Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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पद का तत्कालीन संदर्भ एवं संकेत
गिनती 16:46 वह घटना तब है जब हारून से कहा गया कि वे धूपदान को उठाकर उसमें आग जमा करें और उस धूप को मण्डली के सामने फूँक दें ताकि यहोवा के क्रोध से फैल रही महामारी का प्रसार रोक सके। यह प्रायश्चित्त का प्रतीक है—क्योंकि यहूदा समुदाय में परमेश्वर के पवित्रता के उल्लंघन पर उसकी माफी और शांतिकर सुधार की आवश्यकता थी। यह घटना क़ॉइनर, क़रेउव, दतियों और अन्य विद्वानों के विरोध के बाद सामने आई, और मसीह-पूर्व पवित्रता-गंध की भूमिका धूपदान से प्रकट होती है।
ईश्वर का प्रति-faith के संकेत और पाठ का मूल संदेश
यह पाठ यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपनी पवित्रता के साथ साथ कृपा के मार्ग खोलते हैं जब उनकी जनता क्षमा और प्रतिज्ञा मांगती है। धूपदान के धुएँ का प्रतीक है—क्योंकि धूप मनुष्य की प्रार्थना और भक्तिगान को ईश्वर के निष्कर्ष तक पहुँचाने का साधन बनती है। मण्डली में व्याप्त महामारी इस बात की ओर संकेत करती है कि परमेश्वर की पवित्रता और अधर्म के बीच कितनी दूरी है, और प्रभु की दया तभी मिलती है जब राजा-महिमाओं के दबाव में भी लोग अपने दोषों को स्वीकार कर लेते हैं।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
संबद्ध कथन (Cross-references) with brief explanations
आज के जीवन में अनुप्रयोग
कुल मिलाकर यह प्रसंग श्रद्धा, पवित्रता और समुदाय-योजनाओं के संतुलन की शिक्षा देता है। गिरावट के समय भी एक विश्वासयोग्य नागरिक या नेता संकलन कर सकता है—यह दिखाने के लिए कि प्रायश्चित्त और प्रार्थना से परमेश्वर के कोप को शांत किया जा सकता है। आज के चर्च-समुदाय में इसका संदेश है कि आंतरिक पवित्रता, समूह के लिए जिम्मेदारी और क्रोध के समय में सामुदायिक प्रार्थना कैसे एक-दूसरे को बचाती हैं।
एडम क्लार्क, मैथ्यू हेन्नेरी, और अर्बन बार्न्स के टिप्पणियों में से पाठ के हिस्से पर जो पंक्तियाँ उपलब्ध हैं, वे यह दर्शाती हैं कि धूपदान का प्रयोग बाहरी आस्था नहीं, बल्कि दिल की सच्ची प्रवृत्ति और समुदाय के लिए बलिदान-भाव का प्रतिरूप है—परमेश्वर के विश्वासयोग्यता के साक्षी के रूप में।
उद्धरण चयन (संकेतित): "धूपदान से आग लेकर" का वर्णन यीशुदेव-पूर्व सोच में प्रायश्चित्त की क्रिया के रूप में बार-बार उद्धृत हुआ है; यदि आपके संदर्भ में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट शब्द उद्धृत हों, उन्हें आवश्यकता अनुसार उद्धृत किया जा सकता है।