Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 16:1 लूका 16:2 लूका 16:3 लूका 16:4 लूका 16:5 लूका 16:6 लूका 16:7 लूका 16:8 लूका 16:9 लूका 16:10 लूका 16:11 लूका 16:12 लूका 16:13 लूका 16:14 लूका 16:15 लूका 16:16 लूका 16:17 लूका 16:18 लूका 16:19 लूका 16:20 लूका 16:21 लूका 16:22 लूका 16:23 लूका 16:24 लूका 16:25 लूका 16:26 लूका 16:27 लूका 16:28 लूका 16:29 लूका 16:30 लूका 16:31



लूका 16:16 का संदर्भ और मुख्य समझ
यह पद रोमांचक बदलाव की शुरुआत को दर्शाता है। लूका के Gospel में व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं की शिक्षा के समय से ही परमेश्वर के राज्य के बारे में घोषणाओं का क्रम चलता है; पर अब यूहन्ना के प्रकाशन के साथ वह स्पष्ट गति पाता है। इस वचन में कहा गया है कि तब से परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार सुनाया जा रहा है और हर कोई उसमें प्रवेश करने के लिए अग्रसर रहता है। यह यह दर्शाता है कि धार्मिक व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले प्रतीकात्मक ढांचे—जो यीशु से पहले के आह्वान थे—अब क्रियात्मक रूप से केंद्रीय जागरण बन जाते हैं।
मुख्य अर्थ
इस verse का केंद्र यह है कि परमेश्वर के राज का प्रचार एक निर्णायक मोड़ पर पहुँचा है। यूहन्ना दा्वित (यूहन्ना द) के आयुध की शुरुआत से पहले धार्मिक व्यवस्था के अंतर्गत जो तैयारी हो चुकी थी, वह अब वास्तविक परमेश्वर के राज्य के उद्घाटन के साथ पक्का ठहर जाती है। परिणामस्वरूप, सुसमाचार हर जगह प्रचारित और ग्रहण करने योग्य बन गया है; लोग स्वेच्छा से उस राज में प्रवेश करने को तत्पर हैं।
कुंजी विषय
पवित्र ग्रंथ के साथ संबद्ध पाठ
इन विचारों को नीचे दिए गए पाठों के साथ जोड़ा जा सकता है ताकि यह दृश्य स्पष्ट बने:
इन संदर्भों से समन्वय दिखता है कि राज्य के आगमन की राह और सुसमाचार की घोषणा साथ-साथ बढ़ती रही है; प्रवेश की सहज उपलब्धता भी इसी क्रम की भागीदारी है।
व्यावहारिक विचार
हम अपने जीवन में कैसे प्रतिक्रिया करें? पहले, हमें यह याद रखना चाहिए कि परमेश्वर के राज्य का संदेश अब अधिक स्पष्ट और उपलब्ध है। दूसरा, प्रवेश के लिए सक्रिय आस्था और सही-सीधी सहभागिता चाहिए—वह दया, न्याय और प्रेम के साथ दूसरे लोगों तक सुसमाचार पहुँचाने की ओर प्रेरित करता है। अंततः, विरोध और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, ईश्वर का राज्य आ रहा है और उसकी सत्ता को स्वीकारना हमारे भाग्य का भाग है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यूहन्ना के आगमन और उसके साथ परमेश्वर के राज्य का प्रचार एक नई दशा बनाते हैं। व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं के समय से शुरू हुआ विश्वास-आह्वान अब सुसमाचार में समाहित होकर सार्वभौमिक पहुँच के रूप में सामने आ गया है—हर कोई उसमें प्रवेश करने के लिए त्वरित कदम उठा सकता है और करता है।
पूर्ववर्ती पंक्ति के अंश (चारण)
अर्थपूर्ण प्रवचनों के लिए नीचे के उद्धरण चयनित हैं: “पर अब राज्य के लिए प्रचार प्रारंभ हो गया है”—यह संक्षेप में उक्त विचार को समेटता है। (यह संरक्षित टिप्पणी है; पूर्ण उद्धरण साइट-वार अधिकार के अनुसार नहीं दी जा रही।)