Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 8:1 मरकुस 8:2 मरकुस 8:3 मरकुस 8:4 मरकुस 8:5 मरकुस 8:6 मरकुस 8:7 मरकुस 8:8 मरकुस 8:9 मरकुस 8:10 मरकुस 8:11 मरकुस 8:12 मरकुस 8:13 मरकुस 8:14 मरकुस 8:15 मरकुस 8:16 मरकुस 8:17 मरकुस 8:18 मरकुस 8:19 मरकुस 8:20 मरकुस 8:21 मरकुस 8:22 मरकुस 8:23 मरकुस 8:24 मरकुस 8:25 मरकुस 8:26 मरकुस 8:27 मरकुस 8:28 मरकुस 8:29 मरकुस 8:30 मरकुस 8:31 मरकुस 8:32 मरकुस 8:33 मरकुस 8:34 मरकुस 8:35 मरकुस 8:36 मरकुस 8:37 मरकुस 8:38



मरकुस 8:13 का अर्थ
कहावत का सीधा अर्थ है: यीशु ने उस आशंका-भरे समय के बाद लोगों की निराशा से थोड़ा विश्राम पाने के लिए लौटकर नाव पर चढ़कर पार चला गया। वह अब एक नई दिशा की तैयारी कर रहे थे, ताकि वे अपने शिष्यों के साथ आगे के संदेश को गति दे सकें और भीड़ से अलग एक क्षण लेकर दोबारा सेवकत्व के लिए रणनीति बना सकें।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
इस पाठ के आसपास यीशु ने लोगों के साथ अनेक चमत्कार किए थे और कई बार भीड़ उनसे मिलने आई। अब वे अपनी यात्रा के एक चरण से दूसरे चरण में प्रवेश कर रहे थे, जब अवसर और गहरे शिक्षण के लिए समानांतर समय चाहते थे। यह वाकया दर्शाता है कि हिंडोले-जनसमूह से दूर जाकर भी वे प्रभुता और दिशा प्रदान करने के लिए एकान्त समय की ओर बढ़ते हैं।
व्याख्यात्मक विचार
निहित विषयगत बिंदु
अन्य संबंधित पद और संक्षिप्त व्याख्या
כבन्ध-स्वरूप संदर्भ: - एकांत की विश्राम: यीशु के जीवन में कई जगह एकांत समय मसीहीं शिक्षा के लिए मंच बनता है; इससे पाठक सीखते हैं कि सत्य के लिए रोड़ नीचे उतारना पड़ता है। - प्रशिक्षण का क्रम: शिष्य तैयार होते हैं—चाहे शोर हो या सन्नाटा, मिशन के लिए क्रमबद्ध तैयारी जरूरी है। - उद्धारकर्ता का दायित्व: जनसमूह के बीच से हटना, ताकि वे समूह को सही दिशा में मार्गदर्शन दे सकें।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका सरल सार
1) मत्ती 14:22-23: भीड़ से अलग होकर Jesus ने पहाड़ पर जाकर प्रार्थना की—आत्मिक एकांत से मार्गदर्शन मिलता है। यह पाठक को बताता है कि कठिन समय के बाद विश्राम और प्रार्थना आवश्यक है।
2) मरकुस 6:31: यीशु ने कहा, “चलो एकान्त स्थान को जाकर थोड़ा आराम करें”—यही विचार आगे के प्रचार के लिए आवश्यक तैयारी को दर्शाता है।
3) लूका 9:10-11: शिष्य पौ-बार बार मानव-समाज के बीच आते-जाते रहते हैं, परन्तु एकांत में शिक्षण और पुष्टि को वर्धमान बनाते हैं।
सार्वजनिक और व्यवहारिक निष्कर्ष
इस संक्षिप्त वाक्य से सीख मिलती है कि लक्ष्य-जनक सेवा के साथ-साथ एकान्त समय की महत्वपूर्ण भूमिका है। संतुलन बनाए रखना और आवश्यक प्रस्थान—यह दोनों ही प्रत्यक्ष सेवा के स्वस्थ मार्ग को दर्शाते हैं। आप चाहे कैसा भी कार्य करें, कुछ समय अपने विचारों और प्रार्थना के लिए अवश्य निकालिए ताकि दिशा और प्रेरणा स्पष्ट रहे।
नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के लिखित उद्धरण इस टिप्पणी में आवश्यकतानुसार समाहित किए गए हैं; नीचे उद्धरण दिए जा सकते हैं if available: