मरकुस 8:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्या आँखें रखते हुए भी नहीं देखते, और कान रखते हुए भी नहीं सुनते? और तुम्हें स्मरण नहीं?

पिछला पद
« मरकुस 8:17
अगला पद
मरकुस 8:19 »

मरकुस 8:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

मरकुस 8:18 का संदेश: आँखें रहते भी नहीं देखते, कान रहते भी नहीं सुनते

इस पद के साथ संकट यह है कि यीशु अपने शिष्यों के अस्थिर दिल के बारे में करुणा-भरे शब्दों में चीत्कार करते हैं. वे अपने चमत्कारों को देखकर भी दशा को नहीं समझ पा रहे थे। परमेश्वर की चमत्कारी ज्योति उनके भीतर स्थिर धारणाओं के कारण अस्पष्ट हो जाती है, और वे आध्यात्मिक दृष्टि खो बैठे हैं। संदर्भ में Jesus ने महान आश्चर्यों के साथ चूसने से पहले, पानी में चलने, पलों में अन्नां-फलों के चमत्कार दिखाए; फिर भी शिष्य समझ नहीं पाते कि वह ईश्वर का पुत्र है और उसकी शिक्षणता और भूमिका क्या है।

केन्द्र मूल अर्थ

यह वाक्य बताता है कि भौतिक ज्ञान और अनुभव के बावजूद आत्मिक समझ का अभाव कैसे बना रहता है जब लोग हृदय से नहीं देखते। यीशु स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि शिष्य-समूह में स्मरण शक्ति और आध्यात्मिक दृष्टि क्षीण हो चुकी है, जो कि उनकी आत्मिक सुnews को रोकता है। यह स्मरण-शक्ति,聽कान-संवेदना और समर्पण से जुड़ी है; जब मन प्रभु के उद्देश्य को याद नहीं रखता, तब वह चमत्कार के पीछे के संदेश को भी नहीं पकड़ पाता।

मुख्य विषय

  • आत्मिक अंधापन बनाम शारीरिक जागरूकता: देख सकना जरूरी है, पर देखने की दृष्टि भी चाहिए होती है—जो विश्वास और प्रेरणा से जुड़ी है.
  • यही कारण कि स्मरण और सुनना कैसे विश्वास के प्रशिक्षण का हिस्सा बनते हैं: यीशु की शिक्षा और चमत्कार के पीछे के उद्धारक उद्देश्य को पहचानना।
  • क्या यह धारणाएं केवल शिष्यों तक सीमित रहती हैं, या आज भी हमारे भीतर प्रतिध्वनि करती हैं?

संबंधित आयतें

यह पाठक को स्मरण करता है कि परमेश्वर की मार्मिक शिक्षा के लिए ανοικ हृदय आवश्यक है; उद्धार के लिए देखना और सुनना, विश्वास की प्रतिक्रिया बनना चाहिए।

- पिटचार: मरकुस 4:12 के समान आशय की व्याख्या से यह समझना आसान होता है कि दृष्टि और सुनवाई में नहीं तो दूसरे कारण से भी अज्ञानता रहती है।

- मत्ती 13:15: यीशु ने यह दिखाया कि अंधापन तब आता है जब लोग शब्द के साथ इरादा नहीं बनाते।

व्यावहारिक चिंतन

हम कैसे अपने आंतरिक दृष्टि को संवारते हैं? एक कदम यह है कि दैनिक अनुष्ठान, प्रार्थना और ईश्वरीय वचन के अध्ययन से हृदय को स्थिर करें ताकि परमेश्वर का संदेश स्पष्ट रूप से समझ में आए। याद रखें कि चमत्कार केवल संकेत हैं; उनकी वास्तविक महत्ता तब है जब हमारा हृदय विश्वास से भरे और स्मरण-शक्ति जागृत हो।

संक्षेप

मरकुस 8:18 हमें चेतावनी देता है कि शारीरिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है; ईश्वर के उद्देश्य समझने के लिए आत्मिक दृष्टि और स्मरण-शक्ति की आवश्यकता है. यदि हम सचेत और विनयपूर्वक सुनना-देखना बनाए रखें, तो हम यीशु मसीह के मिशन को गहराई से समझ पाएंगे.

विद्वान-आइडिया (संक्षेप)

यह-दृष्टि-सम्बंधी धारा कई प्राचीन टिप्पणीकारों के विचार से मिलती-जुलती है: गम्भीरता से स्मरण और आत्म-निष्ठा की आवश्यकता, ताकि चमत्कार मात्र घटना नहीं बल्कि उद्धार की राह बने।

उद्धरण-उद्धृत शब्द (यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के मूल पाठ से विशेष वाक्यों को संक्षेप में उद्धृत किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मरकुस 8:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

प्रेरितों के काम 28:26 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रेरितों के काम 28:26 (HINIRV) »
‘जाकर इन लोगों से कह, कि सुनते तो रहोगे, परन्तु न समझोगे, और देखते तो रहोगे, परन्तु न बूझोगे;

मत्ती 13:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 13:14 (HINIRV) »
और उनके विषय में यशायाह की यह भविष्यद्वाणी पूरी होती है: ‘तुम कानों से तो सुनोगे, पर समझोगे नहीं; और आँखों से तो देखोगे, पर तुम्हें न सूझेगा।

मरकुस 4:12 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मरकुस 4:12 (HINIRV) »
इसलिए कि “वे देखते हुए देखें और उन्हें दिखाई न पड़े और सुनते हुए सुनें भी और न समझें; ऐसा न हो कि वे फिरें, और क्षमा किए जाएँ।” (यशा. 6:9-10, यिर्म. 5:21)

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें