यशायाह 65:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु तुम जो यहोवा को त्याग देते और मेरे पवित्र पर्वत को भूल जाते हो, जो भाग्य देवता के लिये मेज पर भोजन की वस्तुएँ सजाते और भावी देवी के लिये मसाला मिला हुआ दाखमधु भर देते हो;

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यशायाह 65:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 65:11 का परिचय और संदर्भ (HINIRV)

यशायाह की पुस्तक में प्रलय के समय के तोहफे-प्रश्नों के बीच परमेश्वर के लोग जिन सांसारिक पथ पर चले जाते हैं, उनका अंश दिखाया गया है। इसVerse में यह चेतावनी है कि जो लोग यहोवा को त्यागते हैं और उसके पवित्र पर्वत को भुलाते हैं, वे देवताओं के लिए भोजन और आशीर्वादों के लिए मापदंड तय करते हैं। यह सामाजिक-धार्मिक ढांचे के भीतर किसी प्रकार की निष्ठुरता, अंधविश्वास, और शब्दशः धर्मिकता से आगे उठकर, ईश्वर के सच्चे आदर्श से विचलन को दर्शाता है।

केन्द्रित अर्थ

यह वाक्य उन लोगों के बारे में है जो यथार्थ में ईश्वर के संदेश और धार्मिक कर्तव्य से विराम लेते हैं, ताकि वे विदेशी देवताओं के लिए रीति-रिवाज और भोजन की व्यवस्था कर सकें। परमेश्वर की दशा में यह विश्वासघात और वैमनस्य का संकेत है—ऐसी व्यवस्था जिसमें नैतिक विवेक और कर्तव्य की जगह व्यक्तिगत लाभ और बहुरुपये पूजा आ गयी है। यह सब देखते हुए परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के पतन की ओर इशारा कर रहा है, ताकि वे फौरन अपनी फितरत बदलकर फिर से उसके निकट लौटें।

मुख्य थीम

  • त्याग और अविश्वास: यहोवा की पूजा से दूरी बनाकर लोग अन्य देवताओं की पूजा में लग जाते हैं।
  • लाभ-पेशे की पूजा: भोजन और मसालों के भोग द्वारा धार्मिक अनुष्ठान का विकृत प्रयोग।
  • सुधार और न्याय: God’s judgment के साथ आशा — अविश्वास के विरुद्ध ईश्वर की आस्था-भरी दशा पुनः लौटाने की मांग।

उद्धार-प्रेरणा के साथ क्रॉस-रेफरेंस

1) यशायाह 1:11-15 — प्रभु यह कहता है कि बाहरी धार्मिक कर्म आध्यात्मिक उदासीनता का मापदंड नहीं बन सकता; नम्रता और न्याय आवश्यक है।

2) मीका 6:6-8 — कौन-से कर्म व सही मार्ग परमेश्वर को वे अधिक प्रिय लगेंगे: अनुष्ठान से अधिक न्याय, दया और नम्रता।

3) मत्ती 15:8-9 — “यह लोग मुझे मानते हैं दायित्व के साथ, पर उनका दिल दूर है; वे 인간 के नियमों को ठहराते हैं।”

व्यावहारिक विचार

आज के संदर्भ में यह verse यह याद दिलाता है कि धार्मिकता केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि हमारी आंतरिक निष्ठा और नैतिक जीवन का परिणाम है। यदि हमारे व्यवहार में दबे-छुपे लाभ, भोग-विलास, या सामाजिक मान-प्रतिष्ठा पृष्ठभूमि में ईश्वर-आराधना को प्रतिस्थापित कर दे, तो हम भी उसी संकीर्ण मार्ग पर चल पड़ते हैं। गुणों, दया, और सत्य के साथ जीवन बिताना ही हमारे आराध्य के प्रति सच्ची भक्ति है।

संयुक्त सार

यशायाह 65:11 एक चेतावनी है कि धार्मिक आचरण के भीतर छुपे दुराग्रह, धोखा, और स्वार्थपूर्ण पूजाशीलता से बचना चाहिए। यदि हम अपने दैनिक जीवन में परमेश्वर की इच्छा के अनुसार न्याय, दया और नम्रता का पालन करें, तो हमारी पूजा भी पवित्र और संतुष्ट रहेगी। यह संदेश न सिर्फ पुरानी सभाओं के लिए है, बल्कि आज के विश्वासियों के लिए भी है कि ईश्वर के साथ हमारी वास्तविक निष्ठा क्या है—यह दिखना चाहिए।

महत्वपूर्ण उद्धरण (केवल जो ठोस रूप से Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के समान स्रोतों से हैं): इस संस्करण में प्रत्यक्ष पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं; यदि आप चाहें तो मैं इन पण्डितों के संक्षिप्त सार को संदर्भ के साथ उद्धृत कर दूँगा।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 65:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 1:28 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 1:28 (HINIRV) »
परन्तु बलवाइयों और पापियों का एक संग नाश होगा, और जिन्होंने यहोवा को त्यागा है, उनका अन्त हो जाएगा।

व्यवस्थाविवरण 32:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 32:17 (HINIRV) »
उन्होंने पिशाचों के लिये जो परमेश्‍वर न थे बलि चढ़ाए, और उनके लिये वे अनजाने देवता थे, वे तो नये-नये देवता थे जो थोड़े ही दिन से प्रकट हुए थे, और जिनसे उनके पुरखा कभी डरे नहीं। (1 कुरि. 10:20)

यशायाह 2:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 2:2 (HINIRV) »
अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि यहोवा के भवन का पर्वत सब पहाड़ों पर दृढ़ किया जाएगा, और सब पहाड़ियों से अधिक ऊँचा किया जाएगा; और हर जाति के लोग धारा के समान उसकी ओर चलेंगे।

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