Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 16:1 लूका 16:2 लूका 16:3 लूका 16:4 लूका 16:5 लूका 16:6 लूका 16:7 लूका 16:8 लूका 16:9 लूका 16:10 लूका 16:11 लूका 16:12 लूका 16:13 लूका 16:14 लूका 16:15 लूका 16:16 लूका 16:17 लूका 16:18 लूका 16:19 लूका 16:20 लूका 16:21 लूका 16:22 लूका 16:23 लूका 16:24 लूका 16:25 लूका 16:26 लूका 16:27 लूका 16:28 लूका 16:29 लूका 16:30 लूका 16:31
लूका 16:27 के Immediate Setting और अर्थ
यह दृष्टांत यीशु ने धनवान और गरीबी में पड़ा लज्जित रधा (लूका 16:19-31) के बीच की बातचीत के भीतर प्रस्तुत किया है। उसने धनवान की आत्मा के प्यासे प्रश्न को सामने रखा जब उसने तपस्वी गरीब लज़ारस और उसकी मृत्यु के बाद के विपरीत अनुभवों को देखा। इस पंक्ति में धनवान पुत्र (युवक) की विनती है कि वह अपने पिता के घर से किसी को भेज दे ताकि उनके घर में भी चेतना, जागरूकता और माफी की संभावना बनी रहे। लक्ष्य यह है कि परिवार के सदस्य पाप के परिणामों से बच सकें।
कहानी का पाठ और परमेश्वर पर विश्वास
पिता के घर के संदर्भ में यह विनती दर्शाती है कि पाप के बारे में चेतना और प्रेरणा तब तक प्रभावी होती है जब तक लोग अपनी आजादी के साथ सच मान लें। परन्तु यह भी स्पष्ट है कि यह चेतना कभी-कभी विवेक के माध्यम से नहीं, वरन् कर्म-परिणामों के अनुभव से आती है। यीशु इस प्रकार बताता है कि दुराचार और अनुग्रह के बीच की दूरी न तो केवल ज्ञान से कम होती है और न ही किसी बड़े संकेत से। यह उदाहरण यह बताने के लिए है कि परमेश्वर का धर्म हर व्यक्ति के लिए खुला है, परन्तु मन में परिवर्तन लाने के लिए आंतरिक रूप से स्वीकृति की आवश्यकता है।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
संबंधित पवित्र ग्रंथ
निम्न संदर्भ इस पाठ को अधिक गहराई से समझने में सहायक होते हैं:
आज के आशय और उपयोग
यह उद्धार का पाठ提醒 देता है कि ज्ञान और संदेश तब तक बिना परिवर्तन के अधिक नहीं है, जब तक वह हमारे दिल में विश्वास और समर्पण का रूप न ले ले। यदि हम किसी मित्र, परिवार या समाज के भीतर सच के लिए आग्रह को सुनते हैं, तो हमें स्वयं उस सच के अनुरूप जीना चाहिए—न कि केवल उसका शब्द-होल्डर बनना।
चर्च-आधारित संकल्प
हम कैसे आजकल अपने जीवन में सत्य और दया को साथ-साथ रख सकते हैं:
याद रहे: “असल चेतना वह है जो प्रेम के साथ क्रमिक परिवर्तन लाती है”—यह दी गई कहानी का मूल संदेश है।
यहाँ पर इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के सार-संयोजन का उपयोग किया गया है। अगर आप उनके सटीक शब्द देखना चाहें तो वे ऐतिहासिक शब्दों में प्रकट होते हैं; नीचे केवल संकेत के रूप में उनके विचारों के स्वरूप दिए गए हैं:
Matthew Henry की टिप्पणी के अनुरूप, इस भाग में चेतना के स्थान पर मन के परिवर्तन और आंतरिक परिवर्तन की आवश्यकता स्पष्ट है।
Albert Barnes के अनुसार, प्रभु का संदेश परिवार को सचेत करने के लिए है, ताकि वे अपने जीवन के दायरे में दया और न्याय को पहचानें।
Adam Clarke के अनुसार, यह दृष्टांत धर्म के बारे में एक चेतावनी देता है कि धन-सम्पदा भी उद्धार नहीं दे सकती, जब तक व्यक्ति परम पिता की ओर पलट नहीं आता।