Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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लैव्यव्यवस्था 27:10 के संदर्भ में: किसी प्रकार से न बदले जाने वाला दायित्व
यह पद उन नियमों के क्रम का हिस्सा है जो प्रभु की पवित्रता और सम्पत्ति के पवित्र बन्धन को समझाते हैं। यहाँ एक पशु-बलि या दान के मूल्य के बदले किसी प्रकार की विनिमय-रणनीति नहीं चलेगी; जो दान दे रहा है, वही उसका सही मूल्य और पवित्रता बनाए रखेगा। जब पशु का बदला लेने की बात आती है, तब भी वह बदला पवित्र ठहरता है, क्योंकि सब कुछ परमेश्वर के सामने है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में जो पाठ बताता है
यह वह स्पष्टता है कि अलौकिक मूल्य केवल परमेश्वर के निर्देश और व्यवस्था के भीतर मान्य होता है। मनुष्य की सेवाभावना, दान-चाहना या आर्थिक भावनाें चाहे कितनी भी प्रबल हों, परन्तु परमेश्वर की नीतियाँ तय करती हैं कि कौन सा दान, किस रूप में स्वीकार्य है। इस नियम से यह भी सीख मिलती है कि भगवान के संतुलन में कुछ चीजें असीम और अनुग्रहपूर्ण हैं, पर कुछ में कड़ाई और पवित्रता की मांग रहती है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य समकलीन बाइबल अंश (संदर्भ)
1) होशे 12:8 की दृष्टि से कीमत और वस्तु की मान्यता में संतुलन का विचार मिलता है कि मनुष्यों के पास जो कुछ है, वह परमेश्वर के साथ जोड़ा हुआ है।
2) बीजवीथ 27:19-21 में मूल्य-प्रतिपूर्ति के नियम पर और स्पष्ट रूप से धार्मिक दाँव-पेंच और पवित्रता के साथ विनिमय की सीमाओं का उल्लेख मिलता है।
3) एकेजकेल 18:4 में यह चेतावनी है कि हर सांस परमेश्वर के नियंत्रण में है, और मूल्यांकन उसी के अनुसार किया जाता है।
पूर्व-स्थापित टिप्पणीकारों की संक्षिप्त आपेक्षिक दृष्टि
मैथ्यू हैनरी ने इस प्रकार के नियमों को परमेश्वर की पवित्र व्यवस्था के भाग के रूप में समझाया है: जो कुछ भी पूजनीय है, उसे न्यायपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए; विनिमय की शक्ति से नहीं, बल्कि विश्वास और निष्ठा से संचालित होना चाहिए। अल्बर्ट बार्न्स ने कहा कि यह पाठ दिखाता है कि सभी देयताएं और कोई भी दान परमेश्वर के नियम के भीतर आते हैं, ताकि पवित्रता और निष्पक्षता बनी रहे। एडम क्लार्क ने इसे यह समझाने के लिए उद्धृत किया कि दान का मूल्य और विनिमय उसकी लागत से अधिक नहीं किया जा सकता जब तक कि वह परमेश्वर की व्यवस्था के अनुरूप हो। (इन विचारों का सार उपरोक्त पाठ के साथ एकीकृत किया गया है।) यहां केवल संक्षिप्त संकेत हैं; पूर्ण उद्धरण मूल पाठ में मिल सकता है।
आज के संदर्भ में लागू करने योग्य विचार
छोटे cross-reference सार
पाठ के साथ कुछ संगत क्रॉस-रेफरेंसेज़ यह संकेत देती हैं: एक क्षेत्र में दान-लग्न और पवित्र मूल्य की महत्ता; दूसरे क्षेत्र में विनिमय के उचित-न्याय के सिद्धांत; तीसरे में ईश्वर के नियंत्रण की पूर्णता। इन सभी से प्रेरित हो कर व्यक्ति अपने विश्वास को व्यवहार में सुदृढ़ रखे।
संक्षेप में, यह नियम प्रेरित है ताकि हर प्रकार के मूल्यांकन में ईश्वर की पवित्रता और निष्पक्षता सर्वोपरि रहे। बाह्य विनिमय से बढ़कर एक आस्था है जो परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप दान और मूल्य निर्धारित करती है।