Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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लैव्यव्यवस्था 21:14 — संकेत और संदर्भ
यह वच्न एक विशिष्ट सामाजिक-धार्मिक नियम को प्रस्तुत करता है: जो विधवा, या त्यागी हुई, या भ्रष्ट, या वेश्या हो, ऐसी किसी से वह विवाह न करे, बल्कि अपनी ही जाति के भीतर एक कुँवारी कन्या से विवाह करे। यह नियम उस समय के सामाजिक मानदंडों और पवित्रता की डोर को जोड़ता है, ताकि इस कर्तव्यपूर्ण संबंध में न केवल विवाह का पवित्रता पक्ष बना रहे बल्कि समुदाय में यह सुनिश्चित हो सके कि सामाजिक और धार्मिक सीमाएं बनी रहें।
पुस्तक का संदर्भ और ईश्वर में विश्वास
ग्लोहित में दिए गए नियमों में ईश्वर की पवित्रता और समाज के नैतिक मानदंड स्पष्ट होते हैं। यह नियम बताता है कि परमेश्वर मर्यादा और ईमानदारी को कितनी ऊँचाइयों पर रखना चाहते हैं, ताकि विवाह के सूत में टूट-फूट न आए। साथ ही यह भी संकेत करता है कि समुदाय में पवित्र आचरण का मानक कैसे बनाए रखा जाए ताकि सामाजिक तानाबाना धार्मिक शासन के अनुसार चले।
संकेतित शब्दों की स्पष्ट व्याख्या
सम्बन्धित बाइबिल अंश (क्रॉस-रेफरेंसेस)
1) मरकुस 10:11-12 में यीशु ने विवाह के संबंध में स्पष्ट किया कि विवाह में पत्नि-पति की बंधन ही एक एकालाप है; परन्तु यहाँ लेवीय कानून में वैकल्पिक मानदंड दिखते हैं।
2) 1 कुरिन्थियों 7:2 में पौलुस ने कहा कि स्त्री-पुरुष के संबंध में व्यभिचार का खतरा है इसलिए हर पुरुष को अपनी पत्नी से ही बंध रहे का निर्देश दिया गया है; यह नैतिक क्रम विवाह और पवित्रता के संरक्षण को दर्शाता है।
3) यिर्मयाह 3:1-2 में धार्मिक चेतावनियाँ मिलती हैं कि वैवाहिक संबंधों की मर्यादा टूटना सामाजिक-धार्मिक बन्धनों को कमजोर कर देता है; इस तुलना से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर वैवाहिक purity बनाए रखने को क्यों कहता है।
आज के लिए व्यवहारिक आवेदन
सारांश
यह वचन विवाह की पवित्रता को बनाए रखने की एक नीतिगत शिक्षा है। विधवा, त्यागी हुई, भ्रष्ट, या वेश्या जैसे हालात में विवाह के लिए अस्वीकार और एक निर्दिष्ट, नैतिक वैवाहिक मार्ग अपनाने की बात कहता है—जो समुदाय की पवित्रता और ईश्वर की महत्ता को बनाए रखे। यह दृष्टिकोण आज भी व्यक्तिगत आचरण और सामाजिक सहभागिता के बीच संतुलन बनाने में मार्गदर्शक है।
टीका-उद्धरण (यदि प्रयोज्य हों):
मैथ्यू हेनरी, ऐलबर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के कुछ संकलन टिप्पणियों में सीधे उद्धरण उपलब्ध हों तो वे इस पाठ के मानक नियमों के साथ एकीकृत होते हैं; इन दिग्गजों के शब्द यदि मिलें, तो वह नीचे के अनुरोध के अनुसार उद्धृत होंगे।