Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 11:1 मरकुस 11:2 मरकुस 11:3 मरकुस 11:4 मरकुस 11:5 मरकुस 11:6 मरकुस 11:7 मरकुस 11:8 मरकुस 11:9 मरकुस 11:10 मरकुस 11:11 मरकुस 11:12 मरकुस 11:13 मरकुस 11:14 मरकुस 11:15 मरकुस 11:16 मरकुस 11:17 मरकुस 11:18 मरकुस 11:19 मरकुस 11:20 मरकुस 11:21 मरकुस 11:22 मरकुस 11:23 मरकुस 11:24 मरकुस 11:25 मरकुस 11:26 मरकुस 11:27 मरकुस 11:28 मरकुस 11:29 मरकुस 11:30 मरकुस 11:31 मरकुस 11:32 मरकुस 11:33
मरकुस 11:26 — क्षमा न करने पर परम पिता निर्गत अवरोध
Immediate setting: येसु ने बाइबल के इस भाग में मंदिर के चहल-पहल, विश्वासयोग्य व्यवहार और प्रार्थना के साथ-साथ आचार-व्यवहार के महत्व को बार-बार उठाया है. यह पद सामने आता है जब Jesus मंदिर के पास से एक घटना के बाद प्रेरित करते हैं—कि जब आशीर्वाद और विश्वास की राह कठिन हो, तब हमें क्षमा के मार्ग पर स्थिर रहना चाहिए।
पाठ का मूल संदेश
यह वचन स्पष्ट करता है कि ईश्वर के साथ हमारा रिश्ता क्षमा-क्रिया से जुड़ा है: यदि हम अन्य लोगों की गलतियों को न माफ करें, तो परम पिता भी हमारे अपराधों को क्षमा नहीं करेंगे। यहाँ क्षमा देना एक व्यवहारिक परीक्षण है जो हमारे विश्वास की गहराई को बतलाता है।
ईश्वर की ओर धन्यता और विश्वास
पहचानने की बात है कि परमेश्वर हर परिस्थिति में क्षमा की कृपा उपलब्ध कराते हैं, 그러나 मनुष्यों से भी वही अपेक्षा रखते हैं—क्षमा न करने की स्थिति में वह भी क्षमा का लाभ रोक सकता है। यह पाठ प्रेम और न्याय के बीच संतुलन को उजागर करता है: ईश्वर हमारे प्रति उदार हैं, पर हमने भी दूसरों के प्रति कृपा दिखानी है।
मुख्य शब्दों/छवियों की व्याख्या
अन्य उल्लेखित पाठ
यह सिद्धांत कई अन्य जगहों पर भी दोहराया गया है जहाँ अनुशासन और दया के बीच संतुलन बनाये रखने की प्रेरणा दी जाती है।
कंटेक्स्ट-टिकाऊ cross-references
– मत्ति 6:14-15: क्षमा का मूल पाठ दिल की निष्ठा से जुड़ता है; यदि हम दूसरों को क्षमा नहीं करते, तो हमारा आकाशीय पिता भी क्षमा नहीं करेगा।
– लूक 11:4: प्रार्थना में क्षमा की विनती बताती है कि जीवन के हर क्षेत्र में ईश्वर के साथ खुलापन जरूरी है।
– याकूब 2:13: दयालुता और न्याय का संयोजन यह दिखाता है कि प्रभु के दरबार में mercy triumphs over judgment।
आज का व्यावहारिक अनुप्रयोग
1) प्रलोभन आये पर भी छोड़ना नहीं: छोटे-छोटे रोष भी धीरे-धीरे आत्म-समझौता कर लेते हैं; क्षमा से मन शुद्ध रहता है।
2) रिश्तों की पुनःस्थापना: क्षमा करने से रिश्ते मजबूत होते हैं और आत्मा को शांति मिलती है।
3) समुदाय में प्रेम की दिशा: क्षमा का अभ्यास एक समुदाय को एकलव्य बनाये रखता है, जहां हर सदस्य एक-दूसरे के बोझ को साझा करता है।
इस पाठ की एकीकृत समझ यह है कि ईश्वर की क्षमा से प्रेरित होकर हमारा व्यवहार भी तेज़ और नम्र होना चाहिए; जो किसी के प्रति कटुता नहीं, बल्कि करुणा और क्षमा का मार्ग दिखाता है।
नीचे के उद्धरणीय टिप्पणीकारों से संक्षिप्त संकेत:Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के विशिष्ट वाक्य यदि उपलब्ध हों, तो पाठ में उनके निष्कर्षों को आवश्यकतानुसार समाहित किया गया है, पर शब्दों के प्रत्यक्ष संपूर्ण उद्धरण दिये गए नहीं हैं।