Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
फिलिप्पियों 1:1 फिलिप्पियों 1:2 फिलिप्पियों 1:3 फिलिप्पियों 1:4 फिलिप्पियों 1:5 फिलिप्पियों 1:6 फिलिप्पियों 1:7 फिलिप्पियों 1:8 फिलिप्पियों 1:9 फिलिप्पियों 1:10 फिलिप्पियों 1:11 फिलिप्पियों 1:12 फिलिप्पियों 1:13 फिलिप्पियों 1:14 फिलिप्पियों 1:15 फिलिप्पियों 1:16 फिलिप्पियों 1:17 फिलिप्पियों 1:18 फिलिप्पियों 1:19 फिलिप्पियों 1:20 फिलिप्पियों 1:21 फिलिप्पियों 1:22 फिलिप्पियों 1:23 फिलिप्पियों 1:24 फिलिप्पियों 1:25 फिलिप्पियों 1:26 फिलिप्पियों 1:27 फिलिप्पियों 1:28 फिलिप्पियों 1:29 फिलिप्पियों 1:30



Reader-friendly overview
फिलिप्पियों 1:15 में प्रेरित पॉल स्पष्ट करते हैं कि मसीह का प्रचार कुछ दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से हो रहा है और कुछ नेक मनसा से। यह पाठ हामी को सिखाता है कि प्रेरणा की गुणवत्ता कैसे संदेश के प्रभाव तथा उत्तरदायित्व को बदल देती है। जहाँ एक ओर कुछ प्रचारक ईर्ष्या, दावे या टकराहट के साथ कार्य कर सकते हैं, वहीं अन्य सत्य और प्रेम के साथ प्रेरित रहते हैं, ताकि लोग उद्धार की बात सुनें और मसीह की महिमा बढ़े।
Verse in its chapter — पॉल की संदर्भभूमि
फिलिप्पियों की चिट्ठी रोम से पहले चर्चों को एक प्रेरित उद्धारकर्ता की खुशखबरियों में एकता और आनंद के लिए लिखी गई थी। पॉल यहां यह दिखाते हैं कि मसीह प्रचार के तरीके भिन्न हो सकते हैं, पर लक्ष्य अगर स्पष्ट है—यानी मसीह को बढ़ाना—तो भीचExpectation से अधिक गहरी आत्म-उत्पत्ति बनती है: “क्योंकि कुछ डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं, और कुछ भली मनसा से।”
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य संदेश यह है कि प्रचार के गुण-धर्म में प्रेरणा का आकलन जरूरी है। भले ही मसीह का नाम लिया जाए, पर उद्देश्य नीतिगत भिन्नताओं के कारण मेल-भेद पैदा कर सकता है। संतोषपूर्वक और प्रेमपूर्ण मन से प्रचार करें, ताकि उद्धार की बात दिल तक पहुँचे और संतुलित नैतिकता से काम लिया जाए।
महत्वपूर्ण उद्धरण और चर्चित दृष्टिकोण
यहाँ पारंपरिक टिप्पणीकारों से मिले संकेत सीधे उद्धृत नहीं होते, पर उनके विचार एकीकृत रूप से इस प्रकार आते हैं:
3 cross-references और उनका छोटा समायोजन
1) रोम 14:19 — एक दूसरे के साथ प्रेम और शांतिक्रमण से जीवन के मार्ग पर आगे बढ़ना। यह दिखाता है कि वास्तविक हित नीतिपूर्ण एकता में है, प्रचार के परिणाम से अधिक।
2) 1 कुरिन्थी 3:3 — मतभेदों के कारण आहत भावनाएँ, जो बताती हैं कि रग-रग में स्वार्थ भरा हो तो मसीह का कार्य कुशलता से नहीं चलता।
3) मत्ती 6:1 — प्रचार के दौरान भी हमारे कर्म की स्पष्टता और ईमानदारी सर्वोच्च होनी चाहिए।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
फिलिप्पियों 1:15 में प्रभु को प्रचार के उद्देश्य की पवित्रता पर जोर मिलता है। भले ही प्रचारकर्ता के भीतर विभिन्न प्रेरणाएँ हों, विश्वासयोग्य दिल यह सीख देता है कि उद्धार का संदेश प्रेम और सत्य के साथ निर्बाध पहुँचे। परमेश्वर के उद्देश्य में विश्वास और नम्रता ही हमारे कार्यों की कसौटी है।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस
रोम 12:18 — जो कुछ भी हो सके, शांति से जीएँ। यह verses बताती हैं कि एकता और शांति प्रचार के माहौल को स्वस्थ बनाती है।
2 तीमुथ 2:14 — सत्य और प्रेम से शिक्षा दें; ताकीद करें कि प्रचार में उद्देश्य साफ रहे।
इन सभी विचारों के समेकन से हम देखते हैं कि मसीह का सच प्रभावी तभी है जब हमारी प्रेरणा स्वच्छ और दिल से जुड़ी हो।