यशायाह 65:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा यह कहता है: “जिस भाँति दाख के किसी गुच्छे में जब नया दाखमधु भर आता है, तब लोग कहते हैं, उसे नाश मत कर, क्योंकि उसमें आशीष है, उसी भाँति मैं अपने दासों के निमित्त ऐसा करूँगा कि सभी को नाश न करूँगा।

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यशायाह 65:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 65:8 का अर्थ और संदर्भ

यह पद एक ऐसे समय की बात करता है जब ईश्वर अपने दासों के लिए कृपा एवं सुरक्षा की गारंटी देता है, भले ही इजराइल ने पाप के कारण बड़े भाग में दंड का सामना किया हो। संदर्भ यह है कि देश-गणना और दंड के बीच ईश्वर यह बताने जा रहा है कि वह उन लोगों पर भी दया करेगा जो धर्मी तरीके से आशीष पाते हैं। यशायाह के ग्रंथ में यह विभाजन-भाव अक्सर ऐसे प्रतीक से व्यक्त होता है जहाँ “दाख के गुच्छे” जैसी तस्वीर न्याय और कृपा के संतुलन को दर्शाती है: नाश से बचना और आशीष पाना एक साथ संभव है जब ईश्वर की दया और समुदाय की विश्वासी राहों का संयोजन होता है।

केंद्रीय अर्थ

इस वचन में ईश्वर पुष्टि करते हैं कि उनकी दयालुता और उद्धार-प्रवृत्ति एक विशिष्ट समुदाय के लिए है—“मेरे दासों के निमित्त”—जो उनकी आज्ञाओं के अनुसार चलते हैं। यह एक प्रकार की आश्वासन-सी आई है कि जो लोग निष्ठापूर्वक विश्वास रखते हैं, उनके लिए विध्वंस नहीं, वरन् पोस्ट-चयनित आशीष है। दाख के गुच्छे की छवि इस बात पर जोर देती है कि आशीष एक जीवनधारा के रूप में बहती है, जो एक सामूहिक और व्यक्तिगत स्तर पर भी हरित-उत्पादन की तरह सुरक्षित और समर्थक है।

मुख्य थीम

  • कृपा के साथ न्याय: ईश्वर दया दिखाते हैं, पर वह पाप से तौली गई दुनिया को भी नाश नहीं करना चाहते।
  • विश्वासी समुदाय की सुरक्षा: “मेरे दासों” के लिए एक विशिष्ट संरक्षण का संकल्प।
  • आशीष का समेकन: नया दाखमधु-परिपाटी की तरह आशीष एक संगठित जीवन के रूप में बहती है।

संबद्ध पदों के संदर्भ

1) यशायाह 1:17-19 में यह दर्शाया गया है कि धर्म-निष्ठा और सुधार से God की कृपा मिलती है, जिससे राज्य और समाज में समृद्धि आ सकती है।

2) इब्रानियों 12:14 में पवित्र जीवन के साधन—शांतता और पवित्रता—पर जोर दिया गया है, जो यहूदियों के साथ-साथ नये विश्वासियों के लिए भी लागू है।

3) मत्ती 12:20 में उज्ज्वल आशा का चित्र दिखाता है कि कमजोर नहीं रहते, बल्कि नयी दिशा में चलने वाले पर कृपा उरसे रहती है।

व्यावहारिक चिंतन

हम कैसे “दाख के गुच्छे” से जुड़ते हैं? अपने जीवन के छोटे-छोटे निर्णयों में ईश्वर की शान्ति और आशीष को चुनना—कठिन समय में भी करुणा और नैतिकता बनाए रखना, समाजिक-परिवारिक रिश्तों में दया और न्याय का संतुलन रखना और ऐसे भरोसे को मजबूत करना कि God की कृपा हमारा मार्गदर्शन करे।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यशायाह 65:8 बताता है कि ईश्वर अपने दासों के लिए नाश नहीं चाहता, बल्कि आशीष के नए दौर का आरम्भ करना चाहता है। दोष-ग्रस्त विश्व में यह एक आश्वस्ति है कि योग्य वृत्ति और निष्ठा से चलने पर परमेश्वर कृपा के गुच्छे बनाते रहते हैं, और एक समुदाय के रूप में हम भी इसी आशीष को अनुभव कर पाते हैं।

cross-references

- יशायाह 1:17–19: सुधार और कृपा का योग। समझाइश: सचेतन प्रयास से आशीष संभव है।

- इब्रानियों 12:14: पवित्र जीवन के मार्ग पर चलना—आशीष की दिशा।

- मत्ती 12:20: नन्हे और शक्तिशाली कार्यों में भी कृपा का आयोजन—दिखाता है कि कमज़ोर भी भरोसे से सुरक्षित रहते हैं।

नोट: इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मौलिक विचारों से मिली सूक्ष्मता को समेकित रूप में एक साथ प्रस्तुत किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 65:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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देखो, परमेश्‍वर यहोवा की दृष्टि इस पाप-मय राज्य पर लगी है, और मैं इसको धरती पर से नष्ट करूँगा; तो भी मैं पूरी रीति से याकूब के घराने को नाश न करूँगा,” यहोवा की यही वाणी है।

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रोमियों 9:27 (HINIRV) »
और यशायाह इस्राएल के विषय में पुकारकर कहता है, “चाहे इस्राएल की सन्तानों की गिनती समुद्र के रेत के बराबर हो, तो भी उनमें से थोड़े ही बचेंगे। (यहे. 6:8)

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यशायाह 6:13 (HINIRV) »
चाहे उसके निवासियों का दसवाँ अंश भी रह जाए, तो भी वह नाश किया जाएगा, परन्तु जैसे छोटे या बड़े बांज वृक्ष को काट डालने पर भी उसका ठूँठ बना रहता है, वैसे ही पवित्र वंश उसका ठूँठ ठहरेगा।”

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