Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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गिनती 16:29 का संदर्भ और अर्थ
परिस्थितिगत संदर्भ: यह पद उन घटनाओं के बीच मिलता है जब कोहनी-यात्री दातों के उपयोग से अलग होकर कवरित विद्रोह के समय मूसा और हारून के नेतृत्व के विरुद्ध विरोध दिखाते हैं। यह वही घटना है जिसमें मरियम और आरोन सहित कुरुह और दहालत के सदस्य परमेश्वर के चयनित नेतृत्व (दाऊद, आदि) के विरुद्ध सीधे खड़े होते हैं; परन्तु यहाँ विशेष रूप से दावेदारी की स्पष्ट चेतावनी दी जाती है कि यदि उनके दण्ड लोगों जैसे ही हों, तो वे परमेश्वर से नहीं भेजे गए होंगे।
क्या यह पाठ परमेश्वर पर विश्वास और नीयत के बारे में बताता है
पद स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के अभिषिक्त नेता और उनकी योजना मानव-निर्मित “मानव-न्याय” से ऊँचाई नहीं पाती। यदि कोई व्यक्ति मृत्यु को अन्य लोगों के समान मान लेता है, और दण्ड भी उनके ही समान है, तो यह संकेत है कि वह परमेश्वर के भेजे हुए नहीं हैं; क्योंकि ईश्वर के संदेश की पुष्टि उसे क्रियान्वित कर दिखाती है कि कैसे वह जीवन के साथ आगे बढ़ता है, और उसे चुनने में उसकी शक्ति, सत्ता और पवित्रता झलकती है।
मुख्य शब्दों और चित्रों की शब्द-स्पष्टता
संबद्ध बाइबिल पाठ (Cross-references)
1) गिनती 27:15-18—यीशु-प्रकृति के विपरीत, परमेश्वर चुनकर देता है और अपने सेवक को नियुक्त करता है; यह देखना कि नेतृत्व के चयन में जीवन-जीवित संकेत कैसे मिलते हैं।
2) सम्पन्न, यशायाह 42:6-7—प्रेषित के रोल में रोशनी और उद्धार की सेवा का उद्घोष; दिखाता है कि परमेश्वर कैसे अपने दूत के द्वारा नयी दिशा देता है।
3) मत्ती 24:24—झूठे धार्मिक संदेशों के दावों के विरुद्ध सावधान रहने का इशारा; իրական ढांचा वह है जिसका स्रोत परमेश्वर से आता है।
आज के पाठ के साथ व्यवहार
- परमेश्वर के दूत की पहचान उनके उद्देश्य और उनके संदेश की पवित्र प्रकृति से होती है; हमें किसी भी प्रचार या निर्देश को उसकी जाँच करना चाहिए कि क्या वह ईश्वर की ओर से है या नहीं।
- प्रभु के निर्देशों के अनुरूप जीवन जीना हमारी जिम्मेदारी है। अगर कोई मार्ग जीवन के विरुद्ध दिखे, तो उसे अस्वीकार कर देना चाहिए ताकि हमारी आस्था सत्य के अनुसार सुधारी जा सके।
सार-संयुक्त व्याख्या
यह पद पाठकों को याद दिलाता है कि परमेश्वर की योजनाओं में सत्ता, उद्देश्य और प्रमाणिकता एक साथ जुड़ी रहती है। यदि संदेशदाता वास्तव में भेजा गया होता है, तो उसका प्रभाव और परिणाम परमेश्वर के द्वारा निर्धारित होते हैं; और यदि नहीं, तो उसमें क्रियात्मक नींव नहीं मिलती। यह विश्वासयोग्य परीक्षण है कि हम किस प्रकार परमेश्वर के द्वारा भेजे गए के संकेतों पर भरोसा करें और असत्य-प्रचार से सावधान रहें।
एतिहासिक-टिप्पणियाँ (उद्धृत विचारधारात्मक प्रभाव)
हम मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायग्रामिक तर्कों को संक्षेप में देखते हैं: वे कहते हैं कि परमेश्वर के संदेशों की पुष्टि उन्नत क्रियाओं, अनुशासन और नैतिक परिणामों द्वारा होती है; एक दूत जो परमेश्वर से नहीं आता, वह अपने संदेश में आसानी से असंगत होता है।
उद्धरण योग्य रचनाओं से चयनित छोटी पंक्तियाँ: “यदि यहोवा ने नहीं भेजा, तो उसका संदेश अधूरा है” (सार रूप से इस प्रकार के विचार दूरस्थ रूप से संबद्ध हो सकते हैं; यहाँ पूर्ण उद्धरण का उल्लेख नहीं है)।