशायाह 65:5 यशायाह 65:6 यशायाह 65:7 यशायाह 65:8 यशायाह 65:9 यशायाह 65:10 यशायाह 65:11 यशायाह 65:12 यशायाह 65:13 यशायाह 65:14 यशायाह 65:15 यशायाह 65:16 यशायाह 65:17 यशायाह 65:18 यशायाह 65:19 यशायाह 65:20 यशायाह 65:21 यशायाह 65:22 यशायाह 65:23 यशायाह 65:24 यशायाह 65:25



यशायाह 65:23 का संदर्भ और अर्थ
यशायाह 65 में परमेश्वर अपने भविष्य के कल्याणपूर्ण समय की दिशा में उत्कट भविष्यवाणी करते हैं। इस पद में अनुभव होगा कि उनका काम व्यर्थ नहीं जाएगा; उनके बच्चे सुरक्षित, संतान-संवर्धित रहेंगे और उनके आशीर्वाद का निर्बाध धारा चलती रहेगी। यह उद्धार-युग एक भरोसेमंद विश्वासी समाज की तस्वीर देता है जहाँ परमेश्वर के चुने हुए लोग शांत और स्थिर जीवन जीते हैं।)
मुख्य अर्थ
यह पद यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के प्रयासों का सम्मान करेगा और उनके संतानें शांति और सुरक्षा के साथ बढ़ेंगी। शारीरिक सुरक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक पूर्ति भी आएगी; भय या चिंता के स्थान पर विश्वास और आशा का वातावरण बनेगा। यह विशिष्ट रूप से यहूदियों के पुनरागमन और नए शहरों/घरों के निर्माण का प्रतीक है, परन्तु समान वादा सभी प्रियजन पर लागू होता है जो परमेश्वर के वश में हैं।
2-3 प्रमुख विषय
संबद्ध संदर्भ
– भज 115:14-15: यहूदियों के लिए बाहरी आशीषों के साथ 하나님 का मनोबल और सुरक्षा जोड़ी जाती है; यह भविष्यवाणी उसी विश्वास-जगत की पुष्टि करती है।
– यशाय 54:10: परमेश्वर के स्थायी प्रेम और आशीष का दायरा विस्तृत होता है; इसका संबंध “वंश-आशीष” के विचार से है।
– इब्र 11:9-10: आस्था से लोग निर्बाध स्थान और ठहराव चुनते हैं; वंश और अस्तित्व की स्थिरता परमेश्वर के राज्य में है।
व्यावहारिक विचारण (Practical Reflection)
हम अपने दैनिक प्रयासों को यह समझकर समझें कि परमेश्वर उनका भागीदार है। अपने काम और परिवार की सुरक्षा को केवल मानव संभवताओं तक सीमित न रखें; परमेश्वर की वPromises पर भरोसा करें। कठिन समय में भी आत्म-विश्वास बनाए रखें, क्योंकि वह उनका परमेश्वर है जो उनके होने-सहित जीवन को एक स्थिर, भय-रहित मार्ग देता है।
संक्षिप्त सार
यशायाह 65:23 हमें यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर के लोग व्यर्थ नहीं होंगे; उनके बच्चे सुरक्षित और उनकी दुनिया शांत होगी। यह वचन भविष्य के राज्य की आशा को दृढ़ करता है और मानवीय चिंता के बीच भी विश्वास के चिह्न को बनाए रखता है।
उद्धरण-संदर्भ (महत्वपूर्ण उद्धरण): यह टेक्स्ट Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के समेकित इनसाइट्स से प्रेरित है; उनके स्पष्ट और संक्षिप्त विचारों को इस सार में एकीकृत किया गया है। यदि किसी विशिष्ट पंक्ति के सीधा उद्धरण मिले तो वह नीचे दिया गया है:
“तेरे परिश्रम व्यर्थ न होंगे” (Barnes के भावी व्याख्यान के अनुरूप अर्थ-संरचना) — कृपया ध्यान दें कि यहाँ मैं उनके मौलिक शब्दों का पूर्ण उद्धरण नहीं देता, पर उनका भावार्थ एक साथ रखा गया है।