प्रकाशितवाक्य 19:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर मैंने उस पशु और पृथ्वी के राजाओं और उनकी सेनाओं को उस घोड़े के सवार, और उसकी सेना से लड़ने के लिये इकट्ठे देखा।

प्रकाशितवाक्य 19:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

प्रकाशितवाक्य 19:19 का संदर्भ और अर्थ

पद 19:19 तक पहुंचना हमें उन घटनाओं के महान क्रम के भीतर रखता है जहाँ परमेश्वर की विजय का अंतिम दृश्य और दुष्टों का विघटन स्पष्ट होता है। यहाँ प्रकाशितवाक्य 19:19 में घमण्डी मैदान में यह स्पष्ट किया गया है कि संसार के राजाओं और उनके सेनापतियों ने मसीह के ऊपर सत्ता का विरोध किया, परन्तु घृणित युद्ध के बावजूद प्रभु यीशु का विजयरत्न स्थिर रहता है। यह पद उस समय की चरम दुराचार और फिर भी अद्भुत प्रतिफल को दिखाते हैं जब पृथ्वी के शक्तिशाली साम्राज्य एकत्र होकर ईश्वर के विरुद्ध उठते हैं, परन्तु उनका पराभव तय है।

केंद्रीय अर्थ

पद 19:19 में “पशु” और “पृथ्वी के राजाओं” की मिलकर की गई लड़ाई एक अंतिम दशा का प्रतीक है: विश्व के व्यवस्थित प्रतिरोध के बावजूद मसीह अपनी बहुमूल्यता और अधिकार से विजयी रहते हैं। यह दृश्य यह बताता है कि दुष्ट व्यवस्था एकत्र होकर भी दिव्य न्याय से नहीं बच सकती; अंततः इसकी सत्ता ईश्वर के तलवार की नोंक से ध्वस्त हो जाती है।

मुख्य थीम्स

  • विश्व-सत्ता का विरोधी ताँता बनना और फिर उसका पराभव।
  • ईश्वर के क्रोध और न्याय का समय—अंत की लड़ाई का उद्घोष।
  • मसीह के सर्वशक्तिमान शासन के सामने विदेशी साम्राज्यों की हिमायती कड़ी परीक्षा।

संदर्भ-निकट सम्बन्ध

1) प्रकाशितवाक्य 16:14—यह दर्शाता है कि सारी पृथ्वी कैसे शैतानी उद्धोषणों के द्वारा एकत्रित होती है, ताकि ईश्वर के प्रतिशोध का दिन आये; यहाँ 19:19 उस एकत्रीकरण का चरम है।

2) भूमिका 14:20—प्रेम के मार्ग पर चलने वाले के लिए अंततः न्याय और विजय के संकेत—यह बताता है कि सचमुच के संघर्ष के बाद सत्य का राज्य स्थापित होगा।

3) यूहन्ना 16:33—येसु ने कहा कि विश्व में संकट होंगे, परन्तु नीचे नहीं उतरेंगे; यहां लिखा गया है कि किस प्रकार चरम संकट के बावजूद भक्तों के लिए स्थिर आश्वासन है कि विजयी प्रभु का राज्य आना ही है।

व्यावहारिक अनुभूति

जीवन के कठिन मोड़ों में भी विश्वासियों को यह याद दिलाता है कि सत्ता की अंतिम निर्णय ईश्वर के हाथ में है। भय और विरोध के बीच साहस रखें: मसीह के साथ रहने से ही वास्तविक जीत संभव है। यह पाठ हमें अपनी प्राथमिकताओं को माँगने के बजाय “प्रेम, सत्य और विश्वास” की रक्षा के लिए तैयार रहने को प्रेरित करता है।

संक्षिप्त समाहार

पढ़ते समय स्पष्ट होता है कि इतिहास की धारा अंततः उस दिन की ओर अग्रसर है जब ईश्वर का राज्य स्थापित होगा और सच्चे राजा, यीशु मसीह, सभी विरोधियों को परास्त करेंगे। यह भय नहीं, विश्वास का संदेश है: प्रभु की विजय स्थायी है।

कठिन पद-टिप्पणी के छोटे उद्धरण (एतिहासिक पूर्ववर्तनों से)

यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के शब्दों में संक्षेप उद्धरण देखते हैं, तो कुछ मौलिक विचार इस प्रकार हैं:

• “येशु मसीह की विजय एक सार्वभौमिक और निर्णायक विजय है।” (संक्षेप)

• “सत्ता का शिखर वही खोलेगा जो अंत में न्याय के साथ उपलब्ध होगा।” (संक्षेप)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

प्रकाशितवाक्य 19:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और उन्होंने राजाओं को उस जगह इकट्ठा किया, जो इब्रानी में हर-मगिदोन कहलाता है।

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ये चिन्ह दिखानेवाली* दुष्टात्माएँ हैं, जो सारे संसार के राजाओं के पास निकलकर इसलिए जाती हैं, कि उन्हें सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के उस बड़े दिन की लड़ाई के लिये इकट्ठा करें।

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“और पृथ्वी के राजा जिन्होंने उसके साथ व्यभिचार, और सुख-विलास किया, जब उसके जलने का धूआँ देखेंगे, तो उसके लिये रोएँगे, और छाती पीटेंगे। (यिर्म. 50:46)

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