Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
लैव्यव्यवस्था 21:1 लैव्यव्यवस्था 21:2 लैव्यव्यवस्था 21:3 लैव्यव्यवस्था 21:4 लैव्यव्यवस्था 21:5 लैव्यव्यवस्था 21:6 लैव्यव्यवस्था 21:7 लैव्यव्यवस्था 21:8 लैव्यव्यवस्था 21:9 लैव्यव्यवस्था 21:10 लैव्यव्यवस्था 21:11 लैव्यव्यवस्था 21:12 लैव्यव्यवस्था 21:13 लैव्यव्यवस्था 21:14 लैव्यव्यवस्था 21:15 लैव्यव्यवस्था 21:16 लैव्यव्यवस्था 21:17 लैव्यव्यवस्था 21:18 लैव्यव्यवस्था 21:19 लैव्यव्यवस्था 21:20 लैव्यव्यवस्था 21:21 लैव्यव्यवस्था 21:22 लैव्यव्यवस्था 21:23 लैव्यव्यवस्था 21:24
लैव्यवस्था 21:16 का अर्थ और संदर्भ
सीधे शब्दों में, यह Verse यह बताता है कि परमेश्वर ने मूसा से कहा कि ऐसे व्यक्ति जो मानसिक या शारीरिक रोग, कमी या अपवर्तन से असंगत हैं, उनकी भूमिका घर-परिवार या समाज के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाए। यह नहीं कहता कि वे मूल्यहीन हैं, परम्परागत धार्मिक व्यवस्था के अनुसार उनके परमुख कर्तव्य और सामाजिक भूमिका स्पष्ट कर दी गई थी।
पृष्ठभूमि और सन्दर्भ
यहाँ लैव्यवस्था की निषेध-नियमावली और पवित्र व्यवस्था का भाग है, जिसमें याजकों, पवित्रता और सामाजिक व्यवहार के नियम दिए गए हैं। इजरायल के समाज में पवित्रता की धारणा का महत्त्व था, और असंगत या अपवर्तित स्थिति वाले व्यक्ति किसी विशिष्ट सेवा में बाधा डालते थे। मगर यह स्पष्ट भी है कि यह नियम सामाजिक व्यवस्था की नियामक सीमाओं का भाग है, न कि किसी व्यक्ति की मानवीय गरिमा का नकारना।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
उद्धरण-संकेत और तुलनात्मक विचार
इन विषयों पर पुराने उल्लेखित टीकाओं से संकलित निष्कर्षों का एकीकृत सार इस प्रकार है:
मैथ्यू हेनरी से: “हमारी आत्मा की पवित्रता के लिए व्यवस्था का उद्देश्य समाज के प्रभुता-तंत्र को संतुलित करना है।”
एलबर्ट बार्न्स से: “शास्त्र हमें यह दिखाते हैं कि पवित्रता के नियम मानव अवरोध नहीं, बल्कि सामंजस्य के मार्ग हैं।”
एडम क्लार्क से: “यही नियम यह संकेत करते हैं कि याजक-सेवा के लिए योग्य वातावरण बनाने हेतु विशिष्ट स्थितियाँ निर्धारित रहनी चाहिएं।”
संघर्षपूर्ण परिप्रेक्ष्य के साथ 2-3 क्रॉस-रेफरेंसे
व्यावहारिक takeaway
हम यह सीख लेते हैं कि परमेश्वर की व्यवस्था सामाजिक संरचना में स्पष्टता और सुरक्षा बनाये रखने के साथ मानवता और दया के पक्ष को भी सम्वर्धित करती है। आज के संदर्भ में इसका पाठ यह है कि सीमाओं के भीतर भी सम्मान, सहायता एवं समानुभूति बनाए रखना चाहिए, ताकि समुदाय सभी के लिए सुरक्षित और मर्यादित रहे।
संक्षिप्त सार
यह पद समाज के 居क और पवित्रता के ढाँचे में विशेष जिम्मेदारियों के निर्धारण का संकेत करता है, ताकि पवित्रता के साथ मानवीय गरिमा की भी रक्षा हो सके।
अनुच्छेद लिंक-स्टाइल क्रॉस-रेफरेंस विवरण: अन्य क़ानून-संरचनाओं में पवित्रता, सेवा-योग्यता और समुदाय की सुरक्षा पर विचार मिलते हैं; रोगी/असामर्थ व्यक्तियों के साथ व्यवहार के नैतिक आचार पर विवेचन भी मिलता है।