Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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लैव्यव्यवस्था 23:31 का संदर्भ और अर्थ
यह वचन התורה की वह कड़ी है जिसमें יהוה ने यहूदियों को समय-समय पर विशिष्ट रीति-रिवाजों के पालन के निर्देश दिए। यह verse विशिष्ट दिनचर्या से जुड़ा है कि विश्राम और पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ कार्यों से परहेज किया जाए, ताकि पवित्र जन-जीवन का निर्माण हो सके। लैव्यव्यवस्था 23 में पर्वों और उत्सवों की सूची है, जिनमें हर एक का निर्धारित समय और प्रकार होता है; 31वां verse इस क्रम के एक हिस्से के रूप में स्पष्ट करता है कि कौन-से प्रकार के काम नहीं किए जाएँ, ताकि दैवीय उपस्थिति के लिए वातावरण पवित्र रहे।
मुख्य अर्थ
वाक्य का मूल अर्थ है—तुम किसी प्रकार का काम-काज न करो; यह तुम्हारी पीढ़ी-पीढ़ी के लिए स्थायी नियम है। यहाँ “काम-काज” से तात्पर्य उन गतिविधियों से है जो शांति, उत्सव या धार्मिक समारोह के समय में हर्षोल्लास और आराधना के अवसर को बाधित करें। नियम यह है कि पवित्र संगति के समय सामान्य दैनिक कामों को रोका जाए ताकि यह अवसर एक अलग, भिन्न, श्रद्धामय स्थिति बन जाए।
दो-तीन मुख्य विषय
सम्बद्ध भाग/Cross-references
1) सिर्जन 2:3 — परमेश्वर ने सप्ताह के छः दिन काम किया और सातवें दिन विश्राम किया; इसका दृष्टांत पवित्र समय की महत्ता को स्पष्ट करता।
2) निर्गमन 20:10 — उपासना के दिन को विश्राम के दिन के रूप में अलग रखना; यह सीधे शारीरिक कार्यों के निषेध से जुड़ा है।
3) यूहाना 4:23–24 (आध्यात्मिक आराधना के वास्तविक रूप) — बाह्य रीति-रिवाज अधिक गहरे अंतःकरण की आराधना से जुड़ा है; बाहरी कर्मों की पवित्रता अंतःस्थ होने चाहिए।
प्रायोगिक विचार
जब भी हम विशिष्ट धार्मिक अवसरों में व्यावहारिक कार्यों को सीमित करते हैं, तो हमारे जीवन में एक सहज चेतना उभरती है—हम ईश्वर के पवित्र समय को सम्मान दे रहे हैं। यह आज के संदर्भ में भी उतना ही लागू होता है: परिवार-परिवार, समुदाय-समुदाय के भीतर पवित्रता और एकांतिक ध्यान बनाए रखना। यह नियम केवल सत्ता-निष्ठा नहीं, बल्कि आंतरिक संहार नहीं, बल्कि आस्था और समर्पण का अभ्यास है।
छोटी जीवन-rुटीन के लिए मार्गदर्शन
संक्षिप्त समापन
इस Verse का लक्ष्य है—पवित्र समय की संहिता को मानना ताकि God’s presence के प्रति हमारी आस्था और भक्ति दृढ़ रहे। यह नियम हर पीढ़ी के लिए एक स्थिर मार्गदर्शक है, जो बाहरी क्रिया-कलापों को सीमित कर अंतःकरण की आराधना को मुख करता है।
नोट्स
यथार्थ उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से इस पाठ से संबंधित संक्षिप्त टिप्पणी के समय-समय पर सामान्य विचार लिए जाते हैं; नीचे उनके विचारों के कुछ संक्षिप्त संकेत शामिल हैं:
Matthew Henry: यह नियम यह बताता है कि पवित्र अवसरों पर काम-काज बंद रहे, ताकि आराधना का मन शुद्ध रहे।
Albert Barnes: [उद्धरण-उद्धृत पाठ नहीं दिया गया है; सार यह है कि] पवित्र समय में सांसारिक कार्यों से विराम लेना आस्था की विशुद्धता को बढ़ाता है।
Adam Clarke: [संकेत] उत्सव के समय सामान्य कर्मों को रोकना और धार्मिक अवसरों को उन्नत करना—ये दोनों विचार एक साथ चलते हैं।