Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
लैव्यव्यवस्था 27:1 लैव्यव्यवस्था 27:2 लैव्यव्यवस्था 27:3 लैव्यव्यवस्था 27:4 लैव्यव्यवस्था 27:5 लैव्यव्यवस्था 27:6 लैव्यव्यवस्था 27:7 लैव्यव्यवस्था 27:8 लैव्यव्यवस्था 27:9 लैव्यव्यवस्था 27:10 लैव्यव्यवस्था 27:11 लैव्यव्यवस्था 27:12 लैव्यव्यवस्था 27:13 लैव्यव्यवस्था 27:14 लैव्यव्यवस्था 27:15 लैव्यव्यवस्था 27:16 लैव्यव्यवस्था 27:17 लैव्यव्यवस्था 27:18 लैव्यव्यवस्था 27:19 लैव्यव्यवस्था 27:20 लैव्यव्यवस्था 27:21 लैव्यव्यवस्था 27:22 लैव्यव्यवस्था 27:23 लैव्यव्यवस्था 27:24 लैव्यव्यवस्था 27:25 लैव्यव्यवस्था 27:26 लैव्यव्यवस्था 27:27 लैव्यव्यवस्था 27:28 लैव्यव्यवस्था 27:29 लैव्यव्यवस्था 27:30 लैव्यव्यवस्था 27:31 लैव्यव्यवस्था 27:32 लैव्यव्यवस्था 27:33 लैव्यव्यवस्था 27:34



लैव्यव्यवस्था 27:18 — संदर्भ-संदर्भ में परिचय
इस वचन में याजक को खेतों के दाम और जुबली के वर्ष के समय से जुड़ी दीर्घकालिक सुरक्षा की व्यवस्था समझाई जाती है। यदि कोई व्यक्ति अपने खेत को जुबली के वर्ष के बाद पवित्र ठहराता है, तो उसे खेत की वास्तविक कीमत का आकलन समय के अनुसार करवाया जाएगा, ताकि जमीन का स्वामित्व स्थिर रहे और यहूदी जीवन के सामाजिक-आर्थिक संतुलन का भाग बने।
मुख्य अर्थ
याजक के द्वारा निर्धारित मूल्य का उद्देश्य यह है कि जुबली की महत्त्वपूर्ण व्यवस्था—यूनानी वैसा गुण जो कि हर सातवें वर्ष भूमि का बंधन मुक्त कर देता है—के पीछे आर्थिक स्थिरता और न्याय का सिद्धांत बना रहे। अगर खेत जुबली के वर्ष के बाद पवित्र ठहराया गया है, तो उसका मूल्य वर्षों के अनुसार घट-बढ़ सकता है, जिससे जमीन के स्वामित्व का संतुलन बना रहे और दायित्वों का उचित आनुपातिक वितरण हो।
मुख्य विषय
संबद्ध प्रवचनों से ऊर्जा
यही विचार-पंक्ति पुराने नियम के अन्य हिस्सों में भी मिलता है, जहाँ भूमि-कीमत और जुबली की व्यवस्था राष्ट्रीय जीवन के धन-सम्पन्नता और पारिवारिक स्थायित्व के मसलों को सम्बोधित करती है। उदाहरण के रूप में यह विचार मिलते हैं कि जमीन भगवान की है और मानवीय अधिकारों के साथ जिम्मेदारियाँ भी जुड़ी होती हैं (उद्धरण नहीं दिए जाते)।
व्यावहारिक प्रतिवेदन
यह वचन हमें दर्शाता है कि हमारी कथन-व्यवस्था में मूल्यांकन निष्पक्ष और समय-सम्बन्धी होना चाहिए। जब किसी भी संपत्ति के बदले मूल्य तय किया जाए, तो उसका आधार—कितने वर्ष शेष हैं—यह स्पष्ट और पारदर्शी हो। इससे समाज में दबाव-खपत कम होती है और गरीब-उत्पादन में असमानता घटती है।
अनुच्छेद-समापन
लगातार न्यायपूर्ण मूल्यांकन और याजक-नियंत्रण के साथ जुबली वर्ष की पवित्र व्यवस्था एक स्थिर सामाजिक व्यवस्था के ढांचे को बनाती है। यह हिस्सा दिखाता है कि परमेश्वर कैसे आर्थिक-नैतिक संतुलन को महत्व देता है, ताकि भूमि और संपत्ति के दायित्व—परिवार, समाज, और आराधना—सब साथ-साथ चलते रहें।
क्रॉस-रेफरेंसे
1) उल्लेखित मूल विचार—भूमि का मालिकाना परमेश्वर का है और मनुष्यों को उसका न्यायपूर्ण विवेक देना चाहिए।
2) जुबली की कल्पना—समय आधारित मुक्तिदायिनी व्यवस्था से समुदायिक आर्थिकता को संतुलन मिलता है।
3) संतुलन और दायित्व—क्षेत्रीय संपत्ति के मूल्यांकन में पारदर्शिता और निष्पक्षता का महत्त्व।
ध्यान दें: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलनों में संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध हो सकते हैं; यहाँ आवश्यक स्थानों पर उनका संक्षिप्त और आवश्यक संदर्भ-उद्धरण किया गया है।