Old Testament
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लैव्यव्यवस्था 23:5 — पहला महीने के चौदहवें दिन सांझ के समय फसह
मुख्य interpretive point: यह वचन यह संकेत देता है कि यहोवा के निर्देशानुसार फसह त्यौहार कब शुरू होता है—चौदहवें दिन के सांझ के समय—जो पवित्र समयबंदी और उनकी निर्बलता-प्रतिरोध (कष्ट के बीच भी भरोसा) के साथ जुड़ा है। यह समय धार्मिक क्रिया-कलाप की एक ठोस सीमा है, जिसेIsrael के लोग चूक नहीं सकते थे; यह नये जन्म की प्रतीक और ईश्वर के उद्धारकार्य की स्मरण-योजना का आरम्भ है।
पाठ-संदर्भ का साहित्यिक क्रम
यह अध्याय लेवीय विधान का हिस्सा है जो त्योहारों के समय-सारिणी को व्यवस्थित करता है। 23 अध्याय में अन्य त्योहारों की तिथियाँ और उनके पालन के नियम दिए गए हैं; यहाँ फसह का वर्णन चौदहवें दिन की सांझ के समय स्पष्ट है। यह एक जागरण-योग्य घोषणा है कि उद्धार का कार्य ईश्वर की नियत-योजना के अनुसार आरम्भ होता है, न कि मानव की अपेक्षा-या इच्छा से।
धर्मशास्त्रीय महत्व
इस वाक्य के द्वारा यह स्पष्ट होता है कि पवित्र समारोह समय पर शुरू होता है और यहोवा के निर्देशों के सम्मान को दर्शाता है। सांझ के समय यानि दिन के समाप्त होने की प्रतीक्षा के साथ, यहूदियों के सामूहिक उद्धार-यातना (फसह) की शुरुआत होती है। यह ईश्वर की क्रिया-योजना और निर्बाध आशीषों के साथ एक जुड़ाव बनाती है: विश्वासियों के लिए भी जीवन-निर्माता और उद्धारकर्ता के साथ एक नई शुरुआत।
अन्य ग्रंथों से संबंध
- ಯೋಜना और उद्धार का संकेत: आबादी-आनंद के साथ, फसह की स्मृति से ईश्वर के पितरों के समय में किया गया उद्धार पुनः स्मरणीय बनता है।
- सुरक्षा और विश्वास के लिए शपथ-सम्पादन: यह समारोह यह बताता है कि ईश्वर के निर्देशों का पालन ही सच्चे जीवन की सुरक्षा है, न कि मानव-स्तर की कल्पनाएँ।
- नया आरम्भ: फसह का पाठ्य यह दर्शाता है कि पूर्व इतिहास से उठकर विश्वासी जीवन नया आरम्भ ले सकता है, एक ऐसा आरम्भ जो मर्यादा-नियमों के साथ जुड़ा हो।
Cross references (संक्षेप में) और शामिल कारण
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से स्पष्ट होता है कि फसह एक ऐतिहासी स्मृति है जो वर्तमान दिन में उद्धारक के आगमन और ईश्वर की वचनबद्धता के साथ जुड़ती है।
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
फसह का आरम्भ निर्धारित समय पर होता है—पहले महीने के चौदहवें दिन, सांझ के समय—जो यह याद दिलाता है कि उद्धार का कार्य परमेश्वर की स्पष्ट योजना के अनुसार होता है। यह वचन हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर के निर्देशों का पालन ही जीवन की सुरक्षा और नई शुरुआत का मार्ग है।
टिप्पणी-नोट: यह पाठ परंपरागत टिप्पणीकारों के公开-डाक से जुड़ी सामान्य समझ पर आधारित है। नीचे उद्धृत उल्लेखित लेखक-उद्धरण उनके सार्वजनिक-डाक ग्रंथ से हैं, यदि उपलब्ध हों तो: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त वाक्य-उद्धरण नीचे उद्धरण के रूप में दिया जा सकता है—पर यहाँ मूल संदेश कथा-शास्त्र के अनुरूप ही प्रस्तुत किया गया है।