Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22Verse
प्रकाशितवाक्य 19:1 प्रकाशितवाक्य 19:2 प्रकाशितवाक्य 19:3 प्रकाशितवाक्य 19:4 प्रकाशितवाक्य 19:5 प्रकाशितवाक्य 19:6 प्रकाशितवाक्य 19:7 प्रकाशितवाक्य 19:8 प्रकाशितवाक्य 19:9 प्रकाशितवाक्य 19:10 प्रकाशितवाक्य 19:11 प्रकाशितवाक्य 19:12 प्रकाशितवाक्य 19:13 प्रकाशितवाक्य 19:14 प्रकाशितवाक्य 19:15 प्रकाशितवाक्य 19:16 प्रकाशितवाक्य 19:17 प्रकाशितवाक्य 19:18 प्रकाशितवाक्य 19:19 प्रकाशितवाक्य 19:20 प्रकाशितवाक्य 19:21



पर प्रकाशितवाक्य 19:16 का हिंदी टीकात्मक दृष्टिकोण
प्रकाशितवाक्य के अध्याय 19 में जीवन के अंतिम दिनों की महिमा और प्रभु यीशु ke शासन की उद्घोषणा प्रकट होती है। इसVerse में राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु लिखा हुआ वस्त्र और जाँघ पर अंकित नाम इस महान विजयी ईश्वर के गौरवपूर्ण व्यक्तित्व को हमें स्मरण कराते हैं। यह पवित्र वर्णन हमें क्राइसटियन विश्वास के धैर्य, विश्वास और प्रभु के विश्वासी होने की पुष्टि देता है।
पद का छोटा पाठ और संदर्भ
और उसके वस्त्र और जाँघ पर यह नाम लिखा है: “राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु।” (1 तीमु. 6:15)
अध्याय के भीतर संदर्भ और महत्त्वपूर्ण बोध
प्रकाशितवाक्य अध्याय 19 में यीशु मसीह की विजय की महिमा उत्कंठा के साथ प्रकट होती है। इसVerse में उसके वस्त्रों पर “राजाओं का राजा” और “प्रभुओं का प्रभु” लिखा है, जो उसकी सर्वोच्च अधिकारिता, पवित्रता और अंत तक टिके रहने वाले शासन को दर्शाता है। यह शब्दावली पवित्रता, न्याय और उद्धार के लिए उसके दिव्यमय कर्तव्य की पुष्टि करती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य शिक्षाः - ईश्वर का सर्वाधिक अधिकार: यीशु मसीह का राज-सत्ता सभी मानव-शासन से ऊपर है। - दृढ़ विश्वास और निष्ठा: जो अपने प्रभु के साथ हैं वे अंततः विजयी होंगे। - पवित्रता की पहचान: वस्त्र और जाँघ पर लिखा नाम अर्थ-रूपक रूप से ईश्वर की पवित्रता और प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
अनुसार आगे की तुलना
— Matt. 28:18 के समान, जहाँ सभी शक्तियाँ यीशु के अधीन मानी जाती हैं, यह Verse उनकी सार्वभौमिक सत्ता की उद्घोषणा करता है। — फिलिप्पियों 2:9-11 में यीशु की अत्युच्च महानत्ता और सभी नामों के ऊपर उठना स्पष्ट है, जो इस Verse के संदेश से संगत है। — दोहे 6:10-11 में भी परमेश्वर के विनम्र और शक्तिशाली प्रताप का चित्रण है जो यह बताता है कि ईश्वर कैसे मानव इतिहास के अंत तक न्याय और उद्धार के साथ उपस्थित रहते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- व्यक्तिगत जीवन में: चाहे समाज में पद-प्रतिष्ठा कैसी भी हो, हमारा जीवन यीशु के राज के अनुरूप हो। - समुदाय और नैतिकता: ईश्वर के महान राज्य के प्रति हमारी आस्था और आचरण सदा एक जैसे रहें। - विश्वास की ठहराव: कठिन समय में भी प्रभु के प्रभुत्व पर अडिग रहें, क्योंकि वह राजा-राज्यों का राजा है।
क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ संक्षिप्त जोड़
1) गलातियों 6:14–15 — मसीह के साथ नया जीवन हमें पुराने बन्धनों से मुक्त करता है; यह Verse प्रभुत्व की पुष्टि के साथ जीवन का renewing संकेत देता है। 2) यूहन्ना 19:16–18 — यीशु की प्रतिष्ठा और विजय का प्रत्यक्ष दृश्यावलोकन; परमेश्वर के राज्य के बनाम संसार के साम्राज्यों का विरोध स्पष्ट होता है। 3) रूत 2:12 — विश्वास और उद्धार की पहचान पवित्रता से जुड़ी है; प्रभु के सच्चे राज्य की ओर संकेत देती है।
संक्षेप निष्कर्ष
प्रकाशितवाक्य 19:16 में हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह की महान सत्ता और पवित्रता का उद्घोष है। उसका वस्त्र और जाँघ पर लिखा नाम यह स्पष्ट करता है कि वह राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु है—पूर्ण अधिकार, न्याय और उद्धार का स्रोत। इस संदेश से प्रेरणा मिलती है कि हमारा जीवन भी उसकी sovereignty के नीचे, उसकी इच्छा के अनुसार संचालित हो।
सूचनात्मक उद्धरण संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों के अनुसार, प्रभु मसीह की उच्च सत्ता, पवित्रता और निर्णायक विजय पर प्रकाश डाला गया है; अगर इन टिप्पणीकारों के उल्लेखित उद्धरण मिलते हैं, वे नीचे संक्षेप रूप में उद्धृत हैं और पाठ के अनुरूप प्रमुख बिंदु को संरक्षित करते हैं।
अनुवाद-उद्धरण (जहाँ उपलब्ध): “राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु।”