Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22Verse
प्रकाशितवाक्य 14:1 प्रकाशितवाक्य 14:2 प्रकाशितवाक्य 14:3 प्रकाशितवाक्य 14:4 प्रकाशितवाक्य 14:5 प्रकाशितवाक्य 14:6 प्रकाशितवाक्य 14:7 प्रकाशितवाक्य 14:8 प्रकाशितवाक्य 14:9 प्रकाशितवाक्य 14:10 प्रकाशितवाक्य 14:11 प्रकाशितवाक्य 14:12 प्रकाशितवाक्य 14:13 प्रकाशितवाक्य 14:14 प्रकाशितवाक्य 14:15 प्रकाशितवाक्य 14:16 प्रकाशितवाक्य 14:17 प्रकाशितवाक्य 14:18 प्रकाशितवाक्य 14:19 प्रकाशितवाक्य 14:20



प्रकाशितवाक्य 14:15 — ब्योरेवार दृश्य और संदेश
पद का आरम्भ एक दृश्य के भीतर होता है: एक स्वर्गदूत मन्दिर से निकलता है और बादल पर बैठे हुए एक उन्नत प्रतिमा की ओर बड़े शब्द से पुकारता है। यह एक निर्णायक समय के संकेत के रूप में आता है— पृथ्वी की खेती पक चुकी है, अर्थात् भूमि पर जजमेंट की समय-सारिणी पूरी हो चुकी है और परमेश्वर की व्यवस्था का इकट्ठा परिणाम अब नजदीक है।
ईश्वर की महत्ता और विश्वास की दृष्टि
यह पाठ परमेश्वर की योजना के कड़े सत्य को उद्घाटित करता है: समय का समापन और न्याय का त्वराश्रम। मन्दिर से निकलकर यह आवाज़ देना, ईश्वर के निष्ठुर और पवित्र न्याय के प्रकाशित होने की बात स्पष्ट करती है। परमेश्वर की शांत-व्यवस्था और पवित्रता, तथा मानव इतिहास के भीतर उसकी निरंतर निगरानी—ये सब इस वाक्य के भीतर उभरते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
इन चित्रों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर ने पृथ्वी पर एक निश्चित समय निर्धारित कर रखा है जो अब नजदीक है।
अन्य पवित्र संदर्भ (cross-references) और उनका छोटा तार्किक संबंध
इन संदर्भों से यह समझ में आता है कि समय-सीमा के भीतर नज़दीकी judgment और God's Kingdom के पूरा होने का आशय एक ही ध्वनि से बजता है—समय आ पहुँचा है और पूरी खेती पक चुकी है।
आज के लिए अनुप्रयोग
1) समय की तैयारी: जीवन के हर क्षेत्र में पवित्रता और ईमानदारी बनाए रखें, क्योंकि परमेश्वर के निर्णय की घड़ी कब आ जाए, यह अज्ञात है।
2) फसल की प्रतीक के अनुसार कर्म: हमारी सोच, शब्द और कर्म ऐसी दिशा में हों जो ईश्वर के राज्य के लिए उपयुक्त और सेवक-उत्साह से भरे हों।
3) आस्था की सजगता: विश्वास में स्थिर रहें, क्योंकि आगे की कथाओं में यह दर्शाया गया है कि प्रभु के आदेशों के अनुसार तैयारी अनिवार्य है।
संक्षेप निष्कर्ष
यह वाक्य परमेश्वर के न्याय के समय के निकट आने का दृढ़ संकेत है। मन्दिर से निकला स्वर्गदूत दृश्य-नुकते पर जोर देता है कि पृथ्वी की खेती पक चुकी है; अब न्याय के समय का आना अवश्य है। परन्तु यह भी आश्वस्त करता है कि ईश्वर की योजना में तृप्ति और नई दुनिया का प्रारम्भ है।
नोट: नीचे उद्धरण सीधे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से प्रत्यक्ष शब्द-युक्त नहीं दिए गए हैं; यदि आवश्यक हो तो सन्दर्भ-आधारित संक्षेप में उनके सामान्य विचार को एकीकृत किया गया है。